फरीदाबाद में दिवाली के पावन पर्व पर बाजारों की रौनक इन दिनों चरम पर है। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए स्थानीय दुकानदार तरह-तरह के लुभावने ऑफर और भारी डिस्काउंट दे रहे हैं। कहीं बीस प्रतिशत तो कहीं पचास से साठ प्रतिशत तक की भारी छूट का लालच दिया जा रहा है। इस चकाचौंध और जल्दबाजी के माहौल में कई बार ग्राहक बिना ठीक से जांचे-परखे सामान खरीद लेते हैं। घर पहुंचने पर उन्हें अहसास होता है कि उत्पाद या तो पूरी तरह खराब है या फिर दुकानदार ने गलत जानकारी देकर उन्हें घटिया चीज थमा दी है। ऐसी अप्रिय स्थिति में एक आम उपभोक्ता के पास क्या कानूनी विकल्प बचते हैं और वह अपने मेहनत के पैसे कैसे वापस ले सकता है, इस बारे में फरीदाबाद के सेक्टर-12 कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले एडवोकेट मोहन तिवारी ने विस्तार से जानकारी दी है।
दुकानदार की तय होती है पूरी जिम्मेदारी
कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि किसी ग्राहक ने दिवाली की इस विशेष सेल के दौरान कोई खरीदारी की है और दुकानदार ने उसका पक्का बिल जारी किया है, तो उस बेचे गए सामान की पूरी जवाबदेही सीधे तौर पर दुकानदार की ही बनती है। अगर वह उत्पाद इस्तेमाल करने पर खराब निकलता है, तो खरीदार को पूरा अधिकार है कि वह संबंधित व्यापारी के पास जाकर उसे बदलने की मांग करे या अपने पैसे वापस ले। यदि विक्रेता ने सामान बेचते समय कोई झूठा या भ्रामक वादा किया था और असलियत में उत्पाद उसके विपरीत निकला, तब भी ग्राहक के पास शिकायत दर्ज कराने का मजबूत आधार रहता है।
उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाने का अधिकार
यदि सेल में खरीदा गया सामान दोषपूर्ण निकलता है, तो सबसे पहले पीड़ित ग्राहक को सीधे दुकानदार के पास जाना चाहिए। उसे स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि उनकी दुकान से लिया गया माल खराब निकला है। इसके बाद दुकानदार से या तो उसे बदलने या फिर भुगतान की गई राशि को तुरंत लौटाने का आग्रह करना चाहिए। यदि विक्रेता इस जायज मांग को मानने से इनकार कर देता है, तो ग्राहक के पास उपभोक्ता फोरम में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने का रास्ता खुला रहता है। फरीदाबाद के स्थानीय निवासियों को अपनी इस शिकायत के निवारण के लिए फरीदाबाद स्थित उपभोक्ता फोरम में ही अपील करनी होगी।
खरीदारी के वक्त बिल और रसीद संभालना क्यों जरूरी है
त्योहारी सीजन में किसी भी प्रकार की खरीदारी करते समय पक्का बिल या कैश मेमो हासिल करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। यदि भुगतान डिजिटल माध्यम से किया गया है, तो संबंधित यूपीआई रसीद को सुरक्षित रखें और यदि नकद भुगतान हुआ है, तो दुकानदार से हस्तलिखित या प्रिंटेड बिल जरूर लें। कानूनी प्रक्रिया के दौरान यही दस्तावेज इस बात का पुख्ता सबूत बनते हैं कि अमुक वस्तु फलां दुकान से खरीदी गई थी। इन्हीं कागजातों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई को बल मिलता है। इसलिए विशेषज्ञों की सलाह है कि त्योहारों के इस सीजन में पूरी तरह सतर्क रहें और किसी भी उत्पाद का भुगतान करने से पहले उसकी भली-भांति जांच-परख जरूर कर लें।
पुलिस में शिकायत और ठगी से बचाव के उपाय
खरीददारी करने से पहले ही दुकानदार को इस बात से अवगत करा देना समझदारी है कि यदि उत्पाद में कोई खराबी निकली, तो उसे हर हाल में बदलना होगा या पैसे वापस करने पड़ेंगे। इस छोटी सी सावधानी से भविष्य में होने वाली भागदौड़ और मानसिक परेशानी से बचा जा सकता है। यदि किसी खरीदार के साथ धोखाधड़ी या ठगी का मामला सामने आता है, तो सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि वह ठगी किस प्रकृति की है। यदि मामला सीधे तौर पर खराब या नकली उत्पाद से जुड़ा हुआ है, तो इसके लिए उपभोक्ता फोरम ही सही मंच है। वहीं, अगर मामला किसी अन्य प्रकार की धोखाधड़ी का है, तो स्थानीय थाने में पुलिस के पास भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। पूरी कानूनी कार्रवाई हमेशा घटना की वास्तविक परिस्थितियों और तथ्यों के आधार पर ही तय होती है।



















