कर्नाटक में रविवार, 28 जून को राष्ट्रीय पल्स पोलियो प्रतिरक्षण कार्यक्रम का आगाज़ हो गया है। इस दौरान लाखों अभिभावक अपने बच्चों को पोलियो की खुराक दिलाने के लिए केंद्रों पर पहुँच रहे हैं। बेंगलुरु में रहने वाले लोगों की सुविधा के लिए ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) ने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और क्यूआर कोड आधारित प्रणाली तैयार की है, जिससे नज़दीकी टीकाकरण केंद्र का पता लगाना बेहद सरल हो गया है।
केंद्र खोजने की प्रक्रिया
बेंगलुरु शहर में अपने घर के पास पल्स पोलियो बूथ ढूंढने के लिए आप निम्नलिखित चरणों का पालन कर सकते हैं:
- जीबीए की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या पोर्टल के सीधे लिंक का उपयोग करें।
- कॉर्पोरेशन विकल्प के तहत सेंट्रल, ईस्ट, नॉर्थ, साउथ और वेस्ट में से अपने क्षेत्र का चयन करें।
- इसके बाद अपने संबंधित जोन और वार्ड को चुनें।
- अगले चरणों के अनुसार आगे बढ़ें।
- फाइंड नियरबाय के विकल्प पर क्लिक करें और अपनी लोकेशन एक्सेस की अनुमति दें ताकि आपके इलाके का सबसे नज़दीकी केंद्र स्क्रीन पर दिख सके।
- मानचित्र पर मौजूद बैंगनी बिंदु नम्मा क्लिनिक, पीले बिंदु पोलियो बूथ और लाल बिंदु जीबीए यूपीएचसी को दर्शाते हैं।
डिजिटल टूल की सहायता
इस अभियान को गति देने के लिए नियरबाय वैक्सीनेशन नाम का एक मोबाइल ऐप भी जारी किया गया है। यह डिजिटल टूल खास तौर पर उन माता-पिता के लिए बनाया गया है जो अपने पंजीकृत स्वास्थ्य केंद्रों से दूर रहते हैं या काम के सिलसिले में शहर में अलग-अलग जगहों पर सफर करते हैं। यह ऐप टीकाकरण केंद्रों की पहचान करने में मदद करता है।
अभियान का लक्ष्य और पहुँच
पूरे कर्नाटक राज्य में करीब 64.84 लाख बच्चों को पोलियो की दवा देने का लक्ष्य रखा गया है। इस महाभियान के तहत 36,076 टीकाकरण बूथ बनाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने मेट्रो स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों जैसी सार्वजनिक जगहों पर भी बूथ स्थापित किए हैं। 28 जून को शुरू हुए इस कार्यक्रम का उद्घाटन डी के शिवकुमार के सदाशिवनगर स्थित आवास पर स्वास्थ्य मंत्री यू टी खादर की उपस्थिति में हुआ।
भीड़भाड़ वाली जगहों पर फोकस
परिवहन केंद्रों पर बूथ लगाने का मुख्य उद्देश्य उन प्रवासी श्रमिकों, दैनिक यात्रियों और परिवारों तक पहुँचना है जो यात्रा के दौरान अपने बच्चों को टीकाकरण से वंचित न रखें। इस तरह की रणनीति से जागरूकता की कमी या व्यस्त दिनचर्या के कारण छूटे हुए बच्चों को कवर करने में मदद मिलती है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि बूथ-आधारित मॉडल के माध्यम से एक ही दिन में बड़ी संख्या में बच्चों का टीकाकरण करना संभव हो पाता है और इसके बाद जरूरत पड़ने पर फॉलो-अप विजिट की योजना भी बनाई जाती है।













