काली और जली हुई कड़ाही को मिनटों में चमकाएं, घंटों रगड़ने की नहीं पड़ेगी जरूरतअमेरिकी डॉलर पर दबाव: ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक और महंगाई के बढ़ते जोखिमों से बदली बाजार की चालसवाई माधोपुर में 14 सितंबर को सजेगा रणथंभौर त्रिनेत्र गणेश का लक्खी मेला, उमड़ेगी भारी भीड़लखीमपुर खीरी में खरीफ फसलों पर मंडराया संकट, बाढ़ और बारिश से बचाव के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उठाएं लाभजालौर में अनूठी परंपरा, तालाब में मटका हिलाकर भाई-बहन निभा रहे हैं 'समुंदर हिलोरने' की रस्मबाईं करवट सोना सेहत के लिए क्यों है फायदेमंद, जानिए डॉक्टर कुणाल सूद की सलाहमछली पकाने के बाद किचन से महकने लगती है तेज़ बदबू, ये आसान घरेलू नुस्खे दिलाएंगे राहतचित्रकूट में भदई अमावस्या मेला कल, बाढ़ के निशान के बीच 15 लाख श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीदकक्षा से बाहर हो रहा नासा का अंतरिक्ष टेलीस्कोप स्विफ्ट आखिरी मिशन पर जुटावर्ष 2026 में गणेश विसर्जन की सही तिथियां और मुहूर्त, जानें कब दी जाएगी बप्पा को विदाई
चंडीगढ़ में उबर और रैपिडो पर छह महीने का बैन, अशोक खेमका ने फैसले को बताया नासमझी भराहरियाणा
10 सित॰ 2026, 2:41 pm (55 मिनट पहले)· 2

चंडीगढ़ में उबर और रैपिडो पर छह महीने का बैन, अशोक खेमका ने फैसले को बताया नासमझी भरा

नियमों के उल्लंघन के चलते चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने उबर और रैपिडो की सेवाओं पर छह महीने का प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले से आम जनता और ड्राइवरों को हो रही परेशानी पर पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने भी चिंता जताई है।

चंडीगढ़ में नियमों के अनुपालन में ढिलाई और उल्लंघन के मामले सामने आने के बाद चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने सख्त कदम उठाया है। प्रशासन ने प्रमुख कैब एग्रीगेटर कंपनियों उबर और रैपिडो का लाइसेंस छह महीने के लिए पूरी तरह निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के चलते अब इन दोनों कंपनियों की कैब सेवाएं आगामी छह महीने तक शहर की सड़कों पर संचालित नहीं हो सकेंगी। इस अचानक उठाए गए कदम से शहर के आम नागरिकों को आवागमन में भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि ये सेवाएं यात्रा के लिए सुलभ और किफायती विकल्प मानी जाती थीं।

अशोक खेमका ने फैसले का किया खुलकर विरोध

चंडीगढ़ प्रशासन के इस प्रतिबंधात्मक आदेश के बाद प्रशासनिक गलियारों और सार्वजनिक मंचों पर बहस छिड़ गई है। इसी कड़ी में हरियाणा के जाने-माने पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने इस पूरे प्रतिबंध को एक नासमझी भरा कदम करार दिया है। उनका कहना है कि इस प्रकार के फैसलों का सीधा और नकारात्मक असर आम जनता की जेब और सुविधा पर पड़ता है, जो इन किफायती परिवहन माध्यमों पर निर्भर थी।

ये भी पढ़ें

ड्राइवरों की आजीविका पर संकट और प्रबंधन की जवाबदेही

अशोक खेमका ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया है कि लाइसेंस रद्द करने से केवल कंपनियां प्रभावित नहीं होतीं, बल्कि हजारों की संख्या में जुड़े ड्राइवरों की आजीविका भी खतरे में पड़ जाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कंपनियों या एग्रीगेटर्स की ओर से किसी भी नियम का उल्लंघन किया गया है, तो प्रशासन को उन पर आर्थिक जुर्माना लगाना चाहिए या उनके प्रबंधन पर शिकंजा कसना चाहिए। ड्राइवरों और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को इस तरह की सजा भुगतने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चंडीगढ़ के प्रशासक से तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने की पुरजोर अपील की है और साथ ही यह भी दोहराया है कि कानून के तहत दोषी को सजा मिलनी चाहिए, न कि निर्दोष वर्ग को।

कैब यूनियन की हड़ताल समाप्त और लंबित मांगें

उबर और रैपिडो के खिलाफ प्रशासन द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई के बाद कैब चालकों और यूनियनों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। चंडीगढ़ कैब यूनियन ने बुधवार को अपना 100 दिनों से चला आ रहा धरना और हड़ताल आखिरकार समाप्त कर दी है। यूनियन पिछले काफी समय से इन एग्रीगेटर कंपनियों के कामकाज के खिलाफ मुखर होकर कार्रवाई की मांग कर रही थी।

यूनियन के अध्यक्ष अमनदीप सिंह ने जानकारी दी कि बुधवार को उनके धरने का ठीक 100वां दिन पूरा हुआ था। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्राइवरों के हित से जुड़ी कई अहम मांगें अब भी लंबित हैं। इनमें चालकों के लिए छह लाख रुपये का मेडिकल बीमा, दस लाख रुपये का टर्म बीमा और चंडीगढ़ में एग्रीगेटर कंपनियों का चौबीस घंटे चालू रहने वाला स्थानीय कार्यालय स्थापित किया जाना शामिल है। यूनियन पिछले एक साल और तीन महीने से लगातार मेडिकल इंश्योरेंस की मांग उठाती आ रही है, जिसे कंपनियों द्वारा अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है।

शहर में पहले भी लग चुके हैं कई प्रतिबंध

चंडीगढ़ परिवहन प्राधिकरण द्वारा कैब कंपनियों के लाइसेंस सस्पेंड करने की यह कोई पहली घटना नहीं है। उबर और रैपिडो पर कार्रवाई से पहले प्रशासन ओला और इनड्राइव जैसी अन्य बड़ी कंपनियों के खिलाफ भी इसी तरह के कड़े कदम उठा चुका है। ओला कंपनी का लाइसेंस गत 17 जून को जबकि इनड्राइव का लाइसेंस 10 अगस्त को निलंबित किया जा चुका है। इन सभी लगातार प्रतिबंधों के लागू होने के बाद अब शहर की सीमाओं के भीतर केवल सहकारी टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड की भारत टैक्सी सेवा ही सुचारू रूप से चालू बची है।

सवाल-जवाब

चंडीगढ़ में उबर और रैपिडो पर प्रतिबंध कितने समय के लिए लगाया गया है?
चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने उबर और रैपिडो का लाइसेंस छह महीने के लिए सस्पेंड किया है।
इस बैन पर किस पूर्व आईएएस अधिकारी ने प्रतिक्रिया दी है?
पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने इस फैसले को नासमझी भरा बताया है।
कैब यूनियन का धरना कितने दिनों के बाद समाप्त हुआ?
चंडीगढ़ कैब यूनियन ने अपने 100 दिन के धरने और हड़ताल को समाप्त कर दिया है।
चंडीगढ़ में ओला और इनड्राइव के लाइसेंस कब सस्पेंड किए गए थे?
ओला का लाइसेंस 17 जून और इनड्राइव का लाइसेंस 10 अगस्त को निलंबित किया गया था।
वर्तमान में चंडीगढ़ में कौन सी टैक्सी सेवा चालू है?
फिलहाल शहर में केवल सहकारी टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड की भारत टैक्सी सेवा चालू है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR