मौसम का मिज़ाज बदलते ही छींक, नाक बहना, गले में खराश और खांसी जैसी श्वसन संबंधी समस्याएं अचानक बढ़ने लगती हैं। अधिकांश लोग तापमान के इस उतार-चढ़ाव को ही बीमारी की एकमात्र वजह मान लेते हैं। हालांकि, चिकित्सकीय अध्ययन बताते हैं कि सर्दी-जुकाम का मुख्य कारण मौसम नहीं बल्कि विभिन्न प्रकार के वायरस होते हैं। अमेरिकी स्वास्थ्य संस्था CDC के आंकड़ों के मुताबिक, एक वयस्क व्यक्ति को वर्ष भर में औसतन 2 से 3 बार सर्दी-जुकाम होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। जब मौसम परिवर्तित होता है, तब लोगों के रहन-सहन, बंद स्थानों में रहने की अवधि और विषाणुओं के प्रसारित होने के अनुकूल वातावरण में बदलाव आ जाता है। इन सभी कारकों के मिलने से बार-बार संक्रमित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
1. 200 से अधिक श्वसन वायरस और राइनोवायरस का हमला
सर्दी-जुकाम की समस्या किसी एक विशेष वायरस की वजह से उत्पन्न नहीं होती है। CDC के शोध दर्शाते हैं कि 200 से भी अधिक प्रकार के श्वसन वायरस इंसानी शरीर में सर्दी जैसे लक्षण पैदा करने में सक्षम हैं। इनमें राइनोवायरस को सबसे प्रमुख और आम कारण माना जाता है। जब कोई व्यक्ति एक बार सर्दी-जुकाम से उबर जाता है, तो इसका अर्थ यह नहीं होता कि उसे दोबारा संक्रमण नहीं होगा। चूंकि वातावरण में सैकड़ों अलग-अलग वायरस मौजूद रहते हैं, इसलिए एक वायरस से ठीक होने के बाद शरीर दूसरे नए वायरस की चपेट में आसानी से आ सकता है। यही कारण है कि एक ही सीजन के भीतर लोगों को बार-बार जुकाम का सामना करना पड़ता है।
2. मौसम बदलने पर बंद कमरों में ज्यादा समय बिताना
जब बाहर का मौसम अत्यधिक ठंडा या बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है, तो लोग अपना अधिकतर समय घरों, कार्यालयों या अन्य बंद परिसरों के भीतर बिताना पसंद करते हैं। बंद जगहों में वेंटिलेशन की कमी होती है और लोग एक-दूसरे के काफी करीब रहते हैं। यदि ऐसे माहौल में कोई संक्रमित व्यक्ति छींकता या खांसता है, तो हवा में फैले सूक्ष्म कणों के माध्यम से वायरस तेजी से दूसरों तक पहुंच जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि ठंड या मौसमी बदलाव के दौरान बंद स्थानों में इनडोर क्राउडिंग बढ़ने से श्वसन प्रणाली को प्रभावित करने वाले विषाणुओं के फैलने का जोखिम कई गुना अधिक हो जाता है।
3. दूषित सतहों का स्पर्श और स्वच्छता में लापरवाही
दैनिक गतिविधियों के दौरान हमारा ध्यान अक्सर इस ओर नहीं जाता कि हम किन-किन वस्तुओं को छू रहे हैं। दरवाजों के हैंडल, मेज, स्विच या अन्य सार्वजनिक सतहों पर वायरस मौजूद हो सकते हैं। जब कोई व्यक्ति किसी दूषित सतह को छूने के बाद बिना हाथ धोए अपनी आंखों, नाक या मुंह को स्पर्श करता है, तो वायरस को शरीर में प्रवेश करने का सीधा रास्ता मिल जाता है। इस प्रकार की अनजानी भूल बार-बार बीमार पड़ने की बड़ी वजह बनती है। संक्रमण के इस चक्र को तोड़ने के लिए नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोना तथा गंदे हाथों से चेहरे को छूने से बचना अत्यंत आवश्यक है।
4. कम नींद, शारीरिक थकान और रिकवरी में ढिलाई
आधुनिक जीवनशैली में पर्याप्त नींद न लेना और लगातार शारीरिक थकान के बीच काम करते रहना एक सामान्य बात बन गई है। जब शरीर को आवश्यक विश्राम नहीं मिलता, तो उसकी स्वाभाविक प्रतिरक्षा प्रणाली और संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित होती है। यदि सर्दी-जुकाम के शुरुआती लक्षण दिखने पर भी शरीर को आराम न दिया जाए, तो बीमारी लंबी खींच सकती है। विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि संक्रमण के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पीना, खूब पानी सेवन करना, पौष्टिक भोजन लेना और शरीर को पूरा आराम देना तेजी से स्वस्थ होने में मदद करता है।
5. वायरल संक्रमण बनाम एलर्जी की संभावना
हर बार मौसम बदलने पर होने वाली छींक या बहती नाक का कारण केवल वायरल सर्दी ही हो, यह ज़रूरी नहीं है। कई मामलों में ये लक्षण एलर्जिक प्रतिक्रिया के कारण भी हो सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति को हर बार मौसम बदलते ही लगातार ऐसी परेशानी होती है, तो इसके पीछे एलर्जी या अस्थमा जैसे कारण छिपे हो सकते हैं। सामान्य रूप से वायरल सर्दी 1 से 2 हफ्ते के भीतर खुद ठीक हो जाती है। परंतु यदि लक्षण 10 दिन बीत जाने के बाद भी न सुधरें, सांस लेने में तकलीफ हो, सीने में दर्द महसूस हो, तेज बुखार बना रहे या खांसी 3 हफ्ते से अधिक समय तक चले, तो बिना देरी किए डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।



















