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सेना के जवान ने मरणोपरांत दिया जीवनदान, 16 मिनट में हिंडन एयरपोर्ट से फोर्टिस अस्पताल नोएडा पहुंचा दिलहरियाणा
10 सित॰ 2026, 1:21 pm (1 घंटे पहले)· 5

सेना के जवान ने मरणोपरांत दिया जीवनदान, 16 मिनट में हिंडन एयरपोर्ट से फोर्टिस अस्पताल नोएडा पहुंचा दिल

चंडीगढ़ में ब्रेन डेड घोषित एक सैन्य अधिकारी के परिजनों ने उनकी इच्छा के अनुसार अंगदान का फैसला लिया। हिंडन एयरपोर्ट से नोएडा के फोर्टिस अस्पताल तक 20 किलोमीटर की दूरी पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर महज 16 मिनट में तय कराई।

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से एक गंभीर मरीज को नई जिंदगी मिली है। चंडीगढ़ में ब्रेन डेड घोषित किए गए एक भारतीय सेना के अधिकारी की अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए उनके परिजनों ने अंगदान का निर्णय लिया। इसके बाद उनके दिल को एक जटिल ऑपरेशन के जरिए नोएडा लाया गया। गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस से नोएडा के सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल तक की दूरी तय करने के लिए एक विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया, जिससे एंबुलेंस ट्रैफिक में फंसे बिना महज 16 मिनट में अस्पताल पहुंच गई।

अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए परिजनों ने लिया अंगदान का फैसला

सैन्य अधिकारी ने जीवित रहते हुए यह इच्छा व्यक्त की थी कि उनके निधन के बाद उनके अंगों का दान कर किसी जरूरतमंद को नया जीवन दिया जाए। जब डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया, तब उनके परिवार ने इस पवित्र सोच का सम्मान करते हुए अंगदान की प्रक्रिया को अपनी सहमति दी। इसके बाद तत्काल प्रभाव से उनके हृदय को नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती एक जरूरतमंद मरीज में ट्रांसप्लांट करने की योजना बनाई गई। अंगदान की इस पहल की स्थानीय लोगों द्वारा सराहना की जा रही है।

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चंडीगढ़ से हिंडन और फिर 16 मिनट का चुनौतीपूर्ण सफर

अंग प्रत्यारोपण में हर एक सेकंड बेहद कीमती होता है, क्योंकि शरीर से अलग होने के बाद दिल की कार्यक्षमता समय बीतने के साथ घटने लगती है। इस कारण से अधिकारी के दिल को चंडीगढ़ से विशेष विमान के जरिए गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट लाया गया। असली चुनौती हिंडन एयरपोर्ट से नोएडा के सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल तक सुरक्षित और तेज गति से एंबुलेंस को पहुंचाना था। इस लगभग 20 किलोमीटर लंबी दूरी में ट्रैफिक की वजह से अक्सर भारी देरी होती है, इसलिए गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट की पुलिस ने आपसी तालमेल बनाकर एक ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया।

9 सितंबर की दोपहर का घटनाक्रम और पुलिस की त्वरित कार्रवाई

9 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 2:03 बजे हिंडन एयरपोर्ट से एंबुलेंस हृदय को लेकर रवाना हुई। इस दौरान दोनों जिलों की ट्रैफिक पुलिस ने पूरे मार्ग पर यातायात को नियंत्रित किया और एंबुलेंस के सामने किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आने दी। पुलिस अधिकारियों और ट्रैफिक कर्मियों की सजगता के कारण एंबुलेंस बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ती चली गई। महज 16 मिनट के भीतर एंबुलेंस ने 20 किलोमीटर का सफर पूरा कर लिया और दिल को सुरक्षित तरीके से अस्पताल के डॉक्टरों की टीम को सौंप दिया गया।

फोर्टिस अस्पताल और आम जनता ने सराहा ग्रीन कॉरिडोर का प्रयास

गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट में पहली बार इस प्रकार का ग्रीन कॉरिडोर बनाकर किसी मानव अंग को त्वरित गति से गंतव्य तक पहुंचाया गया। एंबुलेंस के समय पर पहुंचते ही फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों, कर्मचारियों, मरीज के परिजनों और वहां मौजूद लोगों ने ट्रैफिक पुलिस के इस उत्कृष्ट कार्य की जमकर प्रशंसा की। पुलिस प्रशासन का कहना है कि अंगदान को महादान माना जाता है और किसी का जीवन बचाने वाले इस प्रकार के अभियानों में पुलिस भविष्य में भी पूरी निष्ठा और तत्परता के साथ सहयोग करने के लिए हमेशा तैयार रहेगी।

सवाल-जवाब

सेना के अधिकारी का दिल नोएडा क्यों लाया गया?
नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती एक मरीज को हार्ट ट्रांसप्लांट की सख्त जरूरत थी, जिसके लिए चंडीगढ़ से अधिकारी का दिल लाया गया।
हिंडन एयरपोर्ट से फोर्टिस अस्पताल की दूरी कितनी देर में तय की गई?
लगभग 20 किलोमीटर की इस दूरी को पुलिस के ग्रीन कॉरिडोर की मदद से महज 16 मिनट में तय किया गया।
ग्रीन कॉरिडोर कब और किस समय शुरू हुआ?
यह ग्रीन कॉरिडोर 9 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 2:03 बजे हिंडन एयरपोर्ट से एंबुलेंस के रवाना होने के साथ शुरू हुआ।
ग्रीन कॉरिडोर बनाने में किन पुलिस टीमों का सहयोग रहा?
गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट की ट्रैफिक पुलिस टीमों ने आपसी तालमेल बनाकर रास्ता साफ कराया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·52 मिनट पहले

यह घटना कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग के बीच उत्कृष्ट समन्वय का प्रमाण है। गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने जिस मुस्तैदी से 20 किलोमीटर का सफर मात्र 16 मिनट में पूरा कराया, वह आपातकालीन स्थितियों में प्रशासनिक तत्परता का एक बड़ा उदाहरण है। ऐसे सफल ग्रीन कॉरिडोर भविष्य में गंभीर मामलों में जीवन बचाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·52 मिनट पहले

गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट में पहली बार ऐसा ग्रीन कॉरिडोर बनना एनसीआर क्षेत्र में बढ़ती प्रशासनिक और चिकित्सा क्षमताओं को दर्शाता है। सड़क मार्ग की भीड़भाड़ के बीच दो जिलों की पुलिस का ऐसा सटीक तालमेल यह साबित करता है कि पुख्ता प्लानिंग से अनमोल जानें बचाई जा सकती हैं। भविष्य में ऐसी आपातकालीन प्रणालियों को और अधिक स्वचालित करने की आवश्यकता होगी ताकि ऑर्गन ट्रांसपोर्टेशन जैसे मामलों में समय की बर्बादी पूरी तरह रोकी जा सके।

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