उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में आम जनता के लिए चिकित्सा सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल परिसर में मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों के इलाज हेतु विशेष न्यूरो सर्जिकल ओपीडी सेवा औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। स्थानीय स्तर पर इस विशेषज्ञ सुविधा के न होने के कारण अब तक गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को लगभग 160 किलोमीटर दूर लखनऊ या अन्य बड़े महानगरों की यात्रा करनी पड़ती थी। इस नई पहल के बाद अब स्थानीय नागरिकों को अपने ही जिले में विशेषज्ञ स्तर की चिकित्सीय राय प्राप्त हो सकेगी, जिससे न केवल उनका कीमती समय बचेगा बल्कि यात्रा और निजी अस्पतालों पर होने वाले भारी खर्च से भी मुक्ति मिलेगी।
हर मंगलवार को सुबह 8 बजे से संचालित होगी विशेषज्ञ सेवा
जिला अस्पताल प्रशासन द्वारा निर्धारित व्यवस्था के तहत यह न्यूरो सर्जिकल ओपीडी प्रत्येक सप्ताह मंगलवार के दिन संचालित की जाएगी। डॉक्टर सिद्धार्थ ने इस व्यवस्था के संबंध में जानकारी साझा करते हुए बताया कि ओपीडी का समय सुबह 8 बजे से प्रारंभ हो जाता है। ऐसे में मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी किसी भी समस्या से जूझ रहे नागरिक समय पर अस्पताल पहुंचकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं और सीधे विशेषज्ञ चिकित्सक से मिलकर जरूरी सलाह हासिल कर सकते हैं। डॉक्टर सिद्धार्थ ने स्पष्ट किया कि इस सेवा को शुरू करने के पीछे मुख्य ध्येय यही है कि जिले के निवासियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उनके नजदीक ही उपलब्ध कराई जा सकें, जिससे उन्हें सामान्य अथवा गंभीर न्यूरो समस्याओं के लिए मजबूरीवश बड़े शहरों के अस्पतालों की तरफ न भागना पड़े।
महानगरों की लंबी दौड़ और आर्थिक दबाव से मिलेगी मुक्ति
मानव शरीर में तंत्रिका तंत्र, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी व्याधियां अत्यंत संवेदनशील मानी जाती हैं, जिनमें समय पर सही परामर्श और सटीक चिकित्सा मिलना बेहद आवश्यक होता है। अक्सर देखा जाता है कि सिर में लगातार दर्द बना रहना, अचानक चक्कर आना, हाथ अथवा पैरों में कमजोरी महसूस होना, नसों में खिंचाव या रीढ़ की हड्डी में गंभीर दर्द जैसी तकलीफों को अनदेखा करना भारी पड़ जाता है। खीरी जैसे विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र वाले जिले में लंबे अर्से से विशेषज्ञ न्यूरो सर्जन की अनुपलब्धता एक बड़ी बाधा बनी हुई थी। पूर्व में यह स्थिति थी कि जिला अस्पताल में प्राथमिक परीक्षण के उपरांत मरीजों को सीधे लखनऊ या अन्य उच्च स्तरीय संस्थानों के लिए रेफर कर दिया जाता था।
किसी मरीज को बाहर रेफर किए जाने पर केवल वही परेशान नहीं होता था, बल्कि परिवार के एक या एक से अधिक सदस्यों को भी साथ जाना पड़ता था। ऐसे में आने-जाने का परिवहन किराया, अन्य शहर में रुकने और खाने-पीने का दैनिक व्यय और निजी चिकित्सालयों में जांच व इलाज की भारी फीस मिलकर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डाल देती थी। अब जिला अस्पताल में विशेषज्ञ परामर्श मिलने से उन लोगों को बहुत बड़ी सहूलियत मिलेगी, जिन्हें बीमारी के शुरुआती चरण में डॉक्टर को दिखाना हो या फिर पहले से चल रहे उपचार के सिलसिले में केवल रूटीन फॉलोअप कराना हो।
मात्र 1 रुपये के सरकारी पर्चे पर इलाज और निशुल्क जांच की व्यवस्था
सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के अंतर्गत मिलने वाली यह सुविधा विशेष रूप से ग्रामीण और निर्धन पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों के लिए संजीवनी साबित होगी। जिला अस्पताल में आने वाले मरीज मात्र 1 रुपये का सामान्य पंजीकरण पर्चा बनवाकर न्यूरो सर्जन से परामर्श प्राप्त कर सकेंगे। निजी क्षेत्र के अस्पतालों में जहां विशेषज्ञ न्यूरो सर्जन की केवल परामर्श फीस ही सैकड़ों या हजारों रुपये होती है, वहीं यहां नाममात्र के शुल्क में वही सुविधा सुलभ कराई जा रही है।
परामर्श के अलावा बीमारियों की पहचान के लिए लगने वाली जरूरी जांचों को लेकर भी अस्पताल में पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। डॉक्टर सिद्धार्थ के अनुसार, अस्पताल में मरीजों के लिए कई प्रकार की आवश्यक नैदानिक जांचें पूर्णतया निशुल्क उपलब्ध हैं। चिकित्सक मरीज के शारीरिक लक्षणों और व्याधि की गंभीरता का आकलन करने के उपरांत जरूरी जांच कराने का निर्देश देंगे, जो अस्पताल के भीतर ही बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के की जाएंगी। किसी भी गंभीर बीमारी के सामने आने पर जांच का खर्च अक्सर गरीब परिवारों का बजट बिगाड़ देता है, इसलिए मुफ्त जांच की यह सुविधा मरीजों को बहुत बड़ा आर्थिक संबल प्रदान करेगी। आगे चलकर आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को उपचार की आगामी प्रक्रिया के लिए भी उचित मार्गदर्शन इसी केंद्र से उपलब्ध कराया जाएगा।


















