हरियाणा के करनाल स्थित सिविल अस्पताल में अव्यवस्थाओं का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ बिजली आपूर्ति ठप होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रविवार को अस्पताल के वार्डों में करीब 4 घंटे तक बिजली गुल रही, जिसके चलते प्रसूताओं और नवजात बच्चों समेत तमाम मरीजों को बाहर खुले में बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा। चिलचिलाती गर्मी और उमस के बीच मरीज अपने तीमारदारों के साथ अस्पताल परिसर से बाहर सड़क पर बैठे नजर आए।
प्रशासन की लापरवाही और खराब जनरेटर
अस्पताल की बिजली व्यवस्था में आई खराबी के बाद जब बैकअप के लिए जनरेटर चलाने का प्रयास किया गया, तो वह भी लोड न झेल पाने के कारण बंद हो गया। इस तकनीकी खराबी ने प्रशासन की पोल खोल दी। अस्पताल प्रबंधन ने सफाई दी कि उनके बिजली विभाग के कर्मचारी जनरेटर को दुरुस्त करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन जब तक इसे ठीक नहीं किया गया, तब तक मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। वहां मौजूद लोगों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर कड़ा आक्रोश जताया।
मरीजों का दर्द और परेशानी
अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। काजल नामक एक मरीज ने बताया कि पिछले तीन घंटों से बिजली नहीं होने से पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। गर्मी के कारण अंदर वार्डों में बैठना असंभव था, जबकि बाहर बैठने पर मच्छरों का डर बना हुआ था। उन्होंने कहा कि उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे भी हैं, जो गर्मी के कारण बिलख रहे हैं। नर्स और डॉक्टर भी बिना बिजली के काम करने में असमर्थ थे और मरीज लगातार पूछ रहे थे कि आपूर्ति कब तक बहाल होगी, लेकिन किसी के पास संतोषजनक जवाब नहीं था।
एक अन्य महिला कांता ने अपनी बहू की स्थिति बताते हुए कहा कि उसे ऑपरेशन के लिए भर्ती कराया गया था, लेकिन बिजली न होने के कारण सर्जरी में देरी हो रही है, जो कि अत्यंत चिंताजनक है। मां और बच्चे दोनों ही इस स्थिति में काफी तनाव और परेशानी से गुजर रहे हैं।
अस्पताल प्रबंधन की सफाई और वैकल्पिक प्रबंध
मामले की जानकारी मिलने पर डॉक्टर दीपक गोयल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि बिजली कटने की सूचना मिलते ही तकनीकी टीम को काम पर लगा दिया गया था। उन्होंने स्वीकार किया कि जनरेटर पर अत्यधिक भार होने के कारण वह तकनीकी खराबी का शिकार हो गया। डॉ. गोयल ने बताया कि उन्होंने मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए कल्पना चावला मेडिकल हॉस्पिटल के चिकित्सकों से संपर्क किया और गंभीर मरीजों को वहां शिफ्ट करने की व्यवस्था की गई।
डॉ. दीपक ने यह भी जानकारी दी कि अस्पताल की नर्सरी में भर्ती नवजात शिशुओं के लिए 5 घंटे का पर्याप्त बैटरी बैकअप उपलब्ध था, इसलिए उन्हें किसी प्रकार का खतरा नहीं है। उन्होंने बताया कि बिजली विभाग से भी लगातार संपर्क करने की कोशिश की जा रही थी, हालांकि उपलब्ध नंबरों पर कोई जवाब नहीं मिल पाया। इस गंभीर घटना की सूचना सिविल सर्जन को दे दी गई है और उम्मीद जताई गई है कि वे जिला उपायुक्त के स्तर पर भी मामले को रखेंगे ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।











