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जहां कभी कब्रिस्तान था, आज वहीं है फरीदाबाद का कल्पना चावला सिटी पार्क — जानिए इस जगह का इतिहासहरियाणा
13 जून 2026, 2:40 am (46 दिन पहले)· 0

जहां कभी कब्रिस्तान था, आज वहीं है फरीदाबाद का कल्पना चावला सिटी पार्क — जानिए इस जगह का इतिहास

हरियाणा के फरीदाबाद में शहर की पहचान बन चुका कल्पना चावला सिटी पार्क कभी कब्रिस्तान हुआ करता था, जिसे साल 1987 में पार्क के रूप में विकसित किया गया।

हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित कल्पना चावला सिटी पार्क आज पूरे शहर की एक खास पहचान बन गया है। सुबह हो या शाम, यहां लोगों का अच्छा-खासा जमावड़ा देखने को मिलता है। आसपास की कॉलोनियों और गांवों से लोग टहलने, बैठने और कुछ वक्त बिताने के मकसद से यहां आते रहते हैं। बच्चों के लिए झूले लगाए गए हैं, जहां वे खेलते हुए दिखाई देते हैं। गर्मी के मौसम में भी दोपहर के समय पार्क में लोगों की आवाजाही बनी रहती है। मेहनत-मजदूरी करने वाले लोग भी अपने काम के बीच यहां आकर थोड़ा सुस्ता लेते हैं। शहर में खुली हवा में बैठने और सुकून के दो पल गुजारने के लिए यह पार्क लोगों की पहली पसंद बना हुआ है।

कभी यहां फैली रहती थीं कब्रें

पीजीटी केमिस्ट्री के शिक्षक अमित किशोर वशिष्ठ (53) बताते हैं कि उनका जन्म बल्लभगढ़ के अहीरवाड़ा में हुआ था। आज जिस जगह को लोग कल्पना चावला सिटी पार्क के नाम से पहचानते हैं, वहां पहले कोई पार्क नहीं था। यह जगह कभी कब्रिस्तान हुआ करती थी, जहां मुस्लिम समाज के लोग शवों को दफनाते थे और चारों ओर सिर्फ कब्रें ही कब्रें नजर आती थीं। अमित किशोर के अनुसार, साल 1987 में इस जगह को पार्क के रूप में विकसित किया गया। उस दौर में शहर के भीतर कोई बड़ा पार्क नहीं था, जहां लोग आराम से बैठ या घूम सकें। आम लोगों को एक बेहतर जगह मिल सके, इसी सोच के साथ यहां पार्क बनाया गया। शुरुआती दिनों में पार्क को बेहद अच्छे ढंग से तैयार किया गया था और बड़ी तादाद में लोग यहां पहुंचने लगे थे।

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सिटी पार्क से कल्पना चावला सिटी पार्क तक का सफर

अमित किशोर बताते हैं कि पहले इसकी हालत काफी अच्छी थी, लेकिन अब एलिवेटेड पुल का निर्माण कार्य चलने की वजह से पार्क की स्थिति थोड़ी बिगड़ी है। इसके बावजूद यहां लोगों का आना-जाना लगातार बना हुआ है और यह पार्क आज भी शहर के सबसे अहम स्थानों में गिना जाता है। उनके मुताबिक, शुरुआत में इसका नाम केवल सिटी पार्क था। बाद में इसका नाम बदलकर कल्पना चावला सिटी पार्क रखा गया। कल्पना चावला हरियाणा की बेटी थीं। वह अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला और मशहूर अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री थीं। उनके निधन के बाद उनकी याद में इस पार्क को कल्पना चावला सिटी पार्क का नाम दिया गया।

घूमने के साथ सामाजिक मेलजोल का केंद्र

अमित किशोर बताते हैं कि इस पार्क में पूरे शहर से लोग पहुंचते हैं और मजदूरी करने वाले लोग भी यहां आकर बैठते हैं। कई बार जब किसी संगठन को हड़ताल या प्रदर्शन करना होता है, तो लोग यहीं इकट्ठा होते हैं। आसपास के गांवों से शहर आने वाले लोग, जिन्हें बैठने के लिए कोई जगह चाहिए होती है, वे भी इसी पार्क में आकर समय बिताते हैं। यहां तक कि शादी के लिए रिश्ते तय करने के मकसद से भी लोग इस पार्क में आते रहे हैं और लड़का-लड़की के परिवार यहीं बैठकर बातचीत किया करते थे। इस तरह यह जगह सिर्फ घूमने-फिरने की नहीं, बल्कि लोगों के आपसी मेलजोल का भी एक बड़ा केंद्र रही है।

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