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जौनपुर के युवाओं में बढ़ रही भूलने की बीमारी, न्यूरोसाइकियाट्रिस्ट डॉ. उत्तम कुमार गुप्ता ने बताई वजह और बचावस्वास्थ्य
28 सित॰ 2026, 10:06 am (29 दिन पहले)· 1

जौनपुर के युवाओं में बढ़ रही भूलने की बीमारी, न्यूरोसाइकियाट्रिस्ट डॉ. उत्तम कुमार गुप्ता ने बताई वजह और बचाव

जौनपुर के युवाओं में 30 से 35 वर्ष की उम्र में ही भूलने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। न्यूरोसाइकियाट्रिस्ट डॉ. उत्तम कुमार गुप्ता के अनुसार, इसके पीछे अत्यधिक स्क्रीन टाइम, तनाव और जीवनशैली की गड़बड़ियां मुख्य कारण हैं जिसे स्यूडो-डिमेंशिया कहा जाता है।

जौनपुर में अब उम्रदराज लोगों के साथ-साथ युवाओं में भी चीजें भूलने की परेशानी लगातार सामने आ रही है। आमतौर पर 30 से 35 वर्ष की आयु वर्ग के लोग छोटी-छोटी बातें भूलने लगे हैं, जैसे कोई सामान रखकर उसका सही स्थान भूल जाना या किसी बेहद जरूरी काम को समय पर याद न रख पाना। हालांकि, याद रखने की हर परेशानी को सीधे तौर पर डिमेंशिया नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि युवाओं में इस स्थिति के पीछे मुख्य रूप से मानसिक तनाव, डिप्रेशन, एंग्जायटी, नशे की बुरी आदतें और जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम जैसी वजहें जिम्मेदार होती हैं।

स्यूडो-डिमेंशिया क्या है और इसके कारण

जौनपुर के जाने-माने न्यूरोसाइकियाट्रिस्ट डॉ. उत्तम कुमार गुप्ता (M.B.B.S., M.D.) के मुताबिक, युवाओं में उभरने वाली इस खास समस्या को कई बार स्यूडो-डिमेंशिया के रूप में पहचाना जाता है। इस स्थिति से जूझ रहे व्यक्ति को अक्सर चीजें भूलने की गंभीर शिकायत होती है, लेकिन इसके मूल में अल्जाइमर जैसा कोई स्थायी और लाइलाज रोग नहीं होता है। जब कोई व्यक्ति अत्यधिक मानसिक तनाव से गुजरता है या उसकी जीवनशैली में नकारात्मक बदलाव आते हैं, तो उसकी याददाश्त प्रभावित होने लगती है। यदि इन छिपे हुए कारणों को समय रहते ठीक कर लिया जाए, तो मरीज की मानसिक स्थिति में काफी सुधार देखा जा सकता है।

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मोबाइल और स्क्रीन टाइम का बढ़ता नकारात्मक प्रभाव

डॉ. उत्तम कुमार गुप्ता ने विस्तार से समझाया कि आज की युवा पीढ़ी का अधिकांश समय मोबाइल फोन की स्क्रीन पर, सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने में और लगातार डिजिटल दुनिया से जुड़े रहने में गुजरता है। इसके अलावा काम का भारी दबाव, रोजाना पर्याप्त नींद न मिल पाना, मानसिक तनाव और एंग्जायटी भी सीधे तौर पर इंसानी दिमाग पर बुरा असर डाल रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में व्यक्ति का ध्यान किसी एक काम पर टिक नहीं पाता है, जिसके कारण उसे अपने दैनिक जीवन की बातें याद रखने में भारी परेशानी महसूस होने लगती है।

बढ़ती उम्र के डिमेंशिया से कैसे है यह अलग

दूसरी तरफ, उम्रदराज लोगों में सामने आने वाले डिमेंशिया के मामलों को पूरी तरह से अलग नजरिए से देखा जाता है। चिकित्सक के अनुसार करीब 50 से 60 वर्ष की आयु पार करने के बाद भूलने की बीमारी उत्पन्न होने के कई अलग-अलग चिकित्सीय कारण हो सकते हैं। इनमें से कुछ मामले रिवर्सिबल श्रेणी के होते हैं, जिसका मतलब यह है कि यदि मूल कारण की सही पहचान करके समय पर इलाज शुरू कर दिया जाए, तो उनमें सुधार होना पूरी तरह संभव है। इसके विपरीत, कुछ मामले इर्रिवर्सिबल होते हैं जिनमें अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियां शामिल होती हैं। इस प्रकार की समस्याओं को पूरी तरह से ठीक करना तो संभव नहीं होता, लेकिन शुरुआती दौर में ही इनकी पहचान कर लेने और सही उपचार अपनाने से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है और मरीज की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।

भूलने की समस्या के शुरुआती और गंभीर संकेत

डॉ. उत्तम कुमार गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि डिमेंशिया की शुरुआत होने पर व्यक्ति को अपने रोजमर्रा के सामान्य कार्यों को पूरा करने में भी कठिनाई महसूस होने लगती है। अपने किसी सामान को सुरक्षित रखकर उसका स्थान भूल जाना, एक ही सवाल को बार-बार दोहराना या किसी जरूरी काम का ऐन वक्त पर याद न आना इसके शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं। यदि यह समस्या लगातार बढ़ती जाए, तो इसके लक्षण और भी गंभीर हो सकते हैं जैसे कि अपने ही परिचित लोगों के नाम भूल जाना, जाने-पहचाने रास्तों पर भटक जाना और यहां तक कि यह भी याद न रहना कि अभी कुछ देर पहले भोजन किया था या नहीं।

विशेषज्ञ की सलाह और ध्यान देने योग्य बातें

विशेषज्ञ चिकित्सक का कहना है कि युवाओं में नजर आने वाली भूलने की इस परेशानी को फौरन डिमेंशिया मानकर घबराने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय इसके पीछे छिपे अन्य कारणों जैसे कि अत्यधिक तनाव, नींद की गड़बड़ी, नशे की लत, जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य कमियों पर गहराई से ध्यान देना बेहद आवश्यक है। यदि यह समस्या लगातार बनी रहे या समय के साथ बढ़ती हुई प्रतीत हो, तो किसी अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टर से तुरंत परामर्श करना ही सबसे समझदारी भरा कदम साबित होता है.

सवाल-जवाब

युवाओं में भूलने की समस्या को क्या कहा जाता है?
युवाओं में इस प्रकार की समस्या को कई बार स्यूडो-डिमेंशिया कहा जाता है, जिसका कारण स्थायी रोग नहीं बल्कि तनाव और जीवनशैली होती है।
जौनपुर के किस चिकित्सक ने इस बारे में जानकारी दी है?
यह जानकारी जौनपुर के न्यूरोसाइकियाट्रिस्ट डॉ. उत्तम कुमार गुप्ता (M.B.B.S., M.D.) ने दी है।
युवाओं में भूलने की समस्या के मुख्य कारण क्या हैं?
इसके पीछे तनाव, डिप्रेशन, एंग्जायटी, नशे की आदत और जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम मुख्य वजहें हो सकती हैं।
डिमेंशिया के शुरुआती संकेत क्या होते हैं?
सामान रखकर उसका स्थान भूल जाना, एक ही बात बार-बार पूछना या जरूरी काम याद न रहना शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
क्या उम्रदराज लोगों का डिमेंशिया युवाओं की समस्या से अलग होता है?
हाँ, 50-60 वर्ष की उम्र के बाद डिमेंशिया के कारण अलग होते हैं जिसमें कुछ मामले रिवर्सिबल और कुछ इर्रिवर्सिबल होते हैं।
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