नई दिल्ली: देश के रक्षा ढांचे और सैन्य आधुनिकीकरण को मजबूत करने वाले रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह को केंद्र सरकार ने एक बड़े फैसले के तहत सेवा में एक साल का विस्तार दिया है। केरल कैडर के 1989 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश कुमार सिंह की अगुवाई में रक्षा मंत्रालय और डीआरडीओ ने पिछले कुछ समय में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी हथियारों के निर्माण में अहम सफलताएं हासिल की हैं। अर्थशास्त्र के जानकार राजेश कुमार सिंह ने 1 नवंबर 2024 को गिरिधर अरमाने के रिटायर होने के बाद देश के 40वें रक्षा सचिव के रूप में पदभार संभाला था, और इससे पहले वे अगस्त 2024 से ओएसडी के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे।
प्रशासनिक अनुभव और मेक इन इंडिया को बढ़ावा
रक्षा सचिव का पद संभालने से पहले राजेश कुमार सिंह उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के सचिव, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव और केरल सरकार के वित्त सचिव जैसे कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं। रक्षा सचिव के तौर पर उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी खासियत मेक इन इंडिया के तहत घरेलू रक्षा मैन्युफैक्चरिंग को तेजी से आगे बढ़ाना रहा है। उन्होंने प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को भारतीय डिफेंस इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए बड़े बाजार के रास्ते खोले हैं। उनके मार्गदर्शन में देश का रक्षा निर्यात भी नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है। इसके अलावा, देश की हवाई सुरक्षा और रणनीतिक क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए शुरू किए गए मिशन सुदर्शन चक्र जैसी पहलों को आगे बढ़ाने में भी उनकी भूमिका काफी अहम रही है।
डीआरडीओ का पुनर्गठन और 10 फ्लैगशिप प्रोजेक्ट्स पर ध्यान
प्रशासनिक कामकाज के साथ-साथ राजेश कुमार सिंह के पास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के चेयरमैन और रक्षा आरएंडडी सचिव का अतिरिक्त जिम्मा भी रहा है। इस दोहरी जिम्मेदारी के दौरान उन्होंने रिसर्च संस्थानों और इंडस्ट्रियल सेक्टर के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाया। सिंह ने डीआरडीओ की प्रोजेक्ट पाइपलाइन में बड़ा बदलाव किया। उन्होंने अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में संसाधनों और मैनपॉवर के बिखराव को रोकने के लिए डीआरडीओ का फोकस करीब 37 एक्टिव प्रोजेक्ट्स से हटाकर सिर्फ 10 फ्लैगशिप और आधुनिक रणनीतिक कार्यक्रमों पर केंद्रित करने का बड़ा फैसला लिया।
निजी क्षेत्र के लिए मिसाइल तकनीक और खरीद नियमों में बदलाव
राजेश कुमार सिंह के कार्यकाल के दौरान डीआरडीओ ने पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक, रणनीतिक हथियार कार्यक्रमों और सिस्टम इंटीग्रेशन को नए डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर ढांचे के जरिए निजी कंपनियों के लिए खोल दिया। इसके साथ ही, उन्होंने डिफेंसल प्रोक्योरमेंट प्रोसिजर यानी DFP-2026 और DAP-2026 के नियामक सुधारों की अगुवाई की, जिनके तहत शुरुआती सैन्य खरीद जरूरतों में ही हथियारों की निर्यात क्षमता को अनिवार्य कर दिया गया। उनके इस सेवा विस्तार से देश में रणनीतिक रक्षा सुधारों और स्वदेशी मिसाइल निर्माण के कामों को और रफ्तार मिलेगी।


















