बदलती जीवनशैली और बढ़ते प्रदूषण के बीच त्वचा से जुड़ी परेशानियां आम होती जा रही हैं। चेहरे पर पिंपल्स, मुहांसे और तरह-तरह के दाग-धब्बों से छुटकारा पाने के लिए लोग तमाम तरह के नुस्खे और क्लीनिकल ट्रीटमेंट अपना रहे हैं। इसी सिलसिले में त्वचा की देखभाल से जुड़ी एक आधुनिक तकनीक काफी चर्चा में है, जिसे हाइड्रा ट्रीटमेंट कहा जाता है। इस प्रक्रिया को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि हर व्यक्ति की त्वचा की बनावट और उसकी दिक्कतें अलग होती हैं, इसलिए इसका तरीका भी हर मरीज के लिए एक जैसा नहीं होता।
व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार तय होती है प्रक्रिया
विशेषज्ञों के अनुसार जब कोई मरीज अपनी स्किन से जुड़ी परेशानी लेकर आता है, तो सबसे पहले उसकी त्वचा की जांच की जाती है। डॉक्टर रिद्धी पांडे ने बताया कि सभी मरीजों की स्किन टाइप और समस्याएं अलग होती हैं, जिसके चलते हर किसी पर एक ही फॉर्मूला लागू नहीं किया जा सकता। मरीज की शारीरिक स्थिति और बीमारी की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए ही ट्रीटमेंट का खाका तैयार किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल बाहरी ट्रीटमेंट तक सीमित नहीं रहा जाता, बल्कि इसके साथ होम्योपैथिक दवाओं का भी सहारा लिया जाता है। इसके जरिए त्वचा की ऊपरी सतह पर काम करने के साथ-साथ अंदरूनी समस्या की जड़ तक दवा पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जाता है।
कितना लंबा चलता है एक पूरा सेशन
आम तौर पर इस हाइड्रा ट्रीटमेंट का एक पूरा सत्र लगभग 1 से 1.5 घंटे तक का होता है। इस समयावधि के दौरान मरीज की त्वचा की गहराई से सफाई की जाती है और उसकी खास समस्या के हिसाब से आगे की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है। इस पूरे चरण में इस बात का भी पूरा ख्याल रखा जाता है कि मरीज को किसी प्रकार की असहजता न हो और वह पूरी तरह से सहज महसूस करे। सफाई और ट्रीटमेंट के अन्य चरणों के बाद जरूरत के मुताबिक दवाइयां लगाई या दी जाती हैं।
कितने सत्रों की पड़ती है जरूरत
त्वचा की समस्याओं के समाधान के लिए कितने सेशन लगेंगे, यह पूरी तरह से मरीज की मौजूदा स्थिति पर निर्भर करता है। यदि किसी व्यक्ति को त्वचा संबंधी समस्या शुरुआती चरण में है या फिर दिक्कत बहुत ज्यादा गंभीर नहीं है, तो अमूमन दो सत्रों में ही काफी हद तक सुधार देखा जा सकता है। वहीं, जिन मामलों में समस्या पुरानी हो चुकी है या त्वचा को ज्यादा नुकसान पहुंचा चुकी है, वहां तीन या उससे अधिक सत्रों की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके अलावा, मरीजों की सहूलियत का भी पूरा ध्यान रखा जाता है, खासकर जो लोग दूर-दराज के इलाकों से इलाज कराने आते हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर स्थिति को देखते हुए सत्रों के बीच उचित अंतराल तय करते हैं, ताकि मरीज को बार-बार यात्रा करने में परेशानी न हो।
क्या इसके कोई साइड इफेक्ट्स हैं
त्वचा पर किसी भी नए ट्रीटमेंट को आजमाने से पहले लोगों के मन में उसके साइड इफेक्ट्स को लेकर डर बना रहता है। डॉक्टर रिद्धी पांडे ने इस बारे में स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी उत्पाद को त्वचा पर जबरदस्ती या अनियंत्रित तरीके से नहीं थोपा जाता है। ट्रीटमेंट पूरी तरह से मरीज की त्वचा की क्षमता और उसकी जरूरत के दायरे में ही किया जाता है। सुरक्षा के लिहाज से इसे एक सुरक्षित प्रक्रिया माना गया है। हालांकि, किसी भी प्रकार के स्किन ट्रीटमेंट को शुरू करने से पहले अपनी त्वचा के प्रकार और उसकी स्थिति को लेकर किसी योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य कर लेना चाहिए, ताकि मन में कोई संशय न रहे।



















