ठंड का आगाज होते ही वातावरण की शुष्की त्वचा की कुदरती चमक छीनने लगती है। सर्द हवाओं के लगातार संपर्क में आने से चेहरे और बदन की नमी तेजी से घटने लगती है, जिसके चलते बार-बार क्रीम या लोशन लगाने पर भी कुछ ही समय में खिंचाव महसूस होने लगता है। ऐसे मौसम में महंगे कॉस्मेटिक उत्पादों पर निर्भर रहने के बजाय पारंपरिक घरेलू तेलों का सही तालमेल स्किन बैरियर को दोबारा मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर नीरू सेहरावत द्वारा साझा की गई जानकारी में एक ऐसा ही आसान तरीका सामने आया है, जो त्वचा को गहराई से तर रखकर सर्दियों के कड़े प्रभाव को बेअसर करता है।
रूखी त्वचा के लिए चार प्रमुख तत्वों की शक्ति
इस प्राकृतिक मिश्रण को तैयार करने के लिए चार रोजमर्रा की चीजों को शामिल किया गया है, जिनमें नारियल, सरसों, नीम और देसी घी मौजूद हैं। यह चारों तत्व अलग-अलग खूबियों से लैस हैं और मिलकर त्वचा को मुकम्मल सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं।
- नारियल तेल: कोल्ड-प्रेस्ड नारियल तेल त्वचा की परतों के भीतर तक समाने की क्षमता रखता है। इसमें भरपूर मात्रा में मिलने वाले फैटी एसिड और विटामिन-ई त्वचा के भीतरी जल स्तर को बांधे रखते हैं, जिससे सतह पर लंबे समय तक नमी बनी रहती है और खिंचाव दूर होता है।
- सरसों का तेल: उत्तर भारत में पीढ़ियों से इस्तेमाल होने वाले सरसों के तेल की तासीर गर्म होती है, जो शीत ऋतु में बदन को राहत देती है। यह गाढ़ा तेल एड़ियों की गहरी दरारों को भरने, सख्त त्वचा को मुलायम करने और पपड़ीदार रूखेपन को जड़ से मिटाने में बेहद असरदार है।
- नीम का तेल: कड़ाके की ठंड में जब त्वचा सूखती है, तो कई बार खुजली, लाली और छोटे-मोटे संक्रमण पनपने लगते हैं। नीम के तेल में पाए जाने वाले जीवाणुरोधी गुण इन सभी परेशानियों को शांत रखते हैं और जलन को बढ़ने नहीं देते।
- गाय का घी: शुद्ध गाय का घी त्वचा की मृत कोशिकाओं को पोषण देकर स्वाभाविक चमक लौटाता है। सर्दियों में रूखेपन की वजह से उभरने वाली बारीक लकीरों और झुर्रियों को हल्का करने में भी यह मददगार साबित होता है।
मिश्रण बनाने और लगाने की सही विधि
इस घरेलू नुस्खे को तैयार करने का तरीका बेहद सरल है। एक साफ शीशी या कटोरी में कोल्ड-प्रेस्ड नारियल का तेल, सरसों का तेल और नीम का तेल एक समान मात्रा में मिला लें। इसके बाद इस तरल में थोड़ा सा शुद्ध गाय का घी अच्छी तरह घोल लें, ताकि सभी घटक एकसार हो जाएं।
सोने से पहले इस तैयार तेल को अपनी दोनों हथेलियों और पैरों के तलवों पर अच्छी तरह लगाएं। हल्की मालिश के बाद किसी लूफा या ब्रश की मदद से इसे धीरे-धीरे रगड़ें, जिससे मृत त्वचा हट जाए और तेल रोमछिद्रों में समा सके। इसके अतिरिक्त, इस तेल की मात्र एक बूंद नाभि में टपकाएं और थोड़ा सा हिस्सा दोनों कानों के पिछले भाग पर मलें। आयुर्वेद और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, नाभि और कानों के पिछले हिस्से को चिकनाई देने से पूरे शरीर की आंतरिक शुष्कता दूर करने में अप्रत्याशित मदद मिलती है।


















