राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रोजाना सफर करने वाले लाखों कामकाजी लोगों के लिए सड़कों पर लगने वाला भीषण जाम सबसे बड़ी परेशानी बना हुआ है। व्यस्त घंटों के दौरान दफ्तर पहुंचना हो या किसी जरूरी बैठक के लिए निकलना हो, गाड़ियों की लंबी कतारों के बीच समय का सटीक अनुमान लगाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। इसी जटिल आवागमन संकट का आधुनिक समाधान निकालने के लिए देश में उन्नत अर्बन एयर मोबिलिटी यानी शहरी हवाई परिवहन व्यवस्था को धरातल पर उतारने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। घरेलू विमानन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंडिगो की मूल इकाई इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज और अमेरिकी एरोस्पेस निर्माता आर्चर एविएशन एक साझा साझेदारी के तहत भारत के आकाश में बैटरी चालित इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी उतारने की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं।
घंटों की थकाऊ यात्रा अब मिनटों में सिमटेगी
सड़क मार्ग से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के दो बड़े व्यावसायिक केंद्रों नोएडा और गुरुग्राम के बीच यात्रा करना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। सामान्य दिनों में भी जब यातायात का दबाव चरम पर होता है, तब यह सफर तय करने में डेढ़ से ढाई घंटे और अक्सर इससे भी अधिक समय बर्बाद हो जाता है। प्रस्तावित हवाई टैक्सी सेवा शुरू होने के बाद यही कठिन फासला हवाई मार्ग के जरिए केवल 27 से 30 मिनट में पूरा कर लिया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट की मूल अवधारणा अत्यधिक व्यस्त शहरी कॉरिडोर पर आवागमन में लगने वाले समय में भारी कटौती करना है, ताकि रोजाना घंटों सड़क पर फंसे रहने वाले मुसाफिरों की बहुमूल्य ऊर्जा और वक्त दोनों की बचत हो सके।
मिडनाइट eVTOL विमान की बनावट और तकनीकी खूबियां
इस आधुनिक हवाई परिवहन सेवा के संचालन के लिए आर्चर एविएशन के विशेष मिडनाइट eVTOL विमान का उपयोग किया जाएगा। तकनीकी शब्दावली में eVTOL का अर्थ इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग होता है। पारंपरिक यात्री जहाजों के विपरीत इस विमान की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि इसे उड़ान भरने या धरती पर वापस आने के लिए किसी लंबे कंक्रीट रनवे की बिल्कुल आवश्यकता नहीं पड़ती। यह आधुनिक हेलीकॉप्टर की भांति निर्धारित स्थान से सीधे 90 डिग्री के कोण पर ऊपर उठ सकता है और उसी तरह सीधे नीचे उतर सकता है।
मिडनाइट विमान को मुख्य रूप से घनी आबादी वाले महानगरों और कम दूरी के हवाई फेरों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके केबिन में एक पेशेवर पायलट के अतिरिक्त चार यात्रियों के बैठने की मुकम्मल व्यवस्था की गई है। शत-प्रतिशत बिजली से संचालित होने के कारण यह यात्रा के दौरान शून्य प्रत्यक्ष कार्बन उत्सर्जन सुनिश्चित करता है। इसके अलावा, कंपनी ने इसके प्रोपेलर तंत्र को इस तरह विशेष ध्वनि-रोधी इंजीनियरिंग के साथ विकसित किया है, जिससे इसका शोर पारंपरिक हेलीकॉप्टरों की तुलना में बेहद कम रहे। हालांकि, घनी शहरी आबादी के ऊपर वास्तविक उड़ान संचालन के समय इसके ध्वनि स्तर और पर्यावरण पर पड़ने वाले समग्र प्रभावों का परीक्षण नियामकीय मंजूरी के दौरान बारीकी से किया जाएगा।
देशभर में 200 विमानों का बेड़ा और विस्तार की समयसीमा
इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज और आर्चर एविएशन के बीच हुए रणनीतिक समझौते के अंतर्गत भारतीय बाजार में लगभग 200 मिडनाइट eVTOL विमानों का एक विशाल बेड़ा तैनात करने का लक्ष्य रखा गया है। दोनों साझीदार कंपनियों ने तय किया है कि वर्ष 2026 के अंत तक इस पर्यावरण-अनुकूल एयर टैक्सी सेवा का वाणिज्यिक संचालन भारत में विधिवत शुरू कर दिया जाए। दिल्ली-एनसीआर के प्राथमिक कॉरिडोर पर सफल शुरुआत के पश्चात इस नेटवर्क का विस्तार देश के दो अन्य प्रमुख आर्थिक केंद्रों मुंबई और बेंगलुरु में भी किया जाएगा, जहां की सड़कें भी भारी ट्रैफिक जाम से जूझती रहती हैं।
इमारतों की छतों पर बनेंगे वर्टिपोर्ट, उद्योग जगत के सुझाव
चूंकि इन अत्याधुनिक विमानों को किसी हवाई अड्डे के पारंपरिक ढांचे की दरकार नहीं होती, इसलिए शहरों के भीतर इनके सुरक्षित संचालन के लिए खास वर्टिपोर्ट विकसित करने होंगे। भारतीय उद्योग परिसंघ अर्थात सीआईआई ने इस व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए महत्वपूर्ण व्यावहारिक सिफारिशें दी हैं। उद्योग मंडल का सुझाव है कि शहरों में जमीन की कमी को देखते हुए मौजूदा ऊंचे बुनियादी ढांचे का अधिकतम इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके तहत बड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों, विशाल आईटी व टेक पार्कों, कॉरपोरेट परिसरों और गगनचुंबी आवासीय सोसायटियों की छतों को मजबूत करके उन्हें वर्टिपोर्ट में बदला जा सकता है। इस व्यवस्था से यात्रियों को अपने गंतव्य के बेहद करीब ही सीधे उतरने और उड़ान भरने की बेजोड़ सुविधा मिल जाएगी।
विमानन नियामक डीजीसीए की अनुमति और संचालन की बाधाएं
यद्यपि शहरी हवाई टैक्सी की यह परिकल्पना आवागमन के भविष्य को बदलने वाली प्रतीत होती है, लेकिन इसे आम नागरिकों के लिए नियमित रूप से धरातल पर उतारने से पहले कई तकनीकी, सुरक्षा और विनियामक पड़ावों को सफलतापूर्वक पार करना होगा। भारत के घरेलू हवाई क्षेत्र में किसी भी नए विमान के वाणिज्यिक संचालन के लिए नागर विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए से आवश्यक सुरक्षा प्रमाणन, रूट निर्धारण और वायु सुरक्षा अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य शर्त है। घने शहरी क्षेत्रों के ऊपर सुरक्षित हवाई गलियारे बनाने, आपातकालीन सुरक्षा तंत्र सुनिश्चित करने और मौसम के उतार-चढ़ाव से निपटने के कड़े पैमानों की कसौटी पर खरा उतरने के बाद ही नागरिक इस रोमांचक सफर का आनंद ले सकेंगे।



















