भारतीय खानपान में नमक के बिना भोजन का स्वाद अधूरा माना जाता है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले इसी नमक में आयोडीन पाया जाता है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है। हालांकि, कई तरह के नमक में इस पोषक तत्व की मात्रा काफी कम पाई जाती है। आयोडीन एक ऐसा सूक्ष्म पोषक तत्व है, जिसकी शरीर में कमी होने पर कई तरह की गंभीर बीमारियां घेर सकती हैं। इसका सीधा असर गले में स्थित थायरॉइड ग्रंथि के कामकाज के साथ-साथ छोटे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी पड़ता है। इसी महत्वपूर्ण विषय पर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को विश्व आयोडीन अल्पता दिवस मनाया जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अलग-अलग उम्र और शारीरिक अवस्था के हिसाब से आयोडीन की जरूरत भी अलग होती है। सामान्य वयस्कों को प्रतिदिन लगभग 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की आवश्यकता होती है। वहीं, गर्भधारण कर चुकी महिलाओं को 220 माइक्रोग्राम और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को 290 माइक्रोग्राम आयोडीन की जरूरत पड़ती है। इस तत्व की कमी से बचने के लिए अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए और हमेशा आयोडीन युक्त नमक का ही चयन करना चाहिए। आइए विस्तार से जानते हैं कि शरीर में आयोडीन की कमी होने पर किस तरह की परेशानियां पैदा हो सकती हैं और इनसे किस प्रकार बचा जा सकता है।
शरीर के लिए क्यों जरूरी है आयोडीन
मानव शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए आयोडीन एक बहुत ही आवश्यक पोषक तत्व माना गया है। यह हमारी गर्दन में मौजूद थायरॉइड ग्रंथि को आवश्यक हार्मोन तैयार करने में सहायता करता है। यही हार्मोन हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म यानी चयापचय, शारीरिक तापमान और सामान्य विकास को नियंत्रित करने का काम करते हैं। यदि शरीर में इस जरूरी तत्व की कमी हो जाए, तो थायरॉइड हार्मोन के निर्माण में बाधा उत्पन्न होने लगती है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को लगातार थकान, सुस्ती, बिना वजह वजन बढ़ना और सामान्य से अधिक ठंड महसूस होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
आयोडीन की कमी से होने वाली प्रमुख समस्याएं
शरीर में इस पोषक तत्व की भारी कमी होने पर कई तरह के स्वास्थ्य विकार सामने आ सकते हैं, जिनमें से कुछ मुख्य स्थितियां इस प्रकार हैं
- घेंघा रोग: पर्याप्त मात्रा में आयोडीन न मिलने पर थायरॉइड ग्रंथि का आकार असामान्य रूप से बढ़ने लगता है, जिसके कारण गर्दन के अगले हिस्से में सूजन साफ नजर आने लगती है और इस चिकित्सीय स्थिति को घेंघा कहा जाता है।
- थायरॉइड असंतुलन: शरीर को जरूरी मात्रा में आयोडीन न मिलने पर थायरॉइड ग्रंथि अपने दायित्वों को ठीक से पूरा नहीं कर पाती है, जिससे हाइपोथायरायडिज्म जैसी परेशानियां पैदा हो सकती हैं।
- बच्चों का विकास: कम उम्र के बच्चों के मस्तिष्क और संपूर्ण शारीरिक विकास के लिए यह तत्व बेहद अहम है, और इसकी गंभीर कमी से उनकी सीखने-समझने की क्षमता तथा मानसिक विकास बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
- गर्भावस्था के दौरान जोखिम: गर्भधारण करने वाली महिलाओं के लिए इसकी मौजूदगी अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इसकी कमी गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास को भारी नुकसान पहुंचा सकती है तथा कई मामलों में जटिलताओं का खतरा बढ़ा देती है।
आयोडीन की कमी से बचाव के आसान उपाय
दैनिक जीवन में कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर इस पोषक तत्व की कमी से आसानी से बचा जा सकता है। बाजार से नमक खरीदते वक्त उसके पैकेट पर छपी जानकारी को अवश्य जांच लें। नमक को नमी और तेज गर्मी के संपर्क से बचाने के लिए हमेशा एक बंद डिब्बे में ही स्टोर करके रखें। हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि शरीर की जरूरत पूरी करने के लिए बहुत अधिक मात्रा में नमक का सेवन किया जाए। जरूरत से ज्यादा नमक खाने से उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। नमक के अलावा दूध, दही, अंडे और कुछ चुनिंदा समुद्री खाद्य पदार्थों से भी पर्याप्त आयोडीन प्राप्त किया जा सकता है। इसके साथ ही एक संतुलित आहार लेना भी बहुत जरूरी है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आवश्यकता से अधिक आयोडीन का सेवन भी शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए चिकित्सक की उचित सलाह के बिना कभी भी इसके सप्लीमेंट्स का सेवन नहीं करना चाहिए।


















