डायबिटीज यानी शुगर की बीमारी आज के समय में तेजी से पैर पसार रही है। इस समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए खान-पान और रोजमर्रा की दिनचर्या में अनुशासन बनाए रखना बेहद जरूरी माना जाता है। थोड़ी सी भी लापरवाही की जाए तो ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे भविष्य में कई गंभीर स्वास्थ्य परेशानियां पैदा हो सकती हैं। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए समय पर भोजन करना, मीठी चीजों से पूरी तरह दूरी बनाना, नियमित रूप से पैदल चलना और चिकित्सक के बताए अनुसार समय पर दवाइयां लेना बहुत आवश्यक होता है। गोंडा के जाने-माने वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र बताते हैं कि पारंपरिक रूप से कई ऐसी जड़ी-बूटियों और आयुर्वेदिक औषधियों का उपयोग किया जाता है जो शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता करती हैं, हालांकि इन्हें कभी भी डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली अंग्रेजी दवाओं का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
बाजार में या सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे दावे किए जाते हैं कि डायबिटीज को जड़ से खत्म किया जा सकता है, लेकिन इन बातों पर बिल्कुल भरोसा नहीं करना चाहिए। यदि कोई माध्यम यह दावा करे कि शुगर की बीमारी हमेशा के लिए ठीक हो सकती है तो उससे सतर्क रहने की जरूरत है। इस बीमारी को केवल खान-पान में सुधार, परहेज, शारीरिक व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक ली जाने वाली दवाओं के जरिए ही काबू में रखा जा सकता है। डॉ. अभिषेक यह भी समझाते हैं कि HbA1c टेस्ट के माध्यम से पिछले लगभग तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर लेवल का आकलन किया जाता है। हालांकि इस टेस्ट की सामान्य सीमा, प्री-डायबिटीज और डायबिटीज के दायरे को हमेशा सटीक रिपोर्ट और किसी योग्य डॉक्टर की सलाह के बाद ही समझा जाना चाहिए। राहत की बात यह है कि प्री-डायबिटीज की अवस्था को समय रहते ठीक किया जा सकता है।
यदि शुगर की समस्या को लंबे समय तक ठीक से नियंत्रित न रखा जाए तो इसका बुरा असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों जैसे आंखों, किडनी, पैरों और अन्य हिस्सों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि मरीजों को समय-समय पर अपने ब्लड शुगर की नियमित जांच करवाते रहना चाहिए और डॉक्टर के निर्देशों की अनदेखी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार मधुमेह के नियंत्रण के लिए चंद्रप्रभा वटी, जामुन की गुठली का पाउडर, मामेजवा, गुड़मार और एलोवेरा जैसी पारंपरिक औषधियों का उपयोग किया जाता है। इनमें से जामुन की गुठली के चूर्ण का इस्तेमाल तो आम तौर पर बहुत से लोग पारंपरिक घरेलू नुस्खे के रूप में करते आए हैं।
जो लोग पहले से ही डायबिटीज की दवाइयां या इंसुलिन ले रहे हैं, उन्हें बिना किसी डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के अपनी तरफ से कोई भी नई जड़ी-बूटी या औषधि शुरू नहीं करनी चाहिए। बिना सोचे-समझे या गलत तरीके से सेवन करने से ब्लड शुगर का स्तर जरूरत से ज्यादा नीचे गिर सकता है, जो खतरनाक हो सकता है। इसलिए प्राकृतिक औषधियां अपनाने के साथ-साथ नियमित मेडिकल जांच करवाते रहना, संतुलित आहार खाना और डॉक्टर के परामर्श का सख्ती से पालन करना सबसे सुरक्षित तरीका है।



















