अमेठी जिले में गंभीर गुर्दा रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। जिला अस्पताल के अलावा अब ग्रामीण व तहसील स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में भी मुफ्त डायलिसिस सेवा उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से स्थानीय मरीजों को अपनी नियमित डायलिसिस प्रक्रिया के लिए दूरदराज के बड़े शहरों की दौड़ लगाने से बड़ी राहत मिलेगी।
तहसील स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों में बढ़ेंगी सुविधाएं
वर्तमान समय में जिला अस्पताल में 8 बेड की डायलिसिस सेवा संचालित की जा रही है, जहां मरीजों का इलाज होता है। हालांकि, जिले की बड़ी आबादी और बढ़ती जरूरतों को देखते हुए तीन नए सीएचसी केंद्रों पर यह सुविधा शुरू करने की तैयारी की गई है। इसके तहत मुसाफिरखाना तहसील के जगदीशपुर, तिलोई तहसील के फुरसतगंज और अमेठी तहसील के अमेठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का चयन किया गया है।
इन तीनों स्वास्थ्य केंद्रों में तीन-तीन बेड स्थापित किए जाएंगे, जिससे जिले में कुल 9 अतिरिक्त डायलिसिस बेड तैयार हो जाएंगे। प्रत्येक केंद्र पर तीन बेड उपलब्ध होने से आसपास के गांवों और कस्बों के मरीजों को उनके घर के निकट ही समय पर इलाज मिल सकेगा, जिससे उन्हें लंबी यात्रा की थकान और असुविधा नहीं झेलनी पड़ेगी।
महंगे निजी इलाज से मिलेगी राहत
निजी अस्पतालों में डायलिसिस कराना आम मरीजों के लिए बेहद खर्चीला साबित होता है। आंकड़ों के अनुसार, प्राइवेट अस्पतालों में प्रति माह डायलिसिस का खर्च 18 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक आ जाता है। इसके अलावा मरीजों व उनके परिजनों को कई अन्य परेशानियों और अनिश्चितताओं से भी जूझना पड़ता है। सरकारी स्तर पर सीएचसी में मुफ्त सुविधा मिलने से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर वित्तीय बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा।
अब तक बेहतर चिकित्सा सहायता और नियमित डायलिसिस के लिए मरीजों को मजबूरन लखनऊ, प्रयागराज और सुल्तानपुर जैसे बड़े शहरों के अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती थी। दूर के शहरों में जाने से न केवल मरीजों का समय और किराया खर्च होता था, बल्कि आपात स्थिति में यात्रा जोखिम भरी भी साबित होती थी। सीएचसी पर यह सेवा चालू होने से यह परेशानी हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।
प्रशासनिक मंजूरी का इंतजार
इस नई स्वास्थ्य व्यवस्था के संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि शासन को इस संबंध में प्रस्ताव भेज दिया गया है और जल्द ही आधिकारिक मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। उन्होंने कहा, "यह एक बहुत ही बेहतर व्यवस्था है, जिससे मरीजों को डायलिसिस के लिए लखनऊ, प्रयागराज या सुल्तानपुर जाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।" मंजूरी मिलते ही तीनों केंद्रों पर आवश्यक उपकरणों की स्थापना और संचालन का कार्य तेजी से पूरा किया जाएगा।



















