त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने रविवार को अगरतला के विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और राहत शिविरों का व्यक्तिगत रूप से मुआयना किया। राज्य के कई हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण उत्पन्न जलभराव और बाढ़ की स्थिति के बीच उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों की जमीनी हकीकत का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर पूरी स्थिति की समीक्षा की ताकि जरूरतमंदों तक तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
राहत शिविरों का दौरा और नागरिकों से संवाद
अपनी इस ग्राउंड विजिट के तहत मुख्यमंत्री ने बारडोवाली स्थित विवेकानंद स्कूल और आश्रम चौमुहानी के राहत शिविरों का रुख किया। वहां उन्होंने बाढ़ के पानी से बेघर हुए और विस्थापित हुए नागरिकों से सीधे बातचीत की। उन्होंने शिविरों में रह रहे लोगों के लिए की गई व्यवस्थाओं, उनकी सुरक्षा के इंतजामों और बुनियादी जरूरतों की पूर्ति का बारीकी से मुआयना किया। उन्होंने विस्थापित परिवारों को आश्वस्त किया कि प्रशासन हर संभव मदद उन तक पहुंचाएगा और उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
जिलावार नुकसान और जलभराव के कारण
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि बरामुरा पहाड़ियों में हुई भारी मानसूनी और मौसमी बारिश के बाद खोवाई और पश्चिम त्रिपुरा जिलों के कई हिस्सों में अचानक पानी भर गया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ठीक इसी तरह की विकट स्थिति पिछले साल अगस्त 2024 में भी सामने आई थी। इस अचानक हुए जलभराव के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, जिससे निपटने के लिए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल पूरी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों के लिए तुरंत प्रभाव से राहत शिविर खोले गए हैं, जहां उनके खानपान के साथ-साथ बच्चों के लिए विशेष रूप से बेबी फूड की आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा रही है।
राहत और बचाव कार्यों के आंकड़े
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक स्थिति से निपटने के लिए राज्यभर में कुल 17 राहत शिविर शुरू किए गए हैं। इन शिविरों में कुल 413 परिवारों को शरण दी गई है, जिनमें लगभग 1,305 लोग रह रहे हैं। बाढ़ के पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अत्याधुनिक बचाव नौकाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है और प्रभावित जोनों में नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स व अन्य आपदा मोचन दलों को पूरी ताकत से तैनात कर दिया गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधि, पार्षद और पार्टी कार्यकर्ता भी दिन-रात राहत कार्यों में जुटे हुए हैं ताकि किसी भी नागरिक को परेशानी का सामना न करना पड़े।
बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान तलाश रही सरकार
बार-बार आने वाली इस आपदा से हमेशा के लिए निजात पाने के लिए सरकार अब ठोस और दीर्घकालिक उपायों पर विचार कर रही है। हालांकि कई संवेदनशील स्थानों पर पहले से ही सुरक्षात्मक तटबंध बनाए जा चुके हैं, लेकिन मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समस्या के स्थाई निवारण के लिए और अधिक कड़े कदम उठाए जाएंगे। इस कठिन समय में सरकार पूरी तरह से सतर्क है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ की टीमों को रिजर्व में रखा गया है। पश्चिम जिला इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जिस पर सरकार की पैनी नजर है और प्रशासन मौसम की चुनौतियों के बावजूद नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।





















