जीवन बचाने की दिशा में अंगदान को अत्यंत महान कार्य माना जाता है, लेकिन इससे जुड़ी अनेक भ्रांतियां आज भी समाज में फैली हुई हैं। आम तौर पर लोग यह मानते हैं कि केवल वही व्यक्ति अंग दान कर सकता है जो पूरी तरह से स्वस्थ हो और जिसे कोई बीमारी न हो। इस धारणा के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा या अन्य पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे लोग खुद को अंगदान के अयोग्य मान लेते हैं। हालांकि, चिकित्सा विज्ञान के अनुसार यह सोच सही नहीं है और पुरानी बीमारियों से ग्रस्त व्यक्ति भी अंगदाता बन सकता है।
अंग की सेहत और उपयोगिता सबसे महत्वपूर्ण
गाजियाबाद स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में लिवर ट्रांसप्लांट और बिलियरी साइंसेज, रोबोटिक सर्जरी तथा पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट के डायरेक्टर डॉ. राजेश डे के अनुसार, अंगदान की प्रक्रिया में मुख्य ध्यान इस बात पर होता है कि दान किया जाने वाला विशेष अंग कितना स्वस्थ है। उन्होंने स्पष्ट किया, "किसी व्यक्ति को कोई बीमारी होने का मतलब यह नहीं है कि उसके सभी अंग ट्रांसप्लांट के लिए खराब हैं।" डॉक्टर यह देखते हैं कि संबंधित अंग की कार्यक्षमता ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त है या नहीं।
डायबिटीज और हाई बीपी में अंगदान की संभावनाएं
उच्च रक्तचाप और डायबिटीज के मरीजों के मामले में भी अंगदान की संभावनाएं बनी रहती हैं। यदि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर दवाओं या जीवनशैली के माध्यम से नियंत्रण में है और उससे शरीर के मुख्य अंगों को गंभीर क्षति नहीं पहुंची है, तो ऐसे मरीज के कुछ अंग दान किए जा सकते हैं। ठीक इसी तरह, मधुमेह से पीड़ित मरीजों में भी यह देखा जाता है कि बीमारी का प्रभाव कितना गहरा है। यदि डायबिटीज के कारण विशिष्ट अंगों या ऊतकों को नुकसान नहीं पहुंचा है, तो वे भी अंग या टिश्यू दान करने के लिए योग्य ठहराए जा सकते हैं।
योग्यता निर्धारण की चिकित्सीय प्रक्रिया
अंगदान की स्वीकृति देने से पहले डॉक्टरों की एक पूरी मेडिकल टीम संभावित डोनर की संपूर्ण मेडिकल हिस्ट्री की गहनता से समीक्षा करती है। इस दौरान मरीज के कई तरह के लैबोरेटरी और इमेजिंग टेस्ट किए जाते हैं। प्रत्येक अंग की स्थिति का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह अंग प्राप्तकर्ता के शरीर में सुरक्षित रूप से काम कर सकेगा।
कुछ विशेष चिकित्सीय स्थितियां ऐसी होती हैं जिनमें अंगदान की अनुमति नहीं दी जाती है। यदि डोनर के शरीर में कोई सक्रिय संक्रमण हो, किसी प्रकार का कैंसर हो या किसी खास अंग की गंभीर बीमारी हो, तो वह अंग ट्रांसप्लांट के लिए अनुपयुक्त मान लिया जाता है। इसके बावजूद, किसी एक अंग के अयोग्य होने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं होता कि मरीज के बाकी अंग या ऊतक भी बेकार हैं। हर फैसला स्थापित मेडिकल प्रोटोकॉल और मरीज की सुरक्षा के आधार पर ही लिया जाता है।
जीवित और मृत डोनर के नियमों में अंतर
जीवित व्यक्ति द्वारा किए जाने वाले अंगदान के मामले में चिकित्सा दल अत्यधिक सतर्कता बरतता है। जब कोई जीवित व्यक्ति अपनी एक किडनी या लिवर का एक हिस्सा दान करता है, तो डॉक्टर सबसे पहले यह सुनिश्चित करते हैं कि इस प्रक्रिया से डोनर की खुद की सेहत पर कोई बुरा असर न पड़े। यदि डोनर को पहले से कोई बीमारी है, तो उसकी अतिरिक्त जांच की जाती है ताकि भविष्य में उसे कोई खतरा न हो। वहीं मृत डोनर के मामले में अंगों की कार्यक्षमता जांचने के बाद ही ट्रांसप्लांट का निर्णय लिया जाता है।



















