सर्दियों के आगमन के साथ ही हरी और ताजी सब्जियों की मांग घरों में काफी बढ़ जाती है। यदि आप भी ठंड के दिनों में मेथी के गरमा-गरम पराठे, लजीज पुलाव और स्वादिष्ट सब्जियां पसंद करते हैं, तो इन्हें बाजार से बार-बार खरीदने के बजाय घर पर ही आसानी से तैयार किया जा सकता है। बालकनी या छत पर रखे साधारण गमलों में सही तकनीक अपनाकर आप बिना किसी रासायनिक खाद के शुद्ध सब्जियां उगा सकते हैं। घर पर सब्जियां लगाने से न केवल पैसों की बचत होती है बल्कि सेहत के लिए जरूरी पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में मिलते हैं।
मेथी उगाने की सरल तकनीक
सर्दियों में मेथी की पत्तियों का उपयोग रसोई में लगातार होता है। इसे उगाने के लिए सूखी धनिया या साबूत मेथी के दानों का चयन किया जाता है। बुवाई से पूर्व बीजों की छंटाई करना जरूरी होता है, जिसमें से अच्छे और स्वस्थ साबूत दानों को चुनकर लगभग 24 घंटे के लिए साफ पानी में भिगोकर रख दिया जाता है। भिगोने से बीजों के अंकुरण की प्रक्रिया काफी तेज हो जाती है और पौधे जल्दी बाहर निकलते हैं।
गमले को तैयार करने के लिए सामान्य मिट्टी, कोकोपीट और जैविक खाद का संतुलित मिश्रण बनाएं। इस मिश्रण को ड्रेनेज वाले गमले में भरें और थोड़ी-थोड़ी दूरी बनाते हुए बीजों को उंगली की मदद से हल्की गहराई में दबा दें। इसके बाद मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए रोजाना हल्के पानी का स्प्रे करें। लगभग 15 से 20 दिनों के भीतर छोटे-छोटे कोमल पौधे दिखने लगते हैं। करीब एक महीने में ये कटाई के योग्य हो जाते हैं। पत्तियों को ऊपर से काटने पर नीचे से नए कल्ले निकलते रहते हैं और पौधा निरंतर बढ़ता रहता है।
ब्रोकली की घर पर देखभाल और पैदावार
ब्रोकली को स्वास्थ्यवर्धक आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। वनस्पति विज्ञान के अनुसार यह गोभी परिवार से जुड़ी सब्जी है, लेकिन पोषण और उपयोगिता के मामले में इसे अधिक फायदेमंद माना जाता है। खुले बाजार में इसकी कीमतें अक्सर काफी ऊंची होती हैं और कई बार ताजगी व गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं मिलती। इसलिए इसे घरेलू बगीचे में उगाना एक किफायती और सुरक्षित विकल्प है।
ब्रोकली लगाने के लिए पानी निकासी की उचित व्यवस्था वाले ड्रेनेज गमले में मिट्टी, कोकोपीट और खाद मिलाकर एक अच्छा पॉट मिक्सिंग मिश्रण तैयार करें। बीजों को मिट्टी में दबाने के बाद ऊपर से मिट्टी की एक पतली परत बिछाएं और हल्का पानी छिड़क दें। शुरुआत के कुछ दिन गमले को सीधी धूप से बचाकर छांव में रखें और बाद में ऐसी जगह ले जाएं जहां रोजाना 1 से 2 घंटे की हल्की धूप मिलती हो। लगभग 10 दिनों में नन्हे पौधे अंकुरित होने लगते हैं। इसके बाद पौधों को बेहद सावधानी से अलग-अलग गमलों में स्थानांतरित कर दें। रोपाई के 15 दिनों के भीतर दोबारा खाद दें ताकि पोषण मिले, और करीब 3 महीने के भीतर ब्रोकली की पूरी फसल तैयार हो जाएगी।
चुकंदर की बुवाई और पानी का प्रबंधन
चुकंदर का नियमित सेवन रक्त निर्माण और संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य के लिए उत्तम माना जाता है। सर्दियों के मौसम में लोग इसका गरमा-गरम सूप पीना पसंद करते हैं, जबकि सलाद और जूस में भी इसे प्रमुखता से शामिल किया जाता है। यदि आप भी नियमित चुकंदर का सेवन करते हैं, तो इसे गमले में उगाना काफी आसान है।
इसके लिए नजदीकी नर्सरी से अच्छी गुणवत्ता वाले चुकंदर के बीज लाएं। गमले में उपयुक्त मिट्टी और खाद का मिश्रण भरकर बीजों को ब्रोकली के बीजों की तरह ही मिट्टी में बोएं। मिट्टी में नमी का स्तर बनाए रखने के लिए समय-समय पर पानी का छिड़काव करते रहें। लगभग 24 दिनों में बीज अंकुरित होकर बाहर आ जाते हैं। इन गमलों को ऐसी जगह रखें जहां रोजाना 4 से 5 घंटे की पर्याप्त धूप आती हो। पौधे दिखाई देने के बाद पानी देने का नियम बदलें और हफ्ते में केवल एक बार ही पानी डालें। पौधों के समुचित विकास के लिए इसमें गोबर की खाद मिलाई जा सकती है। लगभग 90 दिनों की अवधि में चुकंदर पूरी तरह बढ़कर तैयार हो जाता है।
रसोई के प्याज से उगाएं ताजा हरा प्याज
सर्दियों के खानपान में प्याज की हरी पत्तियों से बनने वाली भाजी का स्वाद बेहद खास होता है। इसके अलावा एशियाई व्यंजनों, चाइनीज डिशेज और सूप में भी हरे प्याज का व्यापक उपयोग किया जाता है। इसे बाजार से खरीदने के बजाय रसोई में मौजूद सामान्य प्याज की मदद से ही उगाया जा सकता है। इसके लिए घर में रखी प्याज की टोकरी में से 5 बेहतरीन गुणवत्ता वाले प्याज चुन लें।
ड्रेनेज युक्त गमले में तैयार पॉट मिक्स भरें। इसके बाद प्याज के नीचे वाले जड़ वाले हिस्से को काटकर मिट्टी में इस तरह लगाएं कि जड़ का भाग पूरी तरह मिट्टी के भीतर रहे। प्याज के ऊपर मिट्टी की एक हल्की परत फैलाएं और स्प्रे बोतल से पानी दें। ध्यान रहे कि रोजाना ज्यादा पानी न डालें, बल्कि मिट्टी को सिर्फ सूखने से बचाने के लिए हल्का छिड़काव करें क्योंकि अत्यधिक पानी से प्याज की गांठें सड़ सकती हैं। लगभग 1 महीने के भीतर हरी पत्तियां बड़ी हो जाती हैं, जिन्हें काटकर सीधे रसोई में इस्तेमाल किया जा सकता है।
गमले में लहसुन तैयार करने की विधि
भारतीय खानपान की परंपरा में लहसुन का स्थान अनिवार्य है। दाल में तड़का लगाना हो या विभिन्न सब्जियों के लिए रिच ग्रेवी बनानी हो, लहसुन का इस्तेमाल हर दिन होता है। अत्यधिक मांग के कारण बाजार में लहसुन के भाव अक्सर काफी चढ़े रहते हैं। ऐसे में महंगे लहसुन के खर्च से बचने के लिए इसे घर पर लगाना सबसे व्यावहारिक तरीका है।
घर पर लहसुन लगाने के लिए ताजी और स्वस्थ कलियों का चयन करें। अंकुरण के लिए गमले में उपयुक्त पॉटिंग मिक्स तैयार करें और पानी डालकर मिट्टी को पहले नम कर लें। इसके बाद लहसुन की कलियों को मिट्टी में दबाएं, जिसमें कली का नुकीला सिरा ऊपर की तरफ होना चाहिए। करीब 20 दिनों में पौधे तैयार हो जाते हैं। इसके बाद इन्हें बड़े या अलग गमलों में स्थानांतरित करें और जरूरत के अनुसार हल्का पानी छिड़कते रहें। लगभग 60 दिनों के भीतर आपको घर की उगाई हुई लहसुन की ताजा पैदावार मिलने लगेगी।



















