श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व के आगमन के साथ ही अंबाला के बाजारों में एक विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। पारंपरिक रूप से कान्हा जी के लिए नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी और मोरपंख की खरीदारी के साथ-साथ इस बार उत्सव मनाने का अंदाज थोड़ा बदल गया है। अंबाला के मॉडल टाउन, सदर बाजार और कैंट क्षेत्र की बेकरियों में भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप को समर्पित कस्टमाइज्ड केक की मांग में भारी इजाफा देखा जा रहा है। भक्त अब कान्हा जी के जन्मोत्सव को परिवार के सदस्यों के जन्मदिन की तरह भव्य तरीके से मनाने के लिए मटकी, मक्खन, मोरपंख और बांसुरी की थीम वाले विशेष केक ऑर्डर कर रहे हैं। शहर की बेकरियों में इन दिनों ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है और लोग अपनी मनपसंद डिजाइन तैयार करवा रहे हैं।
साधारण केक से कस्टमाइज्ड थीम तक का बदलाव
कुछ साल पहले तक जन्माष्टमी पर केक काटने की परंपरा काफी सीमित थी। उस समय ग्राहक केवल सामान्य डिजाइन वाले साधारण केक पर हैप्पी जन्माष्टमी लिखवाकर ले जाते थे। हालांकि समय बीतने के साथ लोगों की प्राथमिकताओं और उत्सव मनाने के तरीकों में बड़ा बदलाव आया है। अब भक्त अपने आराध्य देव के जन्म दिवस को भी किसी खास पारिवारिक आयोजन की तरह मनाना चाहते हैं। यही वजह है कि बेकरी संचालकों के पास जन्माष्टमी थीम पर आधारित कलात्मक केक की मांग कई गुना बढ़ गई है।
इस बार बाजार में सबसे ज्यादा लोकप्रिय मटकी और मक्खन थीम वाले केक बने हुए हैं। इन केक के ऊपर शक्कर और क्रीम की मदद से मिट्टी की मटकी का सुंदर आकार तैयार किया जाता है और उसके ऊपर से बहते हुए मक्खन की सजावट की जाती है। केक को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए उस पर मोरपंख और बांसुरी के डिजाइन भी सजाए जाते हैं। देखने में ये केक इतने मनमोहक लगते हैं मानो भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का कोई दृश्य केक के ऊपर साकार कर दिया गया हो।
इंटरनेट से फोटो भेजकर अगले दिन ऑर्डर पाने की सुविधा
अंबाला की बेकरी व्यवसायी सहर कंसारा ने इस नए ट्रेंड के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जन्माष्टमी को ध्यान में रखते हुए इस बार विशेष रूप से मटकी केक तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आजकल ग्राहक अपने केक के डिजाइन को लेकर काफी सजग हैं। कई लोग इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से अपनी पसंद की तस्वीरें खोजकर बेकरी संचालकों को भेजते हैं और बिल्कुल वैसा ही डिजाइन तैयार करने का आग्रह करते हैं। बेकरी संचालकों की कोशिश रहती है कि ऑर्डर मिलने के 24 घंटे के भीतर ग्राहक को उसका मनपसंद केक तैयार करके दे दिया जाए।
सहर कंसारा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब उन्होंने लगभग 5 साल पहले केक बनाने का काम शुरू किया था, तब जन्माष्टमी पर लोग साधारण केक ही पसंद करते थे। लेकिन पिछले 5 वर्षों में ग्राहकों के रुझान में बड़ा बदलाव आया है और अब हर कोई कुछ नया और रचनात्मक करवाने का उत्साह दिखाता है।
250 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की कीमत सीमा
जन्माष्टमी के इन विशेष कस्टमाइज्ड केक की कीमतें उनके वजन, डिजाइन और सजावट की जटिलता के आधार पर तय की जाती हैं। ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के अनुसार आधा किलो, 1 किलो से लेकर 2 किलो तक के केक तैयार करवा रहे हैं। छोटे आयोजनों के लिए आधा किलो का केक ज्यादा पसंद किया जा रहा है, जबकि बड़े परिवारों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए 1 से 2 किलो के केक के ऑर्डर मिल रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार त्यौहार के मुख्य दिन समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए एडवांस बुकिंग ली जा रही है।
कीमतों की बात करें तो विशेष डिजाइन और कस्टमाइजेशन वाले जन्माष्टमी केक की शुरुआती कीमत लगभग 1000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक पहुंच जाती है। वहीं बेकरियों में सामान्य केक की कीमत लगभग 600 रुपये से शुरू होती है। अंबाला की छोटी और स्थानीय बेकरियों में आम लोगों के बजट को ध्यान में रखते हुए जन्माष्टमी थीम वाले केक 250 रुपये से 300 रुपये की शुरुआती कीमत पर भी उपलब्ध हैं। इसके विपरीत बड़ी और प्रतिष्ठित बेकरियों में विशेष फिनिशिंग, हैंडक्राफ्टेड डेकोरेशन और कस्टमाइजेशन के कारण दाम अधिक रखे गए हैं।
आकर्षक पैकेजिंग और लाइट वाले बॉक्स बने आकर्षण
जन्माष्टमी के इस बदलते ट्रेंड में सिर्फ केक की डिजाइनिंग ही नहीं, बल्कि उसकी विशेष पैकेजिंग भी ग्राहकों के बीच आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है। साधारण गत्ते के डिब्बों के बजाय ग्राहक अब थीम आधारित प्रीमियम पैकेजिंग बॉक्स चुन रहे हैं।
अंबाला के कई बेकरी संचालक कान्हा जी की थीम वाली विशेष पैकेजिंग तैयार कर रहे हैं, जिसमें ताजे फूलों की सजावट, छोटी एलईडी लाइट्स और हैप्पी जन्माष्टमी के टैग लगाए जा रहे हैं। इस प्रकार इस बार जन्माष्टमी पर कान्हा जी के लिए केवल नई पोशाक और बांसुरी ही नहीं, बल्कि मटकी और मक्खन वाला यह स्पेशल केक भी उत्सव का मुख्य हिस्सा बन चुका है।



















