सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल से मिली राहत, विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने दी जमानतअमित शाह ने पुलिस स्मृति दिवस पर किया प्रोजेक्ट कर्मवीर का ऐलान, देश भर के वीरों को दी गई श्रद्धांजलिहैदराबाद के चौहत्तर साल के भद्रन्ना ने पसीने की मेहनत से पेश की अनूठी मिसालमिथिलांचल की खास स्टाइल में ऐसे बनाएं देसी मटन, खड़े मसाले का यह तरीका बढ़ा देगा स्वादडोनाल्ड ट्रंप ने की यूके में तेल ड्रिलिंग की तारीफ, विंड टर्बाइन हटाने की दी सलाहकोलकाता भगदड़ की होगी न्यायिक जांच, कलकत्ता हाई कोर्ट की रिटायर्ड जज करेंगी एसआईटी की अगुवाईप्रतापगढ़ में हिस्ट्रीशीटर के फार्म हाउस पर पुलिस और डीएसटी की रेड, पेड़ के नीचे से मिले 90 कारतूस और बेटा गिरफ्तारवाराणसी के आसमान में गरजेंगे भारतीय वायु सेना के 100 विमान, विंग्स ओवर गंगा एयर शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे शामिलशुभदीप सिंह सिद्धू के मंच पर गनशॉट इशारों पर गरमाई सियासत, बाल अधिकारों के संगठन ने की हस्तक्षेप की मांगवजन बढ़ने के पीछे सिर्फ चर्बी नहीं बल्कि वॉटर वेट भी है जिम्मेदार, जानिए इसे काबू करने के असरदार उपाय
उत्तराखंड के पहाड़ों में मिलने वाली अनोखी सब्जी इस्कोश सेहत के लिए क्यों मानी जाती है बेहद गुणकारीस्वास्थ्य
21 अक्तू॰ 2026, 4:00 pm (3 घंटे पहले)· 1

उत्तराखंड के पहाड़ों में मिलने वाली अनोखी सब्जी इस्कोश सेहत के लिए क्यों मानी जाती है बेहद गुणकारी

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में उगने वाली इस्कोश अपने रसीले स्वाद और भरपूर पोषक तत्वों के लिए पहचानी जाती है। फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट से युक्त यह सब्जी पाचन सुधारने, वजन साधने और त्वचा को स्वस्थ रखने में मददगार साबित होती है।

उत्तराखंड की हसीन वादियों में उगने वाली देसी हरी सब्जियों की अपनी एक अलग पहचान और पोषण क्षमता है। इन्हीं में से एक बेहद लोकप्रिय वनस्पति है इस्कोश, जिसे स्थानीय बोली में लोग इस्कुस अथवा छयोते के नाम से भी पुकारते हैं। अंग्रेजी में इस सब्जी को चायोटे (Chayote) कहा जाता है, जबकि देश के कई दूसरे हिस्सों में लोग इसे चौ-चौ (Chow Chow) के नाम से पहचानते हैं। वनस्पति विज्ञान की दुनिया में इसका औपचारिक वैज्ञानिक नाम सेचियम एडुल (Sechium edule) दर्ज है। हरे रंग और पतले व हल्के छिलके वाली यह सब्जी पहाड़ी खान-पान की परंपरा का एक बेहद स्वादिष्ट और गुणकारी हिस्सा मानी जाती है। इसके भीतर प्रचुर मात्रा में फाइबर, विटामिन सी, पोटैशियम और कई आवश्यक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित खान-पान में इसके समावेश से पाचन तंत्र सुदृढ़ रहता है, अनियंत्रित वजन पर अंकुश लगाने में सहायता मिलती है और रक्तचाप का संतुलन साधने में अनुकूल परिणाम देखे जा सकते हैं।

घरों की छतों और आंगनों में लहलहाने वाली बेल

पहाड़ी अंचलों में बसे गांवों और कस्बों में इस्कोश की खेती के लिए किसी बड़े तामझाम की दरकार नहीं होती। लोग अपने घरों के आंगन में और छतों की मुंडेरों के सहारे इसकी लताएं बड़ी सहजता से चढ़ा देते हैं। इन हरी-भरी लताओं पर लटकते फल अपने हल्के-मीठे और रसीले स्वाद के लिए हर उम्र के लोगों के बीच खूब पसंद किए जाते हैं। रसोई में इस सब्जी की विविधता देखते ही बनती है। गृहणियां इसे सादी सूखी भुजिया के रूप में तैयार करती हैं, तरीदार रसेदार व्यंजन बनाती हैं, अन्य सब्जियों के साथ मिलाकर पकाती हैं और कभी-कभी इसे स्वादिष्ट भरवां व्यंजनों तथा गरमा-गरम सूप का रूप भी दे देती हैं।

ये भी पढ़ें

कम कैलोरी और वजन नियंत्रण में कारगर पोषण

देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक सिराज सिद्दीकी के अनुसार, इस्कोश की सबसे बड़ी खूबी इसका कम कैलोरी वाला स्वरूप है। जो लोग मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं या अपने शरीर के बढ़ते भार को नियंत्रित रखना चाहते हैं, उनके लिए यह एक मुफीद विकल्प साबित होती है। इस सब्जी में पाया जाने वाला प्रचुर डाइटरी फाइबर पेट में पहुंचकर लंबे समय तक तृप्ति का एहसास बनाए रखता है। जब पेट देर तक भरा रहता है, तो बेवजह बार-बार कुछ तला-भुना खाने की तलब शांत रहती है, जिससे शरीर में अतिरिक्त वसा जमा होने का जोखिम घट जाता है। कम कैलोरी के साथ उच्च पोषक तत्वों का यह अनूठा मेल ही इसे पारंपरिक भोजन शैली का अनिवार्य अंग बनाता है।

रक्तचाप संतुलन और हृदय की सुरक्षा

आधुनिक जीवनशैली में रक्तचाप में उतार-चढ़ाव एक सामान्य किंतु गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। इस्कोश में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पोटैशियम शरीर के भीतर सोडियम के प्रतिकूल प्रभावों को संतुलित करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाता है। आहार में पोटैशियम की संतुलित मात्रा रक्त धमनियों की दीवारों को तनावमुक्त रखने में सहायक मानी जाती है, जिससे ब्लड प्रेशर सामान्य सीमा के भीतर बना रहता है। इस तरह यह हृदय प्रणाली को अतिरिक्त दबाव से बचाने में स्वाभाविक रूप से योगदान देती है।

डायबिटीज प्रबंधन और रक्त शर्करा का संतुलन

मधुमेह के रोगियों को अपने दैनिक भोजन में ग्लाइसेमिक प्रभाव और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पर विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है। डॉ. सिराज सिद्दीकी बताते हैं कि इस्कोश एक कम कैलोरी वाली सब्जी है, जिसे डायबिटीज से जूझ रहे व्यक्ति भी अपनी संतुलित थाली का हिस्सा सहजता से बना सकते हैं। इसके भीतर मौजूद घुलनशील और अघुलनशील फाइबर पाचन क्रिया को धीमा करके कार्बोहाइड्रेट के अचानक अवशोषण को रोकने में मदद करते हैं। इस प्रक्रिया से भोजन के तुरंत बाद खून में ग्लूकोज के स्तर में आने वाले अचानक उछाल को नियंत्रित रखने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, किसी भी गंभीर विकार के स्थायी उपचार के लिए केवल इस सब्जी पर निर्भर रहने के बजाय संपूर्ण चिकित्सकीय परामर्श का पालन करना ही उचित दृष्टिकोण है।

त्वचा की चमक और कोशिकाओं का संरक्षण

उम्र के असर और पर्यावरणीय प्रदूषण से हमारी त्वचा की कोशिकाएं लगातार प्रभावित होती रहती हैं। इस्कोश में पाए जाने वाले ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं। यह क्रिया त्वचा के आंतरिक ऊतकों को क्षतिग्रस्त होने से बचाती है, जिससे चेहरे पर असमय झुर्रियों और ढीलेपन को थामने में मदद मिल सकती है। प्राकृतिक रूप से त्वचा की ताजगी और जवां रंगत बनाए रखने की चाह रखने वालों के लिए यह एक पौष्टिक आहार सिद्ध हो सकती है।

गर्भावस्था में पोषण संबंधी आवश्यकताएं

गर्भावस्था के नाज़ुक दौर में महिला के शरीर को न केवल अपनी ऊर्जा बल्कि गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए भी विविध माइक्रोन्यूट्रीएंट्स की दरकार होती है। इस्कोश में उपस्थित विभिन्न विटामिन और खनिज शरीर की इन बुनियादी पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में उपयोगी योगदान दे सकते हैं। हालांकि, गर्भधारण के समय प्रत्येक महिला की शारीरिक स्थिति और पोषण जरूरतें पूरी तरह भिन्न होती हैं, इसलिए इस दौरान इसे खान-पान में शामिल करने का स्तर और लाभ संबंधित व्यक्ति की समग्र आहार योजना पर ही निर्भर करता है।

रसोई में बहुमुखी उपयोग और सलाद के तौर पर सेवन

यह पहाड़ी सब्जी अपनी उच्च जल सामग्री और बेहद सौम्य स्वाद की वजह से हर प्रकार की पाक शैली में ढल जाती है। पहाड़ी घरों में लोग इसे आलू के साथ भुजिया बनाकर या मसालों से भरपूर रसेदार तरी के साथ खाना पसंद करते हैं। बुजुर्गों अथवा गरिष्ठ भोजन से परहेज करने वाले लोगों के लिए इसे बहुत कम तेल और हल्के मसालों में पकाकर एक सुपाच्य आहार तैयार किया जा सकता है। सब्जी के अतिरिक्त, कई लोग इसकी ताजगी का आनंद लेने के लिए इसे बारीक काटकर कच्चे सलाद के रूप में भी चाव से खाते हैं। पारंपरिक खेती की यह पहाड़ी धरोहर अब मैदानी और शहरी इलाकों के जागरूक उपभोक्ताओं के बीच भी अपनी पौष्टिकता के दम पर तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

सवाल-जवाब

इस्कोश सब्जी को अन्य किन नामों से जाना जाता है?
इसे स्थानीय स्तर पर इस्कुस या छयोते, अंग्रेजी में चायोटे और भारत के अन्य भागों में चौ-चौ के नाम से जाना जाता है।
इस्कोश का वैज्ञानिक नाम क्या है?
इस पौष्टिक सब्जी का औपचारिक वैज्ञानिक नाम सेचियम एडुल (Sechium edule) है।
इस्कोश में मुख्य रूप से कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?
इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर, विटामिन सी, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं।
यह सब्जी वजन कम करने में किस प्रकार मददगार है?
कम कैलोरी और उच्च फाइबर से युक्त होने के कारण यह पेट को लंबे समय तक भरा रखती है, जिससे वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
क्या डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीज इसे खा सकते हैं?
हां, इसका फाइबर ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में और पोटैशियम ब्लड प्रेशर संतुलित रखने में सहायक माना जाता है।
पहाड़ी घरों में इस्कोश को किस तरह पकाया और खाया जाता है?
इसे सूखी भुजिया, तरीदार रसेदार सब्जी, भरवां व्यंजन, पौष्टिक सूप और कच्चे सलाद के रूप में खाया जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp