मुरादाबाद में मधुमेह के रोगियों के लिए खान-पान और दैनिक दिनचर्या को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। जिला अस्पताल की डाइटिशियन डॉ. सपना सिंह के मार्गदर्शन में यह बात सामने आई है कि शुगर लेवल को काबू में रखने के लिए सबसे पहले अत्यधिक मीठी चीजों और अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना जरूरी होता है। इसके साथ ही, ऐसे फलों के प्रति भी सतर्क रहना आवश्यक है जिनमें प्राकृतिक शुगर की मात्रा काफी ज्यादा पाई जाती है।
किन फलों से बढ़ सकती है परेशानी
डाइटिशियन डॉ. सपना सिंह का कहना है कि डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों को आम, चीकू, अंगूर, केला और लीची का सेवन बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए। इन सभी फलों में नेचुरल शुगर भरपूर मात्रा में होती है, जिस वजह से इनका अत्यधिक सेवन शरीर में ब्लड ग्लूकोज के स्तर को तेजी से बढ़ा सकता है। हालांकि, हर मरीज की शारीरिक स्थिति और शुगर का स्तर एक-दूसरे से भिन्न होता है, इसलिए किसी भी फल को पूरी तरह से बंद करने के बजाय अपने चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर उसकी सही मात्रा तय करना ही सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है।
अनार और पैकेज्ड फूड को लेकर सावधानी
यदि किसी रोगी का ब्लड शुगर पहले से ही नियंत्रण से बाहर और काफी बढ़ा हुआ है, तो उसे अपनी खान-पान की शैली को लेकर और भी ज्यादा चौकस रहने की आवश्यकता होती है। ऐसी विशेष परिस्थितियों में अनार जैसे फलों का सेवन भी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही निर्धारित किया जाना चाहिए। मधुमेह के मरीजों को केवल मीठे फलों से ही नहीं, बल्कि बाजार में मिलने वाली मिठाइयों, केक, पेस्ट्री, चॉकलेट और अन्य मीठे पैकेज्ड फूड आइटम्स से भी पूरी तरह दूरी बनाने का प्रयास करना चाहिए।
फाइबर युक्त आहार का महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों की डाइट में फाइबर यानी रेशे से भरपूर खाद्य पदार्थों को जगह देना बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। हरी सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य फाइबर युक्त चीजें भोजन को पोषण की दृष्टि से संतुलित बनाने का काम करती हैं। फाइबर न केवल पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है, बल्कि भोजन करने के तुरंत बाद ब्लड शुगर में होने वाली अचानक तेज बढ़ोतरी को रोकने में भी काफी मददगार साबित होता है।
जूस के बजाय पूरा फल खाना क्यों है बेहतर
फलों के सेवन के तरीके को लेकर भी एक बेहद अहम बात ध्यान में रखनी चाहिए। डॉ. सपना सिंह के मुताबिक, आमतौर पर फलों का जूस पीने के मुकाबले पूरा फल खाना ज्यादा बेहतर और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प माना जाता है। जब आप पूरा फल खाते हैं, तो उसमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर मौजूद रहता है, जबकि जूस निकालने की प्रक्रिया में फाइबर काफी हद तक कम हो जाता है और बहुत कम समय में शरीर में अधिक मात्रा में शुगर चली जाती है। यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों को मीठे फलों का रस पीने से बचते हुए डॉक्टर के परामर्श के अनुसार सीमित मात्रा में साबुत फल ही चुनना चाहिए।
लापरवाही बन सकती है गंभीर समस्याओं की वजह
मधुमेह की स्थिति को लंबे समय तक नजरअंदाज करना मानव शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है। यदि रक्त में शर्करा का स्तर लगातार बढ़ा रहता है, तो इससे आंखों की रोशनी, किडनी की कार्यप्रणाली, नसों और दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। इसलिए नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करवाते रहना, संतुलित आहार अपनाना, शारीरिक सक्रियता बनाए रखना और डॉक्टर के दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करना अनिवार्य है। यह बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि किसी भी फल को अचानक पूरी तरह बंद करने या अपनी डाइट में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटिशियन से परामर्श अवश्य कर लें।



















