हरियाणा विधानसभा का सत्र उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गया जब संत गुरु रविदास जी महाराज समरसता संकल्प अभियान से जुड़े सरकारी प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी। कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ विधायक गीता भुक्कल द्वारा दिए गए एक बयान को लेकर सदन में तीखा गतिरोध पैदा हो गया और सत्तापक्ष के सदस्यों ने इस पर कड़ा एतराज जताया। विवाद इस हद तक बढ़ गया कि सदन की सामान्य कार्यवाही में भारी बाधा आई और माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। चर्चा के दौरान अपने विचार रखते हुए कांग्रेस विधायक ने संत रविदास के एक प्रसिद्ध दोहे का हवाला दिया, जिसमें गुणों को महत्व देने और कुल की महत्ता को उससे कम आंकने की बात कही गई है। इसी प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने यह टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति का केवल उच्च कुल में जन्म ले लेना उसे स्वतः ज्ञानी या वंदनीय नहीं बना देता।
रामकुमार गौतम पर सीधा निशाना
अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कांग्रेस विधायक ने भारतीय जनता पार्टी के विधायक रामकुमार गौतम की ओर इशारा किया। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि रामकुमार गौतम भी इसी श्रेणी में आते हैं जो अक्सर समाज में जातिगत दूरियां बढ़ाने और लोगों के बीच वैमनस्य फैलाने का काम करते हैं। इस व्यक्तिगत और सीधे हमले के बाद सदन में बैठे सत्तापक्ष के सदस्यों में भारी आक्रोश फैल गया और स्थिति तेजी से नियंत्रण से बाहर होने लगी।
सत्तापक्ष की ओर से माफी की मांग
भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने इस बयान को केवल एक राजनीतिक कटाक्ष मानने से इनकार करते हुए इसे पूरे ब्राह्मण समुदाय का अपमान बताया। सत्तापक्ष के सभी सदस्य एकजुट होकर अपनी सीटों पर खड़े हो गए और कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए मांग की कि कांग्रेस विधायक अपने इस कथन को तुरंत वापस लें। इसके साथ ही उन्होंने पूरे समाज से बिना शर्त माफी मांगने की मांग पर जोर दिया।
सदन में तीखी नोंकझोंक और गतिरोध
मांग को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और नारेबाजी का दौर शुरू हो गया। एक तरफ जहां शासक दल के प्रतिनिधि अपनी जिद पर अड़े रहे, वहीं विपक्षी खेमा भी अपने तेवर नरम करने को तैयार नहीं दिखा। इस जबरदस्त हंगामे और शोर-शराबे के कारण संत रविदास पर चल रही महत्वपूर्ण समरसता चर्चा बीच में ही रुक गई और सदन की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई।



















