बाहर से दिखने वाली मजबूत और मस्कुलर बॉडी इस बात की गारंटी नहीं देती कि अंदर सब कुछ ठीक चल रहा है. कर्नाटक से सामने आई एक घटना ने इसी सच्चाई को एक बार फिर उजागर कर दिया है. यहां 26 साल के एक प्रोफेशनल बॉडीबिल्डर की उस वक्त मौत हो गई, जब वह जिम में भारी वर्कआउट करने के बाद बिल्कुल फिट हालत में घर लौटा ही था. डॉक्टरों के अनुसार उसकी मौत साइलेंट हार्ट अटैक की वजह से हुई. इतनी कम उम्र में एक फिट दिखने वाले युवा की अचानक मौत से पूरा इलाका सन्न रह गया.
जिम से लौटा, सोफे पर बैठा और सब खत्म
मृतक युवा का नाम सुशील कुमार था. वह एक प्रोफेशनल बॉडीबिल्डर था और अपनी कड़क फिटनेस के लिए पहचाना जाता था. घटना वाले दिन भी उसका रूटीन हर रोज जैसा ही था. वह जिम गया, भारी वर्कआउट किया और पूरी तरह नॉर्मल हालत में घर वापस आया. घर पहुंचकर जैसे ही वह आराम करने के लिए सोफे पर बैठा, उसके सीने में अचानक तेज दर्द उठा और वह बेहोश होकर फर्श पर गिर पड़ा.
परिवार के लोग कुछ समझ पाते या उसे अस्पताल पहुंचा पाते, उससे पहले ही उसकी धड़कनें थम चुकी थीं. अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे ‘ब्रॉट डेड’ घोषित कर दिया. सुशील राज्य और नेशनल लेवल की कई बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिताओं में जीत दर्ज कर चुके थे और इंटरनेशनल लेवल पर देश का प्रतिनिधित्व करने की कड़ी तैयारी में जुटे थे.
युवाओं को आखिर क्यों आ रहे हैं हार्ट अटैक
इस हादसे के बाद मेडिकल एक्सपर्ट्स और फिटनेस ट्रेनर्स ने युवाओं को फिर आगाह किया है. डॉक्टरों का कहना है कि आजकल युवाओं में, और खासकर हैवी वर्कआउट करने वालों में, हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसके पीछे कुछ बड़ी वजहें गिनाई जाती हैं.
- ओवर-ट्रेनिंग: अपनी क्षमता से ज्यादा वजन उठाना और दिल पर जरूरत से अधिक दबाव डालना.
- सप्लीमेंट्स और स्टेरॉयड का शॉर्टकट: जल्दी बॉडी बनाने की होड़ में बिना डॉक्टरी सलाह के हैवी प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट्स या खतरनाक स्टेरॉयड लेना, जो सीधे दिल की नसों को ब्लॉक कर देते हैं.
- अधूरी नींद और स्ट्रेस: भारी वर्कआउट के बाद शरीर और दिल को जितने आराम की जरूरत होती है, वह न मिल पाना.
भारत में हर साल हार्ट अटैक से कितनी मौतें
द लैंसेट और ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज की रिपोर्ट बताती है कि भारत में होने वाली कुल मौतों में से करीब 25% से 28% मौतों की वजह दिल की बीमारियां और हार्ट अटैक हैं. संख्या में देखें तो हर साल करीब 20 लाख से 25 लाख लोग दिल की बीमारियों के चलते जान गंवा देते हैं.
चिंता की बात यह है कि बीते कुछ सालों में हार्ट अटैक से मरने वाले युवाओं की तादाद तेजी से बढ़ी है. ‘इंडियन हार्ट एसोसिएशन’ (IHA) और ‘एम्स-आईसीएमआर’ की संयुक्त रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक भारत में होने वाले कुल हार्ट अटैक में से करीब 25% मामले 40 साल से कम उम्र के युवाओं में देखे जा रहे हैं. नैशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े भी कहते हैं कि 18 से 30 साल के आयु वर्ग में अचानक कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक से मरने वालों की संख्या में तेज इजाफा हुआ है.
कामकाजी उम्र भी सुरक्षित नहीं
30 से 50 साल की कामकाजी आबादी पर भी खतरा कम नहीं है. ‘इंडियन हार्ट एसोसिएशन’ की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय पुरुषों में होने वाले कुल हार्ट अटैक में से 50% मामले 50 साल से कम उम्र के लोगों में होते हैं. पश्चिमी देशों की तुलना में भारतीयों को हार्ट अटैक औसतन 10 साल पहले आ रहा है, और भारत में पहली बार हार्ट अटैक आने की औसत उम्र 53 साल है.
कुल मौतों का बड़ा हिस्सा भले ही इसी उम्र वर्ग का हो, लेकिन यह सिलसिला अब तेजी से युवाओं की तरफ खिसक रहा है. अचानक होने वाली मौतों पर हुई एक ऑटोप्सी स्टडी में सामने आया कि 58% अचानक मौतें 18 से 45 साल के आयु वर्ग में हुईं, और इनमें से ज्यादातर साइलेंट हार्ट अटैक के मामले थे.
शॉर्टकट पर आंख मूंदकर भरोसा न करें
इस युवा बॉडीबिल्डर की मौत उन लाखों युवाओं के लिए बड़ी सीख और चेतावनी है, जो मानते हैं कि सिक्स-पैक एब्स और मस्कुलर बॉडी का मतलब ‘लोहे जैसी सेहत’ होता है. एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि जिम जरूर जाएं और बॉडी जरूर बनाएं, लेकिन शॉर्टकट और स्टेरॉयड के चक्कर में पड़कर अपने दिल के साथ खिलवाड़ बिल्कुल न करें.













