बढ़ती उम्र के प्रभाव केवल बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं रहते हैं, बल्कि कई बार कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियां और जीवनशैली से जुड़ी आदतें शरीर पर तय समय से पहले ही बुढ़ापे की झलक दिखाने लगती हैं। यह बेहद आवश्यक है कि शरीर के भीतर और बाहर होने वाले इन बदलावों को बिल्कुल भी नजरअंदाज न किया जाए। यह समझ लेना बहुत जरूरी है कि केवल बालों का सफेद हो जाना या चेहरे की त्वचा पर झुर्रियां पड़ जाना ही बढ़ती उम्र का एकमात्र पैमाना नहीं होता है। ऐसे 7 प्रमुख संकेतों के बारे में जानना और उनकी असली वजह का पता लगाना बेहद जरूरी है यदि वे कम उम्र में ही शरीर में नजर आने लगें।
त्वचा पर समय से पहले झुर्रियां आना
जैसे-जैसे आयु बढ़ती है, त्वचा का प्राकृतिक लचीलापन धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसकी वजह से चेहरे पर महीन रेखाएं और झुर्रियां उभरने लगती हैं। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को तीस साल की उम्र पार करने से पहले ही माथे पर या आंखों के आसपास गहरी झुर्रियां साफ दिखाई देने लगें, तो इसके पीछे कई हानिकारक कारण हो सकते हैं। इनमें जरूरत से ज्यादा तेज धूप के संपर्क में रहना, धूम्रपान करना, शराब का सेवन, शरीर में पानी की कमी होना और बेहद खराब खानपान जैसी आदतें शामिल होती हैं जो व्यक्ति को समय से पहले ही बूढ़ा बनाने में पूरी तरह जिम्मेदार होती हैं।
बालों का जल्दी सफेद होना या झड़ना
इंसान के बालों का रंग मुख्य रूप से मेलेनिन नामक पिगमेंट पर निर्भर करता है। जब शरीर में इस पिगमेंट की कमी होने लगती है, तो बाल समय से पहले ही सफेद होने की स्थिति में आ जाते हैं। इस प्रक्रिया में अत्यधिक मानसिक तनाव, आनुवंशिक कारण और खानपान में पोषण की भारी कमी बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। इसके अलावा, तीस वर्ष की उम्र से पहले बालों का बहुत तेजी से झड़ना भी एक ऐसा विषय है जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता होती है। हालांकि, इसके पीछे शरीर के भीतर होने वाले हार्मोनल बदलाव और अन्य छिपे हुए स्वास्थ्य विकार भी मुख्य कारण हो सकते हैं।
पर्याप्त नींद के बाद भी लगातार थकान
यदि रात में भरपूर और अच्छी नींद लेने के बाद भी सुबह उठने पर दिनभर शरीर में थकान और कमजोरी बनी रहती है, तो इस लक्षण को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। इस तरह की निरंतर थकान के पीछे अत्यधिक मानसिक तनाव, खून की कमी यानी एनीमिया, थायरॉइड से जुड़ी कोई गंभीर समस्या या फिर किसी प्रकार की नींद संबंधी परेशानियां घर कर सकती हैं।
मांसपेशियों की ताकत में कमी
यदि कम उम्र के दौर में ही शरीर की मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगें या फिर रोजमर्रा के छोटे-मोटे शारीरिक काम करने में भी खासी परेशानी का सामना करना पड़े, तो इस स्थिति की असली वजह का पता लगाना बेहद अनिवार्य हो जाता है। शरीर को भोजन में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन न मिलना, किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि या कसरत की भारी कमी और कुछ विशेष बीमारियां मांसपेशियों की ताकत को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं।
आंखों की नजर और सुनने की क्षमता में बदलाव
सामान्य तौर पर उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति की देखने और सुनने की क्षमता पर असर पड़ता है। लेकिन अगर कम उम्र में ही चीजें धुंधली दिखाई देने लगें या फिर कान से सुनने में किसी प्रकार की परेशानी महसूस हो, तो इसे केवल सामान्य बुढ़ापे का संकेत नहीं माना जा सकता है। अत्यधिक तेज आवाज के संपर्क में लगातार रहना, आंखों से जुड़ी अन्य बीमारियां और शरीर की दूसरी अंदरूनी स्वास्थ्य स्थितियां इस बदलाव की मुख्य वजह बन सकती हैं।
पेट की गड़बड़ी और अचानक वजन बढ़ना
पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे लगातार कब्ज रहना, गैस बनना, एसिडिटी की शिकायत रहना और पेट का हमेशा फूला रहना पाचन तंत्र में किसी बड़ी गड़बड़ी का साफ इशारा होता है। वहीं दूसरी तरफ, बिना किसी स्पष्ट वजह के पेट के आसपास शरीर की चर्बी का अचानक बढ़ जाना भी एक ऐसा पहलू है जिस पर गौर करना चाहिए। इसके पीछे मानसिक तनाव, शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, खानपान की गलत आदतें और शारीरिक सक्रियता की कमी प्रमुख कारण साबित हो सकते हैं।




















