हेपेटाइटिस हमारे लिवर को प्रभावित करने वाली एक गंभीर मेडिकल स्थिति है, जिसके प्रति जानकारी के आभाव में अक्सर लोग बड़ी स्वास्थ्य मुश्किलों में फंस जाते हैं। यह बीमारी मुख्य तौर पर पांच अलग-अलग प्रकार की होती है, जिन्हें A, B, C, D और E कहा जाता है। इनमें से हेपेटाइटिस B और C सबसे ज्यादा खतरनाक माने गए हैं क्योंकि शुरुआत में इनके कोई साफ लक्षण नजर नहीं आते हैं। इस वजह से चिकित्सा जगत में इन्हें साइलेंट किलर के नाम से भी पुकारा जाता है।
साइलेंट किलर क्यों है यह बीमारी
संक्रमण की चपेट में आने वाला व्यक्ति बिना किसी तकलीफ के कई सालों तक इस वायरस के साथ जीवित रह सकता है, जबकि अंदर ही अंदर यह वायरस लगातार लिवर को नुकसान पहुंचाता रहता है। जब तक मरीज को पीलिया, बहुत ज्यादा थकान या पेट में दर्द जैसी परेशानियां महसूस होती हैं, तब तक लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी भयानक स्थिति पैदा हो चुकी होती है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि क्या समाज के हर व्यक्ति को इस संक्रमण की जांच करानी जरूरी है या नहीं। इस बारे में फोर्टिस के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. रिंकेश कुमार बंसल ने विस्तार से बताया है कि किन लोगों को यह टेस्ट करवाना अनिवार्य है।
किन्हें है हेपेटाइटिस टेस्ट की सबसे ज्यादा जरूरत
डॉ. रिंकेश कुमार बंसल के अनुसार, चूँकि हेपेटाइटिस लंबे वक्त तक बिना किसी लक्षण के लिवर को तबाह कर सकता है, इसलिए हर एक नागरिक को रूटीन तौर पर इसकी स्क्रीनिंग कराने की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, कुछ खास जोखिम वाले समूहों के लिए समय रहते जांच करवाना बेहद आवश्यक हो जाता है। जिन लोगों को अतीत में कभी संक्रमित खून चढ़ाया गया हो, जिन्होंने अनियंत्रित या असुरक्षित तरीके से इंजेक्शन या टैटू का इस्तेमाल किया हो, जो लंबे समय से डायलिसिस पर चल रहे हैं, या जो मेडिकल सेक्टर यानी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हुए हैं, उन्हें अपनी जांच जरूर करानी चाहिए।
परिवार और गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां
जिन परिवारों में पहले से किसी को हेपेटाइटिस बी या सी की समस्या रह चुकी हो, उन लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं के लिए हेपेटाइटिस बी की जांच कराना बेहद जरूरी माना गया है ताकि समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें और यह संक्रमण होने वाले शिशु तक बिल्कुल न पहुंचे। यदि किसी इंसान को लंबे समय से लगातार कमजोरी या थकान बनी रहे, पीलिया की शिकायत हो, भूख में कमी आ जाए, पेट फूलने लगे या लिवर से जुड़ी अन्य कोई दिक्कत सामने आए, तो डॉक्टर की सलाह लेकर तुरंत जांच करवानी चाहिए। वर्तमान समय में हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए असरदार टीके उपलब्ध हैं, और यदि हेपेटाइटिस सी का समय रहते पता चल जाए तो इसका सफल इलाज भी पूरी तरह संभव है। इसलिए समय पर स्क्रीनिंग और उचित मेडिकल केयर ही इस बीमारी से बचने का सबसे बेहतरीन उपाय है।



















