उत्तराखंड के नैनीताल में मौजूद राजकीय बीडी पांडे जिला अस्पताल में एक साथ छह विशेषज्ञ चिकित्सकों का तबादला कर दिए जाने से शहर के साथ-साथ आसपास के पहाड़ी इलाकों में भी हलचल मच गई है। यह खबर सामने आते ही स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि, व्यापारी और सामाजिक संगठन लामबंद हो गए और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग करने लगे। लोगों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में पहले से ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है, ऐसे में एक झटके में इतने चिकित्सकों के चले जाने से अस्पताल की व्यवस्था चरमरा सकती है।
किन-किन डॉक्टरों का हुआ तबादला
प्रदेश स्तर पर हुए चिकित्सकों के स्थानांतरण की सूची में बीडी पांडे जिला अस्पताल में तैनात छह डॉक्टरों के नाम शामिल हैं। इनमें सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. अनिरुद्ध गंगोला, फिजिशियन डॉ. एमएस दुग्ताल, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र रावत, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मोनिका कांडपाल, सर्जन डॉ. वीके मिश्रा और पैथोलॉजिस्ट डॉ. ममता पांगती का नाम है। इन सभी छह डॉक्टरों का एक साथ तबादला होने की सूचना मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने तुरंत आदेश निरस्त करने और अस्पताल के खाली पदों पर जल्द नई नियुक्तियां करने की मांग सरकार के सामने रख दी।
हजारों मरीजों की उम्मीद टिकी है इसी अस्पताल पर
स्थानीय निवासियों के मुताबिक बीडी पांडे जिला अस्पताल सिर्फ नैनीताल शहर के लिए नहीं, बल्कि आसपास के गांवों और दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले हजारों मरीजों के लिए भी इलाज का सबसे बड़ा सहारा है। ओपीडी में दिखाने से लेकर इमरजेंसी, सर्जरी और तमाम विशेषज्ञ सेवाओं के लिए मरीज यहीं आते हैं। लोगों को डर है कि डॉक्टरों की संख्या घटने से अब इलाज के लिए उन्हें हल्द्वानी या दूसरे बड़े शहरों के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ सकते हैं, जो पहाड़ी रास्तों की वजह से आसान नहीं है।
व्यापारिक और सामाजिक संगठनों ने भी उठाई मांग
इस पूरे मामले में नैनीताल होटल एसोसिएशन, मां नयना देवी व्यापार मंडल, भाजपा के कार्यकर्ताओं और नगर पालिका से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी संज्ञान लिया है। इन सभी संगठनों ने सरकार से डॉक्टरों के तबादले पर दोबारा विचार करने की अपील की है। इनका कहना है कि अस्पताल पहले से ही चिकित्सकों और जरूरी संसाधनों की कमी झेल रहा है, ऐसे में मौजूदा डॉक्टरों के चले जाने से स्वास्थ्य सेवाओं की हालत और बिगड़ सकती है।
विधायक सरिता आर्य बोलीं, डॉक्टरों की तैनाती वैसे भी मुश्किल काम
विधायक सरिता आर्य ने कहा कि बीडी पांडे जिला अस्पताल में तैनात यह छह विशेषज्ञ चिकित्सक लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे थे और उनकी वजह से मरीजों को काफी राहत मिल रही थी। उन्होंने बताया कि नैनीताल जैसे पहाड़ी इलाके में डॉक्टरों की तैनाती हमेशा से ही चुनौती भरा काम रहा है, क्योंकि कई चिकित्सक यहां लंबे समय तक टिकना नहीं चाहते। ऐसे में जो डॉक्टर पहले से सेवाएं दे रहे हैं, उन्हीं का तबादला कर देना आम जनता की परेशानी और बढ़ा सकता है। विधायक ने बताया कि इस मुद्दे पर सांसद अजय भट्ट से भी बातचीत की गई है और सांसद ने आगे स्वास्थ्य मंत्री से बात करने का भरोसा दिया है। सरिता आर्या ने कहा कि डॉक्टरों का तबादला रोकने और अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए उच्च स्तर पर बातचीत जारी रखी जाएगी।
विधायक ने बीडी पांडे जिला अस्पताल को दुर्गम श्रेणी से हटाकर सुगम श्रेणी में शामिल किए जाने पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि कागजों पर भले ही अस्पताल को सुगम श्रेणी में रख दिया गया हो, लेकिन जमीनी स्तर पर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए जरूरी सुविधाओं की अब भी भारी कमी है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में चिकित्सकों के लिए सरकारी आवासीय व्यवस्था तक नहीं है, जिसके चलते दूर-दराज से आने वाले डॉक्टरों को रहने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
होटल एसोसिएशन: रैमजे अस्पताल पहले ही बंद, अब और बढ़ेगा दबाव
नैनीताल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट ने कहा कि लंबे प्रयासों के बाद नैनीताल की स्वास्थ्य सेवाएं कुछ हद तक पटरी पर आ पाई थीं और तैनात चिकित्सकों की वजह से मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा था, लेकिन अब एक ही बार में छह डॉक्टरों का तबादला कर दिया गया। उन्होंने याद दिलाया कि नैनीताल का रैमजे अस्पताल पहले ही बंद हो चुका है, जिसकी वजह से बीडी पांडे अस्पताल पर मरीजों का दबाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। उनके मुताबिक आसपास के गांवों और दूरदराज इलाकों के मरीज भी इलाज कराने यहीं पहुंचते हैं, और अगर डॉक्टरों की कमी बनी रही तो उन्हें गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। होटल एसोसिएशन ने सरकार से स्थानांतरण आदेश तुरंत वापस लेने की मांग की है।
व्यापार मंडल: मशीनें मौजूद, तकनीशियनों की कमी
मां नयना देवी व्यापार मंडल के अध्यक्ष पुनीत टंडन ने कहा कि नैनीताल की स्वास्थ्य सुविधाएं वैसे भी पहले से चुनौतीपूर्ण हालात में हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में जरूरी मशीनें तो मौजूद हैं, लेकिन तकनीशियनों की कमी की वजह से उनका पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को तैनात रखने और उन्हें यहां टिकाए रखने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। पुनीत टंडन ने सरकार से अपील की कि बीडी पांडे जिला अस्पताल से छह डॉक्टरों के तबादले पर तुरंत दोबारा विचार किया जाए।
फैसला वापस नहीं हुआ तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें
स्थानीय लोगों और संगठनों का साफ कहना है कि अगर सरकार ने तबादला आदेश वापस नहीं लिया, तो नैनीताल शहर के साथ-साथ आसपास के पहाड़ी इलाकों के मरीजों को इलाज के लिए और ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विधायक और सांसद स्तर पर हो रही बातचीत के बाद सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है।













