लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा, शशि थरूर ने रखी अपनी बातसिर्फ तीन चीजों से किचन में बनाएं बाजार जैसा कस्टर्ड पाउडर, 6 महीने तक रहेगा तरोताजादिवंगत अभिनेता देवानंद की संतान सुनील आनंद नहीं रहे, 70 वर्ष की आयु में कार्डिएक अरेस्ट से लंदन में हुआ निधनआषाढ़ पूर्णिमा पर लक्ष्मी नारायण की विशेष आराधना से दूर होगी आर्थिक तंगी, जानें आचार्य इंदु प्रकाश के आठ सिद्ध उपायवियो ने पेश किया नया इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल रोवर, साझा गतिशीलता बाजार में बड़ी छलांग की तैयारीडोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, अमेरिकी फुटबॉल के लिए ऐतिहासिक रहा विश्व कप का आयोजनतेल बाजार में भारी गिरावट, क्या निवेशक कर रहे हैं जल्दबाजी या मध्य पूर्व की उम्मीदें हैं अतिरेकमहाभारत में अर्जुन का किरदार निभाने के बाद भी शहीर शेख को क्यों झेलनी पड़ी थी बेरोजगारीचाणक्य नीति: इन चार तरह के लोगों को कभी न बताएं घर की बातें, वरना बिखर जाएगी परिवार की खुशियांघर में रखा सोना अब भारत में उधार लेने का पसंदीदा जरिया बनता जा रहा है
जराकुश के हैं कई कमाल के फायदे, गोंडा के वैद्य जमुना प्रसाद यादव से जानिए इस पौधे का सही इस्तेमालस्वास्थ्य
22 जून 2026, 9:55 pm (36 दिन पहले)· 6

जराकुश के हैं कई कमाल के फायदे, गोंडा के वैद्य जमुना प्रसाद यादव से जानिए इस पौधे का सही इस्तेमाल

गोंडा के वैद्य जमुना प्रसाद यादव ने TrendKia को बताया कि जराकुश नाम का औषधीय पौधा सर्दी-जुकाम, पाचन समस्याओं और त्वचा रोगों में पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है। यह पौधा कई इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगता है और ग्रामीण इलाकों में इसका लंबे समय से इस्तेमाल होता आया है।

भारतीय गांवों में पीढ़ियों से चला आ रहा पारंपरिक ज्ञान आज भी उतना ही जीवंत है। जड़ी-बूटियों से उपचार का चलन ग्रामीण जीवन का एक अहम हिस्सा रहा है और यह परंपरा कभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। इन्हीं औषधीय पौधों में एक नाम है जराकुश का, जिसे लोक चिकित्सा और पारंपरिक उपचार में खास दर्जा दिया जाता है। सर्दी-जुकाम से लेकर पेट की गड़बड़ी तक, इस पौधे का उपयोग सदियों से होता आया है।

गोंडा के वैद्य जमुना प्रसाद यादव ने बताए जराकुश के गुण

TrendKia से बातचीत में गोंडा के वैद्य जमुना प्रसाद यादव ने जराकुश की खासियतें विस्तार से साझा कीं। उनके मुताबिक इस पौधे के पत्ते और दूसरे हिस्से औषधीय गुणों से भरपूर माने जाते हैं। वैद्य जमुना प्रसाद यादव यह भी साफ करते हैं कि आधुनिक दौर में किसी भी बीमारी का इलाज डॉक्टर की सलाह से कराना जरूरी है, लेकिन पारंपरिक चिकित्सा में जराकुश की अपनी एक अलग पहचान और अहमियत बनी हुई है।

ये भी पढ़ें

सर्दी-जुकाम और खांसी में सबसे पहले याद आता है यह पौधा

वैद्य जमुना प्रसाद यादव के अनुसार जराकुश का उपयोग सबसे ज्यादा सर्दी-जुकाम और खांसी जैसी तकलीफों में किया जाता है। मौसम बदलते ही कई लोगों को गले और नाक की परेशानी शुरू हो जाती है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में लोग जराकुश के पत्तों को घरेलू नुस्खे के तौर पर अपनाते हैं। माना जाता है कि इसके गुण गले को आराम पहुंचाने और सर्दी से जुड़ी दिक्कतों को कम करने में मददगार होते हैं।

इम्यूनिटी बढ़ाने में भी मानी जाती है इसकी भूमिका

आयुर्वेद में कई ऐसे पौधे हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं। जराकुश को भी इसी श्रेणी में रखा जाता है। वैद्य बताते हैं कि इस पौधे का नियमित और सही मात्रा में उपयोग शरीर को भीतर से मजबूत बना सकता है और बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ा सकता है।

पाचन की समस्याओं में भी देता है राहत

ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोग पाचन से जुड़ी परेशानियों में भी जराकुश का सहारा लेते हैं। आयुर्वेदिक मान्यताओं के मुताबिक यह पौधा पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में मदद कर सकता है। पेट में गैस बनना, अपच और खाना सही से न पचने जैसी समस्याओं में इसका पारंपरिक उपयोग होता आया है। हालांकि इसे कितनी मात्रा में और किस तरह से लेना है, यह किसी जानकार से पूछकर ही तय करना चाहिए।

त्वचा की परेशानियों में भी आता है काम

जराकुश के फायदे सिर्फ अंदरूनी स्वास्थ्य तक सीमित नहीं हैं। कई जगहों पर इसके पत्तों का लेप बनाकर त्वचा पर लगाया जाता है। वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि इससे त्वचा को राहत मिल सकती है। हालांकि किसी भी तरह की चर्म समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

आसानी से मिलता है, पर पहचान सही होना जरूरी

वैद्य जमुना प्रसाद यादव स्पष्ट करते हैं कि जराकुश कोई दुर्लभ जड़ी-बूटी नहीं है। यह कई इलाकों में अपने आप उग जाता है और इसकी देखरेख में भी खास मशक्कत नहीं लगती। इसीलिए ग्रामीण इलाकों के लोग इसे जानते-पहचानते हैं और जरूरत पड़ने पर काम में लेते हैं। लेकिन एक जरूरी बात यह है कि इसकी पहचान सही होनी चाहिए, क्योंकि कई बार लोग दूसरे पौधों को भी जराकुश समझ लेते हैं, जो नुकसानदेह हो सकता है।

प्रकृति की ओर लौट रहे हैं लोग

आज का समाज रासायनिक दवाओं के साथ-साथ प्राकृतिक और आयुर्वेदिक विकल्पों की तरफ भी रुख कर रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि लोग अब दोनों विकल्पों के बारे में जानना चाहते हैं। जराकुश भी उन पौधों में शामिल है जिसे एक प्राकृतिक औषधि के रूप में पहचाना जाता है। गांवों में बुजुर्ग आज भी इस पौधे के गुणों की जानकारी नई पीढ़ी को देते हैं, जो इस बात का सबूत है कि पारंपरिक ज्ञान हमेशा जीवित रहता है।

सवाल-जवाब

जराकुश क्या है?
जराकुश एक औषधीय पौधा है जिसका उपयोग पारंपरिक और लोक चिकित्सा में लंबे समय से किया जाता रहा है।
जराकुश का सबसे ज्यादा किस परेशानी में इस्तेमाल होता है?
गोंडा के वैद्य जमुना प्रसाद यादव के अनुसार जराकुश का सबसे अधिक उपयोग सर्दी-जुकाम और खांसी जैसी समस्याओं में किया जाता है।
क्या जराकुश पेट की गड़बड़ी में मदद करता है?
आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार जराकुश गैस, अपच और पाचन की दिक्कतों में सहायक हो सकता है, लेकिन इसे विशेषज्ञ की सलाह से ही लेना चाहिए।
क्या जराकुश का उपयोग त्वचा के लिए भी होता है?
हां, कई जगहों पर जराकुश के पत्तों का लेप बनाकर त्वचा पर लगाया जाता है, जो राहत देने में सहायक माना जाता है।
जराकुश कहां मिलता है?
वैद्य जमुना प्रसाद यादव के अनुसार जराकुश कोई दुर्लभ पौधा नहीं है और यह कई इलाकों में प्राकृतिक रूप से उग जाता है।
क्या जराकुश इम्यूनिटी बढ़ाता है?
आयुर्वेद में जराकुश को शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला पौधा माना जाता है और वैद्य जमुना प्रसाद यादव भी इसे इसी तरह बताते हैं।
जराकुश का इस्तेमाल करने से पहले क्या सावधानी जरूरी है?
जराकुश का उपयोग करने से पहले इसकी सही पहचान जरूरी है और किसी भी बीमारी में इसे लेने से पहले डॉक्टर या जानकार वैद्य से सलाह लेनी चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR