गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति के उपचार में जितनी अहमियत डॉक्टर और दवाइयों की होती है, उतनी ही बड़ी भूमिका मरीज को तय समय पर चिकित्सा संस्थान तक सुरक्षित ले जाने की भी रहती है। दिल्ली और एनसीआर जैसे घनी आबादी वाले महानगरों में सड़कों पर अक्सर लगने वाले भीषण जाम के कारण पारंपरिक एंबुलेंस को कई बार लंबा और मुश्किल सफर तय करना पड़ता है। ऐसे विकट हालातों में हेलीकॉप्टर आधारित चिकित्सा सेवा गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए एक बहुत बड़ा विकल्प बनकर उभर रही है। इसी कड़ी में फरीदाबाद में पहली बार एक मरीज को कानपुर से सीधे हेलीकॉप्टर के माध्यम से अस्पताल की आपातकालीन इकाई तक लाया गया है।
अमृता हॉस्पिटल में बनी है विशेष हेलीपैड की व्यवस्था
फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. आशुतोष शर्मा के अनुसार, वर्तमान समय में इस तरह की आधुनिक सुविधा का होना बेहद आवश्यक है, क्योंकि कई गंभीर बीमारियों और स्वास्थ्य संकटों के दौरान महज कुछ मिनटों या घंटों की देरी भी रोगी के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। इसी महत्वपूर्ण आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अस्पताल भवन के निर्माण के दौरान ही इसकी छत पर हेलीपैड की विशेष व्यवस्था का प्रावधान रखा गया था। इस चिकित्सा सेवा के संचालन के लिए फरवरी 2026 में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए से औपचारिक मंजूरी प्राप्त हुई थी।
एयर एंबुलेंस का संभावित खर्च और तकनीकी जरूरतें
डॉ. आशुतोष शर्मा का कहना है कि हेलीकॉप्टर एंबुलेंस का किराया पूरी तरह से उसके मॉडल और सेवा प्रदान करने वाली विमानन कंपनी के नियमों पर निर्भर करता है। एक सिंगल इंजन वाले हेलीकॉप्टर के संचालन के लिए लगभग ढाई लाख रुपये प्रति घंटे तक का खर्च आ सकता है, जबकि डबल इंजन वाले बड़े और आधुनिक हेलीकॉप्टर का शुल्क बढ़कर करीब चार से साढ़े चार लाख रुपये प्रति घंटे तक पहुंच जाता है। लगभग 300 किलोमीटर के दायरे की दूरी तय करने में यह परिवहन माध्यम सबसे ज्यादा व्यावहारिक और फायदेमंद साबित होता है।
डॉ. आशुतोष के मुताबिक, इमारत की छत पर हेलीपैड विकसित करने के लिए पूरे ढांचे को अतिरिक्त मजबूती देनी पड़ती है, जिस वजह से सामान्य निर्माण की तुलना में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक लागत आती है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा व्यावहारिक लाभ यह है कि मरीज को हेलीकॉप्टर से उतरने के बाद सड़क मार्ग के किसी अन्य वाहन में दोबारा शिफ्ट नहीं करना पड़ता है, जिससे अमूल्य समय की बचत होती है।
अस्पताल के भीतर त्वरित आवाजाही और बीमा का प्रावधान
डॉ. आशुतोष शर्मा बताते हैं कि अस्पताल परिसर में हेलीपैड से सीधे नीचे आने के लिए समर्पित लिफ्ट की सुविधा मौजूद है, जिसकी मदद से मरीज की मेडिकल स्थिति के अनुसार उसे तुरंत इमरजेंसी वार्ड, क्रिटिकल केयर एरिया या सीधे ऑपरेशन थिएटर में पहुंचाया जा सकता है। कानपुर से लाए गए मरीज को भी इसी प्रक्रिया के तहत सीधे आपातकालीन विभाग में शिफ्ट किया गया। हालांकि, हर साधारण परिवार के लिए निजी खर्चे पर इस सेवा का लाभ उठाना आसान नहीं होता है।
राहत की बात यह है कि देश की कुछ चुनिंदा बीमा कंपनियों की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में एयर एंबुलेंस के जरिए मरीज को लाने का प्रावधान शामिल होता है। जिन Policyholders की पॉलिसी में यह सुविधा पहले से जुड़ी होती है, वे बीमा नियमों और शर्तों के दायरे में रहकर इसका खर्च कवर करवा सकते हैं। इसके अलावा, किसी भी हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए अंतिम अनुमति डीजीसीए द्वारा ही प्रदान की जाती है, जिसके लिए फायर सर्विस, स्ट्रक्चरल इंजीनियर और स्थानीय प्रशासन से जुड़ी तमाम जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पहले ही पूरी करनी होती हैं। कड़ी सुरक्षा जांच के बाद ही विमान को छत पर उतारने की अनुमति मिलती है।
किन मामलों में साबित होती है सबसे ज्यादा उपयोगी
डॉ. आशुतोष शर्मा के अनुसार दिल का दौरा यानी हार्ट अटैक, गंभीर ब्रेन स्ट्रोक, भीषण सड़क दुर्घटनाएं, प्रसव से जुड़ी जटिलताएं और नवजात शिशुओं की आकस्मिक चिकित्सा जरूरतों में हवाई मार्ग जीवनरक्षक साबित हो सकता है। इसके अलावा ऑर्गन ट्रांसप्लांट यानी अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में समय की भूमिका सबसे अहम होती है। किसी अन्य सुदूर शहर में उपलब्ध डोनर का लिवर या किडनी वक्त पर अस्पताल पहुंचाने से प्रत्यारोपण की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के शुरू की जा सकती है।
यदि मरीज को दिल्ली हवाई अड्डे पर उतारने के बाद सड़क मार्ग से अस्पताल लाया जाए, तो भारी ट्रैफिक के बीच कम से कम दो से ढाई घंटे का अतिरिक्त समय सिर्फ परिवहन में ही बर्बाद हो जाता है। इसके विपरीत, हेलीकॉप्टर सीधे अस्पताल की छत पर उतरता है, जिससे रोगी को बिना किसी सड़क बाधा के सीधे क्रिटिकल केयर तक ले जाया जाता है। फरीदाबाद के इस प्रतिष्ठित संस्थान में यह पहला अवसर है जब किसी मरीज को इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए सीधे आसमान के रास्ते अस्पताल पहुंचाया गया है।
भविष्य में साबित हो सकता है गेम चेंजर
डॉ. आशुतोष शर्मा का मानना है कि महानगरों में लगातार विकराल होते ट्रैफिक जाम और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के इलाज में समय के अत्यधिक महत्व को देखते हुए यह हेलीकॉप्टर आधारित एंबुलेंस सेवा आने वाले समय में मेडिकल इमरजेंसी के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव यानी गेम चेंजर साबित हो सकती है। यह तकनीक न केवल अनगिनत कीमती जानें बचाने में मददगार होगी, बल्कि आधुनिक चिकित्सा बुनियादी ढांचे को भी एक नया आयाम देगी।





















