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नए सैलरी पैकेज के बावजूद हरियाणा में 29वें दिन पहुंचा सफाईकर्मियों का प्रदर्शन, नायब सिंह सैनी प्रशासन की बढ़ी चिंताएंहरियाणा
3 सित॰ 2026, 2:10 pm (1 दिन पहले)· 1

नए सैलरी पैकेज के बावजूद हरियाणा में 29वें दिन पहुंचा सफाईकर्मियों का प्रदर्शन, नायब सिंह सैनी प्रशासन की बढ़ी चिंताएं

हरियाणा में 13,000 सफाई कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से शहरों में कचरे के ढेर लग गए हैं। सरकार द्वारा 25,560 रुपये तक वेतन बढ़ोतरी और 60 साल तक जॉब सुरक्षा के नए ऑफर के बाद भी कर्मचारी काम पर लौटने को तैयार नहीं हैं।

हरियाणा के विभिन्न शहरों और कस्बों में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल गुरुवार को 29वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। राज्य भर में लगभग 13,000 सफाई कर्मचारी और सीवरमैन अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर काम बंद करके सड़कों पर उतरे हुए हैं। इस अनिश्चितकालीन आंदोलन के कारण शहरी निकाय क्षेत्रों में साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। जगह-जगह कचरे के बड़े-बड़े ढेर जमा हो चुके हैं, जिससे स्थानीय निवासियों को दुर्गंध और बीमारियों के बढ़ते खतरे का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार के मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा वार्ता की लगातार कोशिशों के बावजूद कर्मचारियों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है। आंदोलनकारी कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस सरकारी आदेश जारी नहीं होते, तब तक वे अपना प्रदर्शन समाप्त नहीं करेंगे।

29 दिनों से ठप सफाई व्यवस्था और राज्यभर में पसरा संकट

हरियाणा के नगरीय निकायों में काम करने वाले करीब 13,000 सफाई कर्मियों और सीवरमैनों की बेमियादी हड़ताल के कारण पूरे प्रदेश में स्वच्छता तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। गुरुवार को हड़ताल का 29वां दिन दर्ज किया गया, लेकिन समाधान की कोई राह निकलती नहीं दिख रही है। शहरों की मुख्य सड़कों, व्यावसायिक परिसरों, सब्जी मंडियों और रिहायशी कॉलोनियों में कूड़े के पहाड़ खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों के लिए पैदल चलना और सांस लेना भी दूभर हो गया है। सफाई कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि वे कई महीनों और वर्षों से अपनी जायज मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन दे रहे थे, लेकिन सरकार ने उनके आग्रहों को लगातार नजरअंदाज किया। इसी उदासीनता से तंग आकर कर्मचारियों को सामूहिक रूप से काम बंद हड़ताल पर जाने का कड़ा कदम उठाना पड़ा। राज्य के कई हिस्सों में हड़ताल के दौरान प्रदर्शनकारी कर्मचारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और झड़पें भी देखने को मिली हैं। प्रदर्शनों के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर पुलिस ने कई जिलों में प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज किए हैं और कई कर्मचारी नेताओं को हिरासत में या गिरफ्तार भी किया है। इसके बावजूद कर्मचारी अपनी मांग पर अडिग हैं।

सोनीपत के गोहाना में पुलिस पहरे के बीच कचरा उठान, 22 कर्मियों पर एफआईआर

हड़ताल के 29वें दिन सोनीपत जिले के गोहाना कस्बे में प्रशासन और प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के बीच तनाव की स्थिति सामने आई। गोहाना नगर परिषद प्रशासन ने गुरुवार को पुलिस बल की मौजूदगी में शहर से कचरा उठाने वाले वाहनों को सड़कों पर रवाना करने का प्रयास किया। इससे पहले बुधवार को हड़ताली कर्मचारियों ने विरोध जताते हुए नगर परिषद कार्यालय परिसर में खड़े कूड़ा उठाने वाले वाहनों के सभी टायरों की हवा निकाल दी थी। नगर परिषद के अधिकारियों ने गुरुवार सुबह सभी वाहनों के टायरों में दोबारा हवा भरवाई और भारी पुलिस सुरक्षा के बीच उन्हें कचरा निस्तारण के लिए शहर में भेजा। गोहाना नगर परिषद सचिव की आधिकारिक शिकायत के आधार पर पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने और वाहनों को क्षति पहुँचाने की धाराओं के तहत 22 सफाई कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। नगर परिषद सचिव का कहना है कि शहर में सफाई व्यवस्था को बहाल करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और जो भी इसमें व्यवधान डालेगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, कर्मचारी नेताओं ने मुकदमे दर्ज किए जाने की कड़ी निंदा करते हुए इसे आंदोलन को कुचलने की प्रशासनिक दमनकारी नीति करार दिया है।

वेतन वृद्धि, जोखिम भत्ता और 60 वर्ष तक जॉब सुरक्षा: सैनी सरकार का रिफॉर्म ऑफर

आंदोलन को खत्म कराने और गतिरोध को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अगुवाई वाली सरकार ने सफाई कर्मचारियों के समक्ष एक विस्तृत सेवा सुधार और वित्तीय पैकेज की पेशकश रखी है। शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को कर्मचारी संगठनों के साथ बातचीत की कमान सौंपी गई है। वर्तमान में पालिका रोल पर तैनात सफाई कर्मचारियों को प्रति माह कुल ₹20,590 का वेतन मिलता है, जिसमें ₹19,000 मूल वेतन और ₹1,590 विभिन्न भत्ते शामिल हैं। सरकार ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया है कि वह उन्हें हरियाणा संविदात्मक कर्मचारी (सेवा की सुनिश्चितता) अधिनियम, 2024 के कानूनी दायरे में शामिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस अधिनियम के तहत आने के बाद कर्मचारियों को 60 वर्ष की आयु तक की नौकरी की पूर्ण सुरक्षा (सर्विस सिक्योरिटी) प्राप्त होगी, जो नियमित कर्मचारियों के समान लाभ प्रदान करेगी।

इसके अलावा, सरकार ने सफाई कर्मचारियों के कठिन और स्वास्थ्य-जोखिम भरे कार्य को देखते हुए उन्हें ₹2,000 प्रति माह अतिरिक्त जोखिम भत्ता (रिस्क अलाउंस) देने का भी प्रस्ताव रखा है। इतना ही नहीं, 2024 के अधिनियम के तहत मिलने वाले निर्धारित वेतनमान पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त राशि जोड़ने का भी वादा किया गया है। सरकार की इस नई नीति के लागू होने से पालिका रोल पर 10 वर्ष या उससे अधिक समय से सेवा दे रहे सफाई कर्मचारियों का कुल मासिक वेतन बढ़कर ₹25,560 हो जाएगा। इसके साथ ही कर्मचारियों को वार्षिक महंगाई भत्ता (डीए), मृत्यु एवं सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी (डैथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी), मातृत्व अवकाश सुविधा, तथा हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएनएल) के अंतर्गत मिलने वाली एक्स-ग्रेसिया वित्तीय सहायता और अनुग्रह नियुक्ति (एक्स-ग्रेसिया अपॉइंटमेंट) के तमाम लाभ प्रदान किए जाएंगे।

शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि राज्य सरकार सफाई कर्मियों की लगभग सभी मुख्य मांगों पर सहमति व्यक्त करते हुए समाधान की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। उन्होंने बताया कि सरकार सफाई कर्मियों के सम्मान और उनके सुरक्षित भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 2 सितंबर 2026 को डीपीआर हरियाणा (@DiprHaryana) द्वारा जारी संदेश में मंत्री विपुल गोयल ने राज्य के सभी सफाई कर्मचारी भाई-बहनों से अपील की कि वे तुरंत प्रभाव से काम पर लौटें और प्रदेश की स्वच्छता व्यवस्था को फिर से सुचारू बनाने में सहयोग करें। हालांकि, कर्मचारी संघों का मानना है कि जब तक इन घोषणाओं का अंतिम परिपत्र (सर्कुलर) जारी नहीं होता और अन्य मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक केवल मौखिक या लिखित आश्वासनों के आधार पर हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी।

विपक्षी घेराबंदी: कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

सफाई कर्मचारियों की हड़ताल लंबा खिंचने के साथ ही राज्य में सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सैनी सरकार की प्रशासनिक अक्षमता और नीयत पर तीखे सवाल दागे हैं। हरियाणा कांग्रेस की वरिष्ठ विधायक एवं पूर्व मंत्री गीता भुक्कल ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार सफाई कर्मचारियों की न्यायसंगत मांगों को लेकर तनिक भी गंभीर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गतिरोध सुलझाने के बजाय मामले को लटकाने और टालने की नीति पर काम कर रही है। गीता भुक्कल ने कहा कि 29 दिनों की लंबी हड़ताल के कारण हरियाणा के छोटे-बड़े शहरों और कस्बों में जगह-जगह कचरे के अंबार लग चुके हैं। सड़कों पर सड़ रहे कचरे से बीमारियाँ फैलने की आशंका बढ़ गई है और आम जनता का जीना मुहाल हो चुका है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार की हठधर्मिता और विफलता का खामियाजा राज्य के आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है, जिससे सरकारी दावों की पोल खुल गई है।

20 प्रतिशत दलित आबादी और 17 आरक्षित सीटें: बीजेपी की राजनीतिक चिंताएं

सफाई कर्मचारियों का यह आंदोलन सिर्फ एक प्रशासनिक या नागरिक समस्या नहीं है, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी भारतीय जनता पार्टी सरकार के लिए एक बड़ा संकट बन चुका है। हरियाणा के सामाजिक समीकरणों में दलित समुदाय की भूमिका बेहद निर्णायक मानी जाती है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में दलित आबादी लगभग 20 प्रतिशत (और सामाजिक विश्लेषकों के अनुसार 30 प्रतिशत से अधिक) है। राज्य की कुल 90 विधानसभा सीटों में से करीब 47 सीटें ऐसी हैं, जहाँ दलित मतदाताओं की संख्या 20 फीसदी या उससे अधिक है। ये मतदाता किसी भी राजनीतिक दल के हार और जीत का गणित बदलने में सक्षम हैं। इसके अलावा, हरियाणा विधानसभा में 17 सीटें अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित हैं।

राज्य में कार्यरत सफाई कर्मचारियों का एक बहुत बड़ा हिस्सा वाल्मीकि समाज यानी दलित समुदाय से आता है। ऐसे में 13,000 सफाई कर्मियों का 29 दिनों तक हड़ताल पर रहना और सरकार के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन करना बीजेपी के राजनीतिक गणित को बिगाड़ सकता है। यदि दलित समुदाय में सरकार के प्रति असंतोष गहराता है, तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों और पार्टी के जनाधार पर पड़ सकता है। यही कारण है कि नायब सिंह सैनी सरकार इस संवेदनशील विवाद को ज्यादा लंबा खींचने का जोखिम नहीं लेना चाहती और लगातार अपने मंत्रियों व आला अधिकारियों को वार्ता की टेबल पर भेजकर मामले को जल्द से जल्द शांत करने की कवायद में जुटी हुई है।

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सवाल-जवाब

हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को कितने दिन हो चुके हैं?
हरियाणा में सफाई कर्मचारियों और सीवरमैनों की हड़ताल गुरुवार को 29वें दिन में प्रवेश कर चुकी है।
राज्यभर में कितने सफाई कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं?
रिपोर्ट के अनुसार राज्यभर में करीब 13,000 सफाई कर्मचारी और सीवरमैन इस अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
सरकार ने सफाई कर्मचारियों के लिए क्या नया सैलरी ऑफर दिया है?
सरकार ने संविदात्मक कर्मचारी अधिनियम 2024 के तहत 15% अतिरिक्त राशि और 2,000 रुपये मासिक जोखिम भत्ता देने की पेशकश की है, जिससे 10 साल से अधिक सेवा वाले कर्मियों का वेतन 25,560 रुपये मासिक हो जाएगा।
वर्तमान में पालिका रोल पर तैनात सफाई कर्मियों को कितना वेतन मिलता है?
वर्तमान समय में सफाई कर्मचारियों को कुल 20,590 रुपये मासिक वेतन दिया जाता है, जिसमें 19,000 रुपये मूल वेतन और 1,590 रुपये भत्ते शामिल हैं।
गोहाना में 22 सफाई कर्मचारियों पर मामला क्यों दर्ज किया गया है?
सोनीपत के गोहाना में नगर परिषद की कचरा गाड़ियों के टायरों की हवा निकालने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में 22 कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज की गई है।
हरियाणा में दलित मतदाताओं का राजनीतिक महत्व क्या है?
हरियाणा में दलित आबादी 20 प्रतिशत (और 30% से अधिक) है, राज्य की 47 सीटों पर दलित मतदाता 20% से ज्यादा हैं और 90 में से 17 सीटें एससी के लिए आरक्षित हैं।
शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने कर्मचारियों से क्या अपील की है?
मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि सरकार लगभग सभी मांगों पर सहमत है और 60 वर्ष तक सेवा सुरक्षा दे रही है, इसलिए कर्मचारी काम पर लौटें।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

इस मामले में कानून-व्यवस्था का पहलू बेहद संवेदनशील हो गया है। गोहाना में पुलिस बल की मौजूदगी में कचरा उठाने और 22 कर्मियों पर एफआईआर दर्ज होने से टकराव और बढ़ सकता है। जब तक सरकार केवल बल प्रयोग या मुकदमों के बजाय लिखित और ठोस प्रशासनिक आदेश जारी नहीं करती, तब तक सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य का यह संकट थमता नजर नहीं आता।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

करण मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यदि हरियाणा सरकार ने 25,560 रुपये वेतन और 60 साल तक जॉब सुरक्षा का नया प्रस्ताव दिया है, तो ज़मीनी स्तर पर संवादहीनता एक बड़ा कारण है। जब तक प्रशासन यूनियन नेताओं को भरोसे में लेकर लिखित आदेश जारी नहीं करता, तब तक गोहाना जैसी घटनाएं राज्य के अन्य जिलों में भी भड़क सकती हैं। इससे न सिर्फ सार्वजनिक स्वास्थ्य का संकट गहराएगा, बल्कि आगामी राजनीतिक और प्रशासनिक मोर्चे पर सरकार की मुश्किलें और बढ़ेंगी।

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