हरियाणा के फरीदाबाद के दयालपुर गांव में नई सड़क के निर्माण से स्थानीय निवासियों की परेशानियां घटने के बजाय काफी बढ़ गई हैं। हालांकि पक्की सड़क बनकर तैयार हो चुकी है, लेकिन कई बेहद संवेदनशील और जरूरी स्थानों पर स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए गए हैं। इस वजह से इस रास्ते से गुजरने वाले वाहन बेकाबू रफ्तार से निकलते हैं और दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा मंडराता रहता है। गांव की सीमा में प्रवेश करते ही प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के पास भी कोई ब्रेकर नहीं है, जिससे तेज रफ्तार गाड़ियों पर लगाम नहीं लग पाती है। इसके अलावा स्कूल के ठीक सामने और गांव के भीतर स्थित माता चौक पर भी वाहनों की गति धीमी करने के लिए किसी भी तरह की व्यवस्था नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क उत्तर प्रदेश तक जाती है, जिस वजह से इस पर यातायात का दबाव बहुत अधिक रहता है।
भारी ट्रैफिक और बच्चों की सुरक्षा
इस मार्ग पर ट्रैफिक की स्थिति को लेकर दीपक बताते हैं कि सड़क की जितनी चौड़ाई है, उसके मुकाबले वाहनों की आवाजाही बहुत ज्यादा होती है। इस रास्ते पर आगे गर्ल्स स्कूल और खेल स्टेडियम मौजूद है, जहां बच्चों का आना-जाना पूरे दिन लगा रहता है। कई शिक्षण संस्थानों के बस स्टॉप भी इसी मार्ग पर बने हुए हैं। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर वाहनों की रफ्तार पर काबू पाने के लिए स्पीड ब्रेकर होना बेहद जरूरी है। माता चौक पर हमेशा काफी भीड़भाड़ रहती है और स्कूल के बच्चे अक्सर वहीं खड़े होते हैं। इस रास्ते से भारी वाहन और बड़े ट्रक भी गुजरते हैं, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है और गंभीर सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
खुला नाला और सुरक्षा उपायों की कमी
माता चौक से साइड रोड की तरफ मुड़ते ही एक गहरा गड्ढा और खुला नाला है, जिसे अभी तक ढका नहीं गया है। रात के समय अंधेरे में यहां किसी के भी गिरकर चोटिल होने का गंभीर खतरा बना रहता है। ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि इस नाले को तुरंत ढका जाए और चौराहे पर स्पीड ब्रेकर के साथ-साथ चेतावनी बोर्ड भी लगाए जाएं, ताकि वाहन चालकों को आगे की स्थिति का पहले ही पता चल सके। अंबाला का जिक्र करते हुए स्थानीय स्थिति को भी जोड़कर देखा जा रहा है कि किस तरह बुनियादी व्यवस्थाओं की कमी लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रही है, जहां पिछले पच्चीस दिनों से समस्याएं बनी हुई हैं।
वन वे ट्रैफिक और अन्य सुझाव
इस समस्या के समाधान को लेकर रणवीर सिंह बताते हैं कि माता चौक पर यातायात को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने के लिए रास्ते को वन वे यानी एकतरफा किया जाना चाहिए। आने और जाने के लिए अलग-अलग रास्ते तय होने से वाहनों का दबाव काफी हद तक कम हो सकता है और बीच-बीच में ब्रेकर का निर्माण होना चाहिए। आसपास अस्पताल और स्कूल होने के कारण यहां हर समय लोगों का आना-जाना लगा रहता है, जिसकी वजह से खासकर छोटे बच्चों को सड़क पार करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार तो बच्चे तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से बाल-बाल बचे हैं, जिससे अभिभावकों में हर समय चिंता बनी रहती है।
ग्रामीणों की बढ़ती चिंता और मांग
पदम सिंह का कहना है कि गांव में कई ऐसे प्रमुख स्थान हैं जहां सड़क का निर्माण तो करा दिया गया है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से एक भी ब्रेकर नहीं लगाया गया है। यह मार्ग बेहद व्यस्त है और इस पर बड़ी संख्या में वाहन फर्राटा भरते हैं। तेज रफ्तार गाड़ियों की आवाजाही के कारण स्थानीय लोगों के मन में हमेशा एक अनहोनी का डर बना रहता है। सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ती है, जिन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर तेज रफ्तार वाहनों के बीच से सड़क पार करनी पड़ती है। ग्रामीणों की पुरजोर मांग है कि सड़क निर्माण के साथ ही सभी जरूरी स्थानों पर स्पीड ब्रेकर, चेतावनी बोर्ड और अन्य पुख्ता सुरक्षा इंतजाम जल्द से जल्द किए जाएं, ताकि किसी बड़े हादसे के होने से पहले ही इस गंभीर समस्या का समय रहते समाधान निकाला जा सके।



















