भारतीय परिवारों में दादी और नानी हमेशा से बच्चों को दूध, दही और घी जैसी चीजें खाने पर जोर देती आई हैं। पीढ़ियों से हमारे देश में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी बड़े चाव से दूध पीते आ रहे हैं। दूध को हमेशा से एक संपूर्ण आहार माना गया है, जिसे सिर्फ छोटे बच्चे ही नहीं बल्कि वयस्क और वृद्ध लोग भी अपनी डाइट में शामिल करते हैं। हालांकि, आजकल चर्चा रहती है कि क्या एक निश्चित उम्र के बाद दूध का सेवन बंद कर देना चाहिए या फिर इसे कम कर देना चाहिए। बहुत से लोग अब गाय या भैंस का दूध पीने से कतराने लगे हैं, जिसके चलते यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या दूध सिर्फ बच्चों के लिए ही बना है।
हड्डियों के विकास में दूध की भूमिका
इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए डॉक्टर अखिलेश यादव (डायरेक्टर, ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट, मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली) ने बताया कि हड्डियों की मजबूती के लिहाज से दूध पीने की कोई एक ऊपरी आयु सीमा तय नहीं है। दूध में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, प्रोटीन और अन्य जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हड्डियों के विकास, उनकी संरचना को मजबूत करने और मांसपेशियों के समुचित स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाते हैं। चूंकि बचपन और किशोरावस्था के दौरान शरीर में हड्डियों का विकास बहुत तेजी से होता है, इसलिए इस शुरुआती दौर में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम और प्रोटीन का सेवन करना बेहद जरूरी माना जाता है। इस उम्र में बच्चों को उनकी उम्र के मुताबिक संतुलित आहार के साथ दूध जरूर दिया जाना चाहिए। हालांकि, यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि एक साल से कम उम्र के शिशुओं को गाय या भैंस का दूध सीधे तौर पर पिलाने से बचना चाहिए। शिशुओं के लिए इस शुरुआती अवस्था में केवल मां का दूध या फिर डॉक्टर की सलाह से फॉर्मूला मिल्क ही सबसे अच्छा विकल्प होता है।
वयस्कों और बुजुर्गों के लिए दूध का महत्व
जैसे-जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती है, क्या उसके लिए दूध का सेवन जारी रखना फायदेमंद रहता है, यह सवाल कई लोगों के मन में आता है। वयस्कों और बुजुर्गों के लिए भी दूध बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर में हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। ऐसे में शरीर में कैल्शियम और प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा को बनाए रखना बहुत जरूरी हो जाता है ताकि हड्डियों की सेहत दुरुस्त रहे। हालांकि, केवल दूध पीते रहने मात्र से हड्डियों से जुड़ी सभी प्रकार की समस्याओं से पूरी तरह बचाव नहीं किया जा सकता है। इसके लिए दूध के साथ-साथ विटामिन डी की सही मात्रा, नियमित रूप से व्यायाम करना, धूप में उचित समय बिताना और एक संतुलित जीवनशैली तथा खानपान अपनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
किन लोगों को दूध से बनाना चाहिए दूरी
हर किसी का पाचन तंत्र एक जैसा नहीं होता है, और यही वजह है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में लोगों को दूध पीने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। जिन लोगों को लैक्टोज इनटॉलरेंस की समस्या होती है, जिन्हें दूध से एलर्जी होती है या फिर किसी भी प्रकार की पाचन संबंधी परेशानियां बनी रहती हैं, उन्हें दूध पीने में दिक्कत आ सकती है। ऐसे विशेष मामलों में डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार लैक्टोज-फ्री दूध का सेवन किया जा सकता है या फिर अन्य कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थों को अपने दैनिक विकल्पों में शामिल किया जा सकता है ताकि शरीर को पोषण की कमी न हो।
किस उम्र तक पीना चाहिए दूध
कुल मिलाकर निष्कर्ष यही निकलता है कि दूध पीने की कोई भी निश्चित ऊपरी आयु सीमा निर्धारित नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को दूध के सेवन से किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी नहीं होती है, तो वह अपनी पोषण संबंधी दैनिक जरूरतों के हिसाब से जीवन भर इसका सेवन जारी रख सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दूध को हमेशा एक संतुलित आहार का एक अहम हिस्सा बनाया जाए और अपनी उम्र, स्वास्थ्य की स्थिति के साथ-साथ व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसकी सही मात्रा का चुनाव किया जाए।





















