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हथिनीकुंड बैराज अभ्यास हादसे में बहे दोनों सेना कमांडो के शव बरामद, यूपी और जींद नहर से मिलेहरियाणा
3 सित॰ 2026, 2:10 pm (1 दिन पहले)· 1

हथिनीकुंड बैराज अभ्यास हादसे में बहे दोनों सेना कमांडो के शव बरामद, यूपी और जींद नहर से मिले

हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज में सैन्य अभ्यास के दौरान नाव पलटने से बहे दोनों स्पेशल पैरा कमांडो के शव 45 घंटे चले तलाशी अभियान के बाद उत्तर प्रदेश और जींद नहर से बरामद कर लिए गए हैं।

हरियाणा के यमुनानगर में हथिनीकुंड बैराज के पास सैन्य अभ्यास के दौरान हुए एक दर्दनाक हादसे के बाद लापता हुए भारतीय सेना के दोनों स्पेशल पैरा कमांडो के शव बरामद कर लिए गए हैं। मंगलवार शाम को चिनूक हेलीकॉप्टर से बैराज के जलक्षेत्र में छलांग लगाने के बाद पानी के तेज बहाव की वजह से जवानों की नाव पलट गई थी। इस हादसे में तीन जवान तैरकर सुरक्षित बाहर आने में सफल रहे थे, जबकि दो जवान नदी के उफान में बह गए थे। लगभग 45 घंटे तक चले सघन तलाशी अभियान के बाद बचाव टीमों ने दोनों जवानों के पार्थिव शरीर अलग-अलग स्थानों से बरामद कर लिए हैं।

मछुआरों के जाल में फंसा पहले जवान का शव

लापता जवानों की तलाश में सेना के साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें हथिनीकुंड बैराज से सटे इलाकों में लगातार खोजबीन कर रही थीं। बुधवार देर शाम उत्तर प्रदेश की सीमा में स्थित बरथा कोरसी गांव के निकट नदी में मछली पकड़ने के लिए लगाए गए जाल में एक कमांडो का शव फंसा मिला। स्थानीय ग्रामीणों की सतर्कता और सहायता से शव को नदी के किनारे लाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही सेना के अधिकारी और जवान तुरंत मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके की घेराबंदी करके शव को अपने कब्जे में ले लिया। मृत जवान की पहचान अजय के रूप में हुई है, जो जम्मू एवं कश्मीर के रहने वाले थे।

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जींद नहर से बरामद हुआ दूसरे कमांडो का शव

पहले जवान की बरामदगी के बाद भी रेस्क्यू टीमों ने दूसरे लापता सैनिक की खोज में अभियान जारी रखा। गुरुवार को घटना के करीब 45 घंटे बाद जींद नहर में सब्जी मंडी के पीछे पुलिस टीम को दूसरे कमांडो की देह मिली। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शव को बाहर निकाला और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कीं। शुरुआती जांच और पहचान के आधार पर दूसरे मृत जवान की पहचान महाराष्ट्र निवासी सैनिक के रूप में की गई है। दोनों जवानों की असमय मृत्यु से उनके परिवारों और सैन्य दल में गहरा शोक व्याप्त है।

नाहन ट्रेनिंग स्कूल से अभ्यास के लिए आए थे जवान

यह दुखद दुर्घटना मंगलवार शाम लगभग 5 बजे उस समय घटी जब हिमाचल प्रदेश के नाहन स्थित आर्मी ट्रेनिंग स्कूल से आए स्पेशल पैरा कमांडो हथिनीकुंड बैराज में नियमित मॉकड्रिल कर रहे थे। अभ्यास योजना के तहत पांच जवानों ने चिनूक हेलीकॉप्टर से बैराज के पानी में छलांग लगाई थी। हालांकि, बैराज में पानी की गति और बहाव काफी तेज था, जिसकी चपेट में आकर उनकी नाव अचानक संतुलन खो बैठी और पलट गई। दुर्घटना के तुरंत बाद 20 किलोमीटर के व्यापक दायरे में बहु-स्तरीय सर्च ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें लगातार 45 घंटे की मशक्कत के बाद दोनों कमांडो के शव मिल सके।

सवाल-जवाब

हथिनीकुंड बैराज में हादसा कब और कैसे हुआ?
मंगलवार शाम करीब 5 बजे चिनूक हेलीकॉप्टर से पानी में छलांग लगाने के बाद तेज बहाव के कारण कमांडो की नाव पलट गई थी।
हादसे के समय नाव में कितने जवान सवार थे?
अभ्यास के दौरान कुल 5 जवान चिनूक से पानी में कूदे थे, जिनमें से 3 तैरकर सुरक्षित निकल आए और 2 बह गए थे।
लापता कमांडो के शव कहाँ-कहाँ से बरामद हुए?
एक कमांडो का शव उत्तर प्रदेश के बरथा कोरसी गांव में मछुआरों के जाल से मिला, जबकि दूसरे का शव जींद नहर में सब्जी मंडी के पीछे बरामद हुआ।
ये सैनिक किस संस्थान से प्रशिक्षण के लिए आए थे?
ये सभी स्पेशल पैरा कमांडो हिमाचल प्रदेश के नाहन स्थित आर्मी ट्रेनिंग स्कूल से हथिनीकुंड अभ्यास के लिए पहुंचे थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

हथिनीकुंड बैराज में हुए इस हादसे ने उच्च जोखिम वाले सैन्य अभियानों के दौरान अंतर-राज्यीय समन्वय और जल प्रवाह के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमाओं से लगे इस क्षेत्र में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्यप्रणाली ने त्वरित रेस्क्यू में मदद तो की, लेकिन भविष्य में ऐसे सामरिक अभ्यासों के दौरान बैराज के जलस्तर और तीव्र बहाव को नियंत्रित करने के लिए नागरिक प्रशासन और सेना के बीच अधिक पुख्ता एसओपी की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

यह दुर्घटना सैन्य अभ्यासों में जल प्रवाह और भौगोलिक सीमाओं के बीच के जोखिमों को उजागर करती है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच अंतर-राज्यीय क्षेत्राधिकार और स्थानीय मछुआरों की मदद से शवों का मिलना यह दर्शाता है कि ऐसे अभियानों में सिविल-मिलिट्री समन्वय और उन्नत जल-प्रबंधन प्रोटोकॉल कितने अनिवार्य हैं। भविष्य के मॉकड्रिल्स में बैराज के जलस्तर पर नियंत्रण और त्वरित संवाद प्रणाली को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि इस तरह की अनहोनी से बचा जा सके।

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