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फरीदाबाद के सुनपेड़ में नई पुलिस लाइन के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन, डीसी को सौंपा ज्ञापनहरियाणा
10 सित॰ 2026, 1:42 pm (1 घंटे पहले)· 2

फरीदाबाद के सुनपेड़ में नई पुलिस लाइन के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन, डीसी को सौंपा ज्ञापन

फरीदाबाद के सुनपेड़ गांव में पंचायती जमीन पर नई पुलिस लाइन बनाए जाने को लेकर ग्रामीणों ने कड़ा विरोध जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस जमीन पर पुलिस लाइन के बजाय अस्पताल, कॉलेज या स्टेडियम बनाया जाना चाहिए और मुआवजे की राशि भी बाजार भाव के हिसाब से बहुत कम है।

फरीदाबाद के सुनपेड़ गांव में पंचायत की जमीन पर प्रस्तावित नई पुलिस लाइन की योजना को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि जब जमीन गांव की है, तो उसका उपयोग भी ऐसा होना चाहिए जिससे पूरे इलाके और समाज का सीधा भला हो सके। सरकार की ओर से सुनपेड़ की पंचायती भूमि पर नई पुलिस लाइन के निर्माण को मंजूरी मिलने के बाद से ही इलाके में इसका विरोध शुरू हो गया था। कुछ दिन पहले गांव की वाटिका में एक बड़ी पंचायत का आयोजन किया गया था, जिसमें ग्रामीणों ने एक सुर में पुलिस लाइन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी। इसी विरोध को आगे बढ़ाते हुए ग्रामीणों ने जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

किसान नेता बबलू हुड्डा का कहना है कि ग्राम पंचायत के साथ पूरा गांव कंधे से कंधा मिलाकर इस पुलिस लाइन का विरोध कर रहा है। उनकी मुख्य मांग यह है कि इस जमीन पर कोई बड़ा अस्पताल खोला जाए या फिर कोई प्रतिष्ठित कॉलेज या विश्वविद्यालय बनाया जाए। इसके अलावा यदि यहां एक आधुनिक स्टेडियम का निर्माण किया जाता है, तो गांव और आसपास के तमाम युवा खिलाड़ियों को अपनी खेल प्रतिभा को निखारने के लिए बेहतरीन अभ्यास सुविधाएं मिल सकेंगी। यदि यहां अस्पताल बनता है, तो आसपास के दूर-दराज के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं आसानी से मिल पाएंगी और शिक्षण संस्थान बनने से युवाओं के भविष्य को एक नई और सही दिशा मिलेगी। पंचायत की बेशकीमती जमीन पर ऐसा कोई संस्थान बनना चाहिए जिसका सीधा फायदा जनसेवा के कार्यों में नजर आए।

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सुनपेड़ में दोबारा पुलिस लाइन की आवश्यकता क्यों

बबलू हुड्डा ने इस बात पर भी जोर दिया कि गांव में पुलिस लाइन के बन जाने से स्थानीय विकास का कोई भी मजबूत आधार तैयार नहीं होगा। आम लोगों की नजरों में पुलिस की छवि को लेकर जो धारणा है, उसकी वजह से भी ग्रामीण अपने इलाके में पुलिस लाइन नहीं चाहते हैं। जब फरीदाबाद जिले में पहले से ही एक पुलिस लाइन मौजूद है, तो फिर सुनपेड़ गांव में दोबारा पुलिस लाइन का निर्माण क्यों कराया जा रहा है। उनकी स्पष्ट मांग है कि ग्राम पंचायत की जमीन पर सरकार अपनी तरफ से कोई भी फैसला जबरन नहीं थोपे। यह जमीन पूरी तरह से ग्राम पंचायत सुनपेड़ की है और इसका इस्तेमाल गांव के साथ-साथ आसपास के तमाम लोगों के वास्तविक हितों को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए। इसी मुख्य मांग को लेकर डीसी को ज्ञापन सौंपा गया है।

कॉलेज, विश्वविद्यालय या अस्पताल की मांग

मास्टर देवी सिंह लांबा का कहना है कि ग्रामीणों द्वारा उठाई जा रही यह मांग पूरी तरह से न्यायसंगत और जायज है। यदि गांव में किसी अच्छे अस्पताल या किसी उच्च शिक्षण संस्थान की स्थापना होती है, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा। गांव में पुलिस लाइन के बन जाने से स्थानीय ग्रामीणों को किसी भी प्रकार का कोई विशेष लाभ मिलने वाला नहीं है। जब गांव की जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है, तो यह सुनिश्चित होना चाहिए कि वहां ऐसा संस्थान बने जिसका प्रत्यक्ष फायदा गांव के आम नागरिकों को मिले। एक बढ़िया कॉलेज, विश्वविद्यालय या अस्पताल के बन जाने से युवाओं के साथ-साथ आम जनता का भविष्य भी काफी हद तक सुरक्षित और बेहतर हो सकता है।

मुआवजे की रकम को लेकर गहरा आक्रोश

मास्टर देवी सिंह लांबा ने यह भी बताया कि जमीन के मुआवजे की कम राशि को लेकर भी ग्रामीणों के मन में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। आज के समय में जमीन के मौजूदा बाजार भाव के मुकाबले 4 करोड़ रुपये का मुआवजा कुछ भी नहीं है। जमीन की वास्तविक कीमत आज काफी ज्यादा है और सरकार की तरफ से उसके मुकाबले बहुत ही कम मुआवजा दिया जा रहा है। ग्रामीणों को साफ लग रहा है कि उनकी जमीन की सही और न्यायसंगत कीमत नहीं आंकी गई है। सरकार को चाहिए कि वह ग्रामीणों की बात को गंभीरता से सुने और जमीन के उपयोग के साथ-साथ मुआवजे के आंकड़ों पर भी दोबारा से विचार करे।

कम मुआवजा और पुरानी दरों का हवाला

कैलाश ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब फरीदाबाद जिले के भीतर पहले से ही पुलिस लाइन मौजूद है, तो आखिर प्रशासन सुनपेड़ में दोबारा पुलिस लाइन क्यों बनाना चाहता है। उनकी मांग है कि इस जगह पर या तो कोई अच्छा कॉलेज दे दिया जाए, कोई बड़ा अस्पताल बनवा दिया जाए या फिर कोई विशाल स्टेडियम तैयार किया जाए। पुलिस लाइन को छोड़कर अगर इसके अलावा कोई भी अन्य जनहित का निर्माण किया जाए, तो उससे गांव के लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा। जमीन का जो मुआवजा दिया जा रहा है, वह मौजूदा बाजार रेट के हिसाब से बेहद कम है। इलाके में जमीनें पहले ही करीब 13 करोड़ रुपये के हिसाब से बिक चुकी हैं, जबकि सरकार की ओर से मात्र 4 करोड़ रुपये के आसपास का मुआवजा दिया जा रहा है। इसके अलावा करीब 10 साल पहले भी यहां जमीनें लगभग 10 करोड़ रुपये के भाव पर बिक चुकी हैं।

कैलाश का कहना है कि सभी ग्रामीणों की बस यही एकमात्र मांग है कि सुनपेड़ की इस बहुमूल्य पंचायत भूमि पर किसी भी कीमत पर पुलिस लाइन नहीं बनाई जानी चाहिए। यदि सरकार वास्तव में इस जमीन पर कोई सार्वजनिक संस्थान बनाना चाहती है, तो उसे अस्पताल, कॉलेज, विश्वविद्यालय या फिर स्टेडियम का निर्माण करना चाहिए जिससे सुनपेड़ के अलावा आसपास के तमाम गांवों के लोगों को भी इसका पूरा लाभ मिल सके। पंचायत की जमीन का उपयोग हमेशा जनहित के कार्यों के लिए ही होना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में ग्रामीणों की स्पष्ट आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

सवाल-जवाब

सुनपेड़ गांव में किस योजना का विरोध किया जा रहा है?
सुनपेड़ गांव में पंचायत की जमीन पर नई पुलिस लाइन बनाने की योजना का विरोध किया जा रहा है।
ग्रामीण पुलिस लाइन के स्थान पर क्या बनवाना चाहते हैं?
ग्रामीण पुलिस लाइन के बजाय वहां अस्पताल, कॉलेज, विश्वविद्यालय या स्टेडियम बनाने की मांग कर रहे हैं।
किस अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया है?
ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर जिला उपायुक्त यानी डीसी को ज्ञापन सौंपा है।
मुआवजे को लेकर ग्रामीणों की क्या आपत्ति है?
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान बाजार दर के मुकाबले उन्हें बहुत कम मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि पहले जमीन ऊंचे दामों पर बिक चुकी है।
इस विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से किन लोगों ने बात रखी?
किसान नेता बबलू हुड्डा और मास्टर देवी सिंह लांबा ने ग्रामीणों की ओर से अपनी बात रखी है।
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