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मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर राजनाथ सिंह ने अर्पित की श्रद्धांजलि, राष्ट्रकवि के सांस्कृतिक नवजागरण को किया यादनेता जी
3 अग॰ 2026, 7:54 am (46 दिन पहले)· 1

मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर राजनाथ सिंह ने अर्पित की श्रद्धांजलि, राष्ट्रकवि के सांस्कृतिक नवजागरण को किया याद

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें नमन किया। उन्होंने गुप्त जी को आधुनिक हिंदी कविता का शिल्पकार और राष्ट्रीय चेतना का संवाहक बताया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आधुनिक हिंदी साहित्य के महान ध्वजवाहक और राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर संदेश साझा करते हुए गुप्त जी की ओजस्वी लेखनी और भारतीय संस्कृति के प्रति उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी रचनाओं के जरिए देशवासियों में देशभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और मानवीय मूल्यों को एक नई दिशा दी।

राष्ट्रीय चेतना और 'राष्ट्रकवि' की उपाधि

3 अगस्त को हर साल मैथिलीशरण गुप्त का जन्म दिवस मनाया जाता है, जिसे हिंदी साहित्य जगत में 'कवि दिवस' के रूप में भी जाना जाता है। झांसी के चिरगांव में जन्मे गुप्त जी ने हिंदी साहित्य की धारा को एक नई दिशा देने के लिए प्रयाग का रुख किया था। उनकी कविताओं में उमड़ती देशभक्ति और जन-जागरण की भावना से प्रभावित होकर महात्मा गांधी ने उन्हें 'राष्ट्रकवि' की उपाधि से विभूषित किया था। उनकी रचनाओं ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जन-मानस में आजादी की अलख जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

आधुनिक हिंदी काव्य के निर्माता

मैथिलीशरण गुप्त को खड़ी बोली हिंदी में काव्य रचना का अग्रणी स्तंभ माना जाता है। 'यशोधरा' और 'साकेत' जैसी महाकाव्यात्मक रचनाओं के माध्यम से उन्होंने भारतीय जीवन-मूल्यों, पौराणिक चरित्रों और मानवीय संवेदनाओं को उजागर किया। 'सखि, वे मुझसे कहकर जाते' जैसी पंक्तियां आज भी साहित्य प्रेमियों के दिलों में रची-बसी हैं। जीवनभर हिंदी और भारत की सेवा में समर्पित रही उनकी कलम ने आधुनिक हिंदी कविता को समृद्ध और सर्वग्राही बनाया।

जनता की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री के इस पोस्ट पर आम नागरिकों और साहित्य प्रेमियों ने भी व्यापक प्रतिक्रिया व्यक्त की। कई उपयोगकर्ताओं ने राष्ट्रकवि की प्रसिद्ध पंक्तियों को साझा करते हुए उन्हें नमन किया और भारतीय संस्कृति में उनके अमूल्य योगदान को रेखांकित किया।

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सवाल-जवाब

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती कब मनाई जाती है?
मैथिलीशरण गुप्त की जयंती प्रतिवर्ष 3 अगस्त को मनाई जाती है, जिसे हिंदी साहित्य में कवि दिवस के रूप में भी जाना जाता है।
मैथिलीशरण गुप्त को 'राष्ट्रकवि' की उपाधि किसने दी थी?
मैथिलीशरण गुप्त की देशभक्तिपूर्ण रचनाओं और राष्ट्रीय चेतना में योगदान से प्रभावित होकर महात्मा गांधी ने उन्हें 'राष्ट्रकवि' की उपाधि दी थी।
राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर राष्ट्रकवि को किस प्रकार याद किया?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मैथिलीशरण गुप्त को आधुनिक हिंदी काव्य का निर्माता और राष्ट्रीय-सांस्कृतिक नवजागरण की ओजस्वी आवाज बताकर श्रद्धांजलि दी।
मैथिलीशरण गुप्त की प्रमुख साहित्यिक कृतियां कौन-सी हैं?
मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध और कालजयी कृतियों में 'साकेत' और 'यशोधरा' मुख्य रूप से शामिल हैं।
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