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नीले अपराजिता के फूलों की चाय पीने के हैरान करने वाले फायदे और बनाने की सही विधिस्वास्थ्य
25 अग॰ 2026, 10:12 am (1 घंटे पहले)· 2

नीले अपराजिता के फूलों की चाय पीने के हैरान करने वाले फायदे और बनाने की सही विधि

फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉक्टर चेतन शर्मा के अनुसार, अपराजिता के नीले फूलों से बनने वाली चाय दिमाग को शांत रखने, स्ट्रेस कम करने और शरीर को ठंडक देने में बेहद फायदेमंद हो सकती है।

नीले रंग के खूबसूरत और छोटे दिखने वाले अपराजिता के फूल सिर्फ घरों की शोभा बढ़ाने के काम ही नहीं आते, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी इनका विशेष महत्व है। आजकल लोग अपनी सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए तरह-तरह की हर्बल ड्रिंक्स का रुख कर रहे हैं, जिनमें अपराजिता के फूलों की चाय काफी लोकप्रिय हो रही है। खासकर बुजुर्गों के बीच इस नीली चाय को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है। तो आइए जानते हैं कि इस खास चाय को घर पर कैसे तैयार किया जाता है और इसके सेवन से हमारे शरीर को क्या-क्या स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।

दिमाग की कार्यक्षमता और मानसिक शांति के लिए गुणकारी

फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉक्टर चेतन शर्मा के अनुसार, आयुर्वेद में अपराजिता के फूलों से तैयार होने वाली चाय को बौद्धिक क्षमता और मानसिक बल बढ़ाने वाला माना गया है। आधुनिक जीवनशैली में लोग हर समय तनाव के साए में जीते हैं और उन्हें अत्यधिक मानसिक श्रम करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में अपराजिता का सेवन मन को स्थिर रखने और शांत करने में प्रभावी साबित हो सकता है। इससे दिनभर की मानसिक और शारीरिक थकान में कमी आ सकती है और शरीर भीतर से एक नई ऊर्जा का अनुभव कर सकता है।

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चिंता और मानसिक तनाव से राहत दिलाने में सहायक

डॉक्टर चेतन शर्मा बताते हैं कि जिन लोगों को जरूरत से ज्यादा स्ट्रेस रहता है या जो अक्सर घबराहट और एंग्जायटी जैसी समस्याओं से जूझते हैं, उनके लिए यह नीली चाय काफी उपयोगी साबित हो सकती है। यह दिमाग की तंत्रिकाओं को शांत करने में मदद करती है और मानसिक सुस्ती व थकान को दूर भगाने में मददगार मानी जाती है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी भी तरह की गंभीर मानसिक समस्या होने पर केवल इस चाय के भरोसे नहीं रहना चाहिए और समय पर योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

अपराजिता के फूलों की चाय तैयार करने की आसान विधि

डॉक्टर चेतन शर्मा के मुताबिक, इस अनोखी चाय को बनाना बेहद सरल और झटपट प्रक्रिया है। इसे बनाने के लिए एक गिलास साफ पानी लें और उसमें दो से तीन ताजे अपराजिता के फूल डाल दें। अब इस मिश्रण को अच्छी तरह से उबालें। जब उबलते-उबलते पानी की मात्रा लगभग आधी रह जाए यानी करीब आधा कप बचे, तो इसे आंच से उतारकर छान लें। अब आपकी हर्बल चाय तैयार है और इसे सामान्य चाय की तरह चुस्की लेकर पिया जा सकता है। डॉक्टर चेतन शर्मा सलाह देते हैं कि इस चाय का असली लाभ पाने के लिए इसमें किसी भी तरह की मिलावट से बचना चाहिए ताकि फूलों के प्राकृतिक पोषक तत्व बरकरार रहें। अगर स्वाद के लिए बहुत ज्यादा जरूरत महसूस हो, तो इसमें हल्की सी मिठास जोड़ी जा सकती है।

शरीर के तापमान को नियंत्रित और शांत रखने में मददगार

डॉक्टर चेतन शर्मा का कहना है कि अपराजिता के फूलों की चाय तासीर में शरीर को ठंडक देने वाली होती है। प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे पित्त दोष को शांत करने वाला भी बताया गया है। इसके अलावा, यह मस्तिष्क को तरोताजा और सक्रिय बनाए रखने में भी सहायता कर सकती है। खासकर उन लोगों के लिए यह ड्रिंक बेहद उपयोगी मानी जाती है जिनका कार्यक्षेत्र पूरी तरह से बौद्धिक गतिविधियों और लगातार दिमागी काम से जुड़ा होता है।

बरसात के मौसम में भी किया जा सकता है सेवन

डॉक्टर चेतन शर्मा यह भी स्पष्ट करते हैं कि अपराजिता के फूलों की चाय का आनंद साल के किसी भी मौसम में लिया जा सकता है। मानसून या बरसात के दिनों में जब नमी के कारण बहुत से लोगों को बालों के टूटने और झड़ने की समस्या काफी बढ़ जाती है, तब लोग इस चाय के सेवन को लेकर खासी रुचि दिखाते हैं। हालांकि, बालों के झड़ने के पीछे कई आंतरिक और बाहरी कारण हो सकते हैं, इसलिए केवल अपराजिता की चाय को ही बालों की समस्या का पक्का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

बुजुर्गों के लिए उपयोगी, लेकिन बरती जानी चाहिए सावधानी

डॉक्टर चेतन शर्मा बताते हैं कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी यह हर्बल ड्रिंक फायदेमंद साबित हो सकती है, विशेषकर तब जब उन्हें उम्र के कारण मानसिक थकान या तनाव महसूस होता हो। लेकिन किसी भी प्रकार की जड़ी-बूटी या हर्बल चाय को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने से पहले अपनी आयु, मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति और चल रही अन्य दवाइयों का पूरा ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। इसलिए यदि बुजुर्ग किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और नियमित रूप से दवाएं ले रहे हैं, तो उन्हें डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही इसका सेवन शुरू करना चाहिए।

आकर्षक रंग और प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर

डॉक्टर चेतन शर्मा बताते हैं कि अपराजिता का पौधा और उसके फूल आकार में छोटे होते हैं, लेकिन इनकी खूबसूरती देखते ही बनती है। इनके गहरे नीले रंग के कारण जब इनसे चाय तैयार की जाती है, तो इसका रंग भी बेहद अनोखा और अलग नजर आता है। जैसे ही आप इन्हें पानी में उबालते हैं, पानी का रंग पूरी तरह बदल जाता है। यही कारण है कि आज के समय में लोग इस प्राकृतिक और रंग-बिरंगी चाय के प्रति खासे आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि, इसके मिलने वाले फायदे पूरी तरह से व्यक्ति विशेष की शारीरिक स्थिति और इसे बनाने व पीने के तरीके पर निर्भर करते हैं।

सवाल-जवाब

अपराजिता के फूलों की चाय कैसे बनाई जाती है?
एक गिलास पानी में दो से तीन ताजे अपराजिता के फूल डालकर तब तक उबालें जब तक पानी आधा कप न रह जाए, फिर इसे छानकर पिएं।
अपराजिता की चाय पीने के मुख्य फायदे क्या हैं?
यह चाय दिमाग को शांत रखने, मानसिक थकान कम करने, स्ट्रेस और चिंता से राहत दिलाने तथा शरीर को ठंडक देने में मददगार मानी जाती है।
क्या बुजुर्ग भी अपराजिता की चाय पी सकते हैं?
हां, बुजुर्ग इसका सेवन कर सकते हैं, लेकिन यदि वे किसी बीमारी की दवा ले रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका नियमित सेवन शुरू करें।
क्या बरसात के मौसम में अपराजिता की चाय पी जा सकती है?
हां, अपराजिता के फूलों की चाय का सेवन किसी भी मौसम में किया जा सकता है।
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