नागालैंड विधानसभा के बाहर अनिवार्य वंदे मातरम के खिलाफ एनएसएफ का प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारीफारस की खाड़ी में संकट से उछलेगा कच्चा तेल, आईएनजी ने चौथी तिमाही के अनुमान बढ़ाकर किए $80रोहित शर्मा के 2027 वर्ल्ड कप खेलने पर बीसीसीआई का बड़ा बयान, संन्यास की खबरों पर लगाई रोकभ्रष्टाचार के मामलों में तेजी लाएं अधिकारी, मिजोरम के मुख्यमंत्री ललदुहोमा ने दिए सख्त निर्देशगीर फाउंडेशन के सर्वे में बड़ा खुलासा, दक्षिण कच्छ की खाड़ी में तेजी से बढ़ा डॉल्फिन का कुनबाओपन सोर्स एआई पर बड़ा दांव खेलते हुए सेमीकंडक्टर दिग्गज एनवीडिया ने 12.9 अरब डॉलर में हगिंग फेस का अधिग्रहण कियाभारत की मेजबानी में BRICS मुख्य न्यायाधीश फोरम का आयोजन, CJI सूर्यकांत 10 राष्ट्रों के शीर्ष जजों संग करेंगे द्विपक्षीय बैठकेंमुंबई के गोरेगांव में ऋतिक रोशन ने 5 साल के लिए लीज पर दिया ऑफिस, मिलेंगे 4.84 करोड़ रुपयेइम्पैक्ट प्लेयर के रूप में मैदान पर नहीं उतरेंगे एमएस धोनी, सुब्रमण्यम बद्रीनाथ ने किया खुलासाबांद्रा स्थित 'रफी मेंशन' पहुंचे सोनू निगम, सचिन तेंदुलकर और सलीम मर्चेंट, हारमोनियम पर गाया 'दीवाना हुआ बादल'
दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में वायु प्रदूषण पर सख्त कदम, भूपेंद्र यादव ने 5 राज्यों के साथ बनाई रणनीतिहरियाणा
3 सित॰ 2026, 6:08 pm (45 मिनट पहले)· 0

दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में वायु प्रदूषण पर सख्त कदम, भूपेंद्र यादव ने 5 राज्यों के साथ बनाई रणनीति

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए समीक्षा बैठक की। इसमें नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के सख्त निर्देश दिए गए।

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में हवा की गुणवत्ता को सुधारने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में आगामी महीनों के लिए तैयार किए गए विशेष एक्शन प्लान की गहराई से समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा कि वायु प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों और नियमों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और सरकार इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करेगी।

प्रदूषण हॉटस्पॉट पर कड़ी निगरानी और नाम सार्वजनिक करने का फैसला

दिल्ली में प्रदूषण के मुख्य हॉटस्पॉट की पहचान करके उनके लिए व्यावहारिक तथा प्रभावी कार्ययोजना लागू करने पर विशेष बल दिया गया। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया गया कि वह इन संवेदनशील इलाकों में जमीनी निगरानी को मजबूत करे। नियम तोड़ने वाले उद्योगों और व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा, प्रदूषण फैलाने वाले उल्लंघनकर्ताओं के नाम सार्वजनिक करने पर भी जोर दिया गया है ताकि सामाजिक और कानूनी दबाव बनाया जा सके। केवल जागरूकता अभियानों के भरोसे रहने के बजाय वास्तविक धरातल पर कड़े नियम लागू करना बेहद जरूरी माना गया है।

ये भी पढ़ें

पड़ोसी राज्यों की जिम्मेदारी और स्थानीय स्रोतों पर प्रहार

हरियाणा सरकार को निर्देश दिया गया कि वह NCR के अन्य पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर काम करे और स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होने वाले प्रदूषण के स्रोतों पर कड़ा नियंत्रण लगाए। जमीनी स्तर पर जनभागीदारी बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने वाले अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया। इसी तरह उत्तर प्रदेश के NCR से सटे इलाकों में औद्योगिक गतिविधियों की सख्त निगरानी करने और विभिन्न प्रशासनिक विभागों के बीच बेहतर तालमेल बैठाने के निर्देश दिए गए। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को गैर-अनुरूप और प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

कृषि प्रदूषण और पंजाब के लिए विशेष रणनीति

पंजाब के साथ हुई चर्चा में कृषि क्षेत्र से पैदा होने वाले प्रदूषण, खासकर पराली जलाने से जुड़ी समस्याओं पर गहन मंथन किया गया। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि कृषि और पर्यावरण विभागों को एक साथ मिलकर काम करना होगा। इसके लिए केंद्र और राज्यों के कृषि, पर्यावरण और शहरी विकास मंत्रियों के बीच संयुक्त बैठकों के आयोजन का प्रस्ताव पेश किया गया ताकि एक समन्वित और व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके। राजस्थान को भी निर्देश दिया गया कि वह NCR के सामूहिक वायु गुणवत्ता प्रबंधन ढांचे के तहत अपनी योजनाओं को मुस्तैदी से लागू करे और सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करे।

सख्त कार्रवाई और सितंबर में अगली समीक्षा

समीक्षा बैठक का समापन करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा कि सिर्फ सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) जैसी गतिविधियों से प्रदूषण पर काबू नहीं पाया जा सकता। इसके लिए कानून का सख्त अनुपालन और जमीनी स्तर पर कठोर प्रवर्तन अनिवार्य है। उन्होंने दोहराया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी संस्थान या व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। राज्यों की प्रगति और उठाए गए कदमों का आकलन करने के लिए सितंबर महीने में केंद्रीय मंत्री स्तर की एक और समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। केंद्र सरकार ने सभी पांचों राज्यों को आश्वस्त किया कि वायु गुणवत्ता सुधारने के इस अभियान में हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

सवाल-जवाब

समीक्षा बैठक की अध्यक्षता किसने की?
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
इस बैठक में कौन-कौन से राज्य शामिल थे?
बैठक में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ क्या नीति अपनाई जाएगी?
सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वाली और गैर-अनुरूप प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का निर्देश दिया है।
पंजाब सरकार के साथ किस मुख्य मुद्दे पर चर्चा हुई?
पंजाब के साथ कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रदूषण स्रोतों, विशेष रूप से पराली जलाने की समस्या और कृषि-पर्यावरण विभागों के बीच समन्वित रणनीति बनाने पर चर्चा हुई।
अगली समीक्षा बैठक कब आयोजित की जाएगी?
राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों और उनकी प्रगति का आकलन करने के लिए सितंबर महीने में केंद्रीय मंत्री स्तर की अगली समीक्षा बैठक होगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·17 मिनट पहले

दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण के लिए पांचों राज्यों की यह संयुक्त बैठक प्रशासनिक समन्वय की दिशा में एक अहम कदम है। हालांकि, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में ज़मीनी स्तर पर नियमों का सख़्त पालन कराना और पंजाब में पराली प्रबंधन पर ठोस परिणाम देना सबसे बड़ी चुनौती होगी। कागजी कार्ययोजनाओं से आगे बढ़कर जिला स्तर पर प्रशासनिक अमले की जवाबदेही तय किए बिना धरातल पर सुधार दिखना मुश्किल है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 मिनट पहले

रोहन का विश्लेषण सही है, लेकिन बतौर क्राइम और विधिक मामलों का रिपोर्टर मेरा मानना है कि केवल प्रशासनिक निर्देशों से बात नहीं बनेगी। जब तक पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज कर त्वरित अदालती कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक जीरो टॉलरेंस का दावा कागजी साबित होगा। उल्लंघनकर्ताओं के नाम सार्वजनिक करने के साथ-साथ जिला अदालतों में फास्ट ट्रैक सुनवाई का प्रावधान करना जरूरी है ताकि एक कड़ा कानूनी संदेश जा सके।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR