बढ़ती उम्र के बच्चों में नींद के दौरान अनजाने में बिस्तर गीला करने की समस्या अक्सर माता-पिता के लिए भारी मानसिक तनाव और चिंता की वजह बन जाती है. डॉक्टरी परामर्श में इसे कोई गंभीर शारीरिक बीमारी नहीं माना जाता, लेकिन इसके चलते बच्चों के आत्मसम्मान और मनोबल पर गहरा नकारात्मक असर पड़ता है. इस परेशानी से जूझ रहे परिवारों के लिए एक नया क्लीनिकल अध्ययन राहत भरी उम्मीद लेकर आया है. शोध के नतीजे बताते हैं कि पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों के साथ अगर दैनिक जीवन में कुछ आसान योगासनों को जोड़ दिया जाए, तो बच्चों की इस आदत को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
जामनगर के आयुर्वेद संस्थान में हुआ क्लीनिकल ट्रायल
गुजरात के जामनगर स्थित आयुष मंत्रालय के अधीन कार्यरत इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद (आईटीआरए) के कौमारभृत्य यानी बाल रोग विभाग में यह अध्ययन पूरा किया गया. शोधकर्ताओं ने 6 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के 38 बच्चों को इस परीक्षण में शामिल किया. पूरे आठ सप्ताह यानी दो महीने तक चले इस वैज्ञानिक अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि शय्यामूत्र की इस जटिल स्थिति में केवल दवा देने के मुकाबले दवा और योग का संयुक्त तरीका कितना कारगर साबित होता है. इस शोध के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका आयु (AYU) में प्रकाशित किए गए हैं, जिसे प्रोफेसर वैद्य वीरेंद्र कोरी, वैद्य सागर भिंडे और वैद्य अमीषा बावर्वा ने तैयार किया था.
परीक्षण के लिए बनाए गए थे दो अलग समूह
आईटीआरए की निदेशक प्रोफेसर तनुजा नेसरी के अनुसार, अध्ययन की निष्पक्षता और सटीकता जांचने के लिए बच्चों को दो अलग-अलग वर्गों में बांटा गया था. पहले समूह के बच्चों को केवल पारंपरिक हर्बल मिश्रण दिया गया. इस समूह को ब्राह्मी, शंखपुष्पी, मुलेठी और गिलोय को मिलाकर तैयार किया गया मेध्य रसायन चूर्ण दिन में दो बार दूध के साथ पीने की सलाह दी गई थी.
वहीं, दूसरे समूह के बच्चों को इसी मेध्य रसायन चूर्ण के साथ नियमित रूप से सुबह और शाम चार विशेष योगासनों का अभ्यास कराया गया. इन चार आसनों में उत्कटासन, अर्ध-शलभासन, भुजंगासन और शवासन शामिल थे. दोनों समूहों पर आठ सप्ताह तक लगातार नजर रखी गई और उनकी आदतों में आने वाले बदलावों का विस्तृत रिकॉर्ड दर्ज किया गया.
दवा के साथ योग करने वाले बच्चों में दिखा 70 प्रतिशत सुधार
दो महीने के परीक्षण के बाद सामने आए परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे. जिन बच्चों को केवल मेध्य रसायन चूर्ण दिया गया था, उनमें बिस्तर गीला करने की आदत में लगभग 38 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. इसके विपरीत, जिन बच्चों ने औषधि के साथ-साथ रोजाना चारों योगासन किए, उनमें इस समस्या में 70 प्रतिशत तक की जबर्दस्त गिरावट देखी गई. आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि केवल दवा के मुकाबले शारीरिक आसनों का साथ मिलने से सुधार की गति लगभग दोगुनी हो गई.
स्मरणशक्ति और एकाग्रता में भी दर्ज हुआ भारी इजाफा
इस संयुक्त उपचार पद्धति के प्रभाव केवल रात में पेशाब रोकने तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि बच्चों के मानसिक और संज्ञानात्मक विकास में भी उल्लेखनीय प्रगति पाई गई. केवल औषधि लेने वाले पहले समूह के बच्चों की स्मरणशक्ति में जहां 31 प्रतिशत सुधार हुआ, वहीं योग और औषधि दोनों अपनाने वाले बच्चों की याददाश्त में 61 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी आंकी गई. इसके अलावा, अत्यधिक चंचलता या हाइपरएक्टिविटी की प्रवृत्ति में करीब 71 प्रतिशत की कमी आई, जिससे बच्चों का ध्यान अपनी पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों में बेहतर तरीके से केंद्रित होने लगा.
हीनभावना और चिड़चिड़ेपन से मिली मुक्ति
नींद में बिस्तर गीला हो जाने की वजह से बच्चे अक्सर शर्मिंदगी और हीनभावना के शिकार हो जाते हैं. घर के सदस्यों या साथियों के ताने उनके भीतर गुस्सा और चिड़चिड़ापन भर देते हैं. इस अध्ययन में पाया गया कि शारीरिक नियंत्रण सुधरने से बच्चों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आए और उनके चिड़चिड़ेपन में 66 प्रतिशत तक की कमी देखी गई. जब बच्चों का अपने शरीर पर भरोसा बहाल हुआ, तो उनका खोया हुआ आत्मविश्वास भी वापस लौट आया.
शरीर और दिमाग पर इस तरह काम करता है यह उपाय
प्रोफेसर तनुजा नेसरी ने समझाया कि सोते समय पेशाब पर नियंत्रण न रह पाने के पीछे मुख्य रूप से पेल्विक फ्लोर यानी श्रोणि क्षेत्र की कमजोर मांसपेशियां, मूत्राशय पर अपर्याप्त नियंत्रण और मानसिक तनाव जिम्मेदार होते हैं. उत्कटासन और भुजंगासन जैसे अभ्यास पेल्विक हिस्से और मूत्राशय की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करते हैं, जिससे यूरिन होल्ड करने की शारीरिक क्षमता बढ़ती है. दूसरी तरफ, मिश्रण में मौजूद ब्राह्मी और शंखपुष्पी तंत्रिका तंत्र को शांति प्रदान करते हैं, जिससे गहरी नींद और मूत्राशय के संकेतों के बीच तंत्रिका समन्वय बेहतर ढंग से स्थापित हो पाता है. इस तरह आयुर्वेद और योग मिलकर बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को एक साथ संतुलित करते हैं.



















