मौसम में बदलाव आते ही सर्दी, खांसी और जुकाम की शिकायत लोगों की रोजमर्रा की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर देती है। नाक का लगातार बहना, सिर में जकड़न, गले में दर्द और रात के वक्त ठीक तरह से नींद न आना ऐसी सामान्य परेशानियां हैं जिनसे हर कोई परेशान रहता है। इस तरह के मौसमी लक्षणों के उभरते ही कई लोग सीधे अंग्रेजी दवाओं का रुख करते हैं। इसके विपरीत आयुर्वेद में सामान्य सर्दी-जुकाम से छुटकारा पाने के लिए कुछ बेहद सरल और असरदार प्राकृतिक उपायों की सलाह दी जाती है।
मुनक्का और दूध का आयुर्वेदिक मेल
आयुर्वेदाचार्य बालकृष्ण ने सामान्य सर्दी-जुकाम और गले की तकलीफ को शांत करने के लिए केवल दो घरेलू सामग्रियों से तैयार होने वाला एक पारंपरिक तरीका साझा किया है। इसमें गाय या भैंस के सामान्य दूध के साथ मुनक्के का संयोजन किया जाता है। मुनक्का असल में बड़े आकार के सूखे अंगूर होते हैं, जो स्वाद में प्राकृतिक रूप से मीठे होते हैं और भारतीय चिकित्सा परंपरा में सदियों से इनका उपयोग किया जाता रहा है। यह सूखा मेवा गले की सूजन को कम करने, शुष्कता मिटाने और मौसमी बदलाव में शारीरिक कमजोरी को दूर कर शरीर को ताकत प्रदान करने में सहायक भूमिका निभाता है।
पेय तैयार करने की पूरी विधि
इस घरेलू नुस्खे को तैयार करने की प्रक्रिया बेहद आसान है और इसे रसोई में कुछ ही मिनटों में बनाया जा सकता है। सबसे पहले 7 मुनक्कों को साफ और ताजे पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि उन पर लगी धूल-मिट्टी पूरी तरह साफ हो जाए। इसके बाद प्रत्येक मुनक्के को बीच से हल्का काटकर अंदर मौजूद कड़े बीजों को बाहर निकाल दें।
अब एक साफ बर्तन या पैन में एक गिलास दूध डालें और उसमें बीज निकाले गए 7 मुनक्के डाल दें। बर्तन को धीमी आंच पर रखकर दूध को कुछ मिनटों तक अच्छी तरह उबलने दें, जिससे मुनक्के के पोषक तत्व दूध में घुल जाएं। इसके बाद आंच बंद कर दें और दूध को सामान्य तापमान पर हल्का ठंडा होने दें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि सेवन करते समय दूध केवल गुनगुना होना चाहिए, अधिक खौलता हुआ या अत्यधिक गर्म दूध गले को नुकसान पहुंचा सकता है।
सेवन का सही तरीका और समय
जब उबला हुआ दूध गुनगुना और पीने योग्य हो जाए, तब सबसे पहले दूध में फूले हुए मुनक्कों को एक-एक करके अच्छी तरह चबाकर खाएं। मुनक्के पूरी तरह खा लेने के बाद ऊपर से उसी गुनगुने दूध की घूंट-घूंट चुस्की लेकर पिएं। आयुर्वेदाचार्य बालकृष्ण के अनुसार, इस पूरे नुस्खे का सेवन रात में बिस्तर पर जाने से ठीक पहले करना सबसे अधिक लाभकारी माना गया है। रात के समय इसका सेवन करने से श्वसन नली और फेफड़ों को गर्माहट मिलती है, शरीर की थकावट दूर होती है और गहरी नींद आने में मदद मिलती है।
शरीर और गले पर इसका प्रभाव
आयुर्वेदिक सिद्धांतों के आधार पर मुनक्का गले के अंदरूनी सूखेपन और खराश को तेजी से शांत करने में मददगार साबित होता है। इसके साथ ही यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और ऊर्जा के स्तर को भी बनाए रखता है। दूसरी ओर, गुनगुने दूध की तासीर छाती की जकड़न और गले की मांसपेशियों को आराम पहुंचाती है। जब दोनों चीजों को मिलाकर उबाला जाता है, तो यह एक बेहद सुपाच्य और पौष्टिक प्राकृतिक पेय बन जाता है, जो साधारण फ्लू और जुकाम में तुरंत राहत देता है।
सावधानियां और चिकित्सकीय परामर्श
इस घरेलू पेय को अपनाते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। मुनक्कों को हमेशा अच्छी तरह धोने के बाद और उनके बीज निकालकर ही दूध में उबालना चाहिए। अत्यधिक गर्म दूध का सेवन कभी न करें। डायबिटीज यानी मधुमेह के रोगियों को इसका सेवन अपने डॉक्टर की अनुमति और सलाह के बाद ही करना चाहिए, क्योंकि मुनक्के में प्राकृतिक मिठास अधिक होती है। इसके अलावा, जिन व्यक्तियों को दूध से एलर्जी है अथवा जो लैक्टोज इनटॉलरेंस की समस्या से ग्रस्त हैं, उन्हें इस उपाय से दूर रहना चाहिए। यदि सर्दी-जुकाम की समस्या एक सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे, तेज बुखार हो, सीने में दर्द महसूस हो या सांस लेने में किसी भी तरह की परेशानी आ रही हो, तो केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें और तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करवाएं।



















