दैनिक खानपान में जब भी जरूरी मिनरल्स की बात आती है, तो पोटैशियम का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। आम तौर पर लोग इसकी जरूरत पूरी करने के लिए केले पर सबसे ज्यादा निर्भर रहते हैं। लेकिन अगर रोज एक ही फल खाकर ऊब चुके हैं, तो थाली में कई दूसरे पौष्टिक विकल्प जोड़े जा सकते हैं। हमारे शरीर में जब इस मिनरल की कमी होने लगती है, तो मांसपेशियों में ऐंठन, लगातार थकान और सामान्य शारीरिक कमजोरी जैसे लक्षण उभर सकते हैं। ऐसे में सिर्फ एक ही फल पर निर्भर रहने के बजाय अन्य प्राकृतिक स्रोतों को भोजन का हिस्सा बनाना समझदारी भरा कदम हो सकता है।
शारीरिक गतिविधियों को सामान्य बनाए रखने में पोटैशियम अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह तत्व शरीर के भीतर तरल पदार्थों के सही संतुलन को बनाए रखता है, मांसपेशियों के संकुचन को नियंत्रित करता है और दिल की धड़कन की लय को ठीक रखने में सहायता करता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ संतुलित आहार के माध्यम से नियमित रूप से पर्याप्त मिनरल्स लेने पर जोर देते हैं। किसी भी व्यक्ति के शरीर को कितनी मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यकता है, यह उसकी उम्र, जीवनशैली और व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति पर भी निर्भर करता है।
ताजे फल और सूखे मेवे भी हैं मिनरल्स के बेहतरीन स्रोत
अगर आप केले से इतर विकल्प तलाश रहे हैं, तो एवोकाडो एक शानदार खाद्य पदार्थ साबित हो सकता है। इसमें पोटैशियम की अच्छी मौजूदगी के साथ-साथ शरीर के लिए फायदेमंद हेल्दी फैट्स भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त सूखे मेवों की बात करें, तो सूखी खुबानी और किशमिश जैसे विकल्पों को भोजन में शामिल किया जा सकता है। ये मेवे न केवल इस जरूरी मिनरल की भरपाई करते हैं, बल्कि अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व भी शरीर को देते हैं। इन्हें दिन के समय सीमित मात्रा में हल्के नाश्ते के रूप में खाना बेहद आसान और फायदेमंद रहता है।
पेय पदार्थों में प्राकृतिक नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइट्स का सबसे सहज और असरदार स्रोत माना जाता है। खासकर जब शरीर में डिहाइड्रेशन या पानी की कमी हो जाए, तब नारियल पानी शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को तेजी से बहाल करने में मदद करता है। इसके अलावा कई मौसमी फल भी इस मिनरल की दैनिक आवश्यकता को पूरा करने में सहयोगी बनते हैं।
अन्य मौसमी फलों से बनाएं पोषक थाली
फलों की टोकरी में अनार को शामिल करना भी एक समझदारी भरा फैसला है, क्योंकि इसमें पोटैशियम के साथ कई महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्व मिलते हैं। वहीं कीवी फल भी एक बढ़िया विकल्प है, जिसमें इस मिनरल के अलावा विटामिन सी और जरूरी फाइबर की भरपूर मात्रा मौजूद रहती है। इसके साथ ही कटहल, खरबूजा और हनीड्यू खरबूजा जैसे फल भी दैनिक जरूरतों में मदद कर सकते हैं। खरबूजे की खासियत यह है कि इसमें पानी का अंश बहुत अधिक होता है, जिससे शरीर में नमी बनी रहती है और हाइड्रेशन बेहतर रहता है। हालांकि किसी भी फल या खाद्य वस्तु को किसी गंभीर बीमारी का सीधा इलाज मानकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
घर पर तैयार करें पोषक तत्वों से भरपूर खास शेक
यदि किसी को साधारण केले का शेक पीना पसंद नहीं है, तो दूध के आधार पर एक अलग और सेहतमंद ड्रिंक तैयार की जा सकती है। इसके लिए एक गिलास दूध में लगभग चार बादाम, थोड़े मखाने और अलग-अलग तरह के बीज जैसे चिया सीड्स और पंपकिन सीड्स मिलाए जा सकते हैं। इसमें किशमिश को भी शामिल किया जा सकता है। यह मिश्रण शरीर को कई स्रोतों से एक साथ पोषक तत्व उपलब्ध कराता है और इसे आसानी से रोजमर्रा के नाश्ते का हिस्सा बनाया जा सकता है।
अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक डॉ. रजिता का कहना है कि सर्दियों के दिनों में लोग अनार और गाजर का ताजा जूस भी अपनी दिनचर्या में जोड़ सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए घिया के जूस को भी एक विकल्प के रूप में बताया। डॉ. रजिता ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग अनार का रस नहीं ले पाते हैं, वे मौसमी के जूस का सहारा ले सकते हैं। हालांकि जूस या किसी भी विशेष खानपान का चुनाव करते समय व्यक्ति को अपनी शारीरिक स्थिति का ध्यान जरूर रखना चाहिए। यदि किसी को पथरी जैसी कोई विशिष्ट स्वास्थ्य समस्या है, तो आहार में बड़ा बदलाव करने से पहले हमेशा चिकित्सकीय परामर्श लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।



















