यूरिनेशन मानव शरीर की एक अत्यंत सहज और महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से शरीर में जमा तरल अपशिष्ट और विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। आमतौर पर ज्यादातर पुरुष खड़े होकर यूरिन करते हैं, जबकि कुछ पुरुष बैठकर पेशाब करना पसंद करते हैं। ऐसे में अक्सर यह सवाल चर्चा में रहता है कि सेहत के दृष्टिकोण से बैठकर यूरिन करना ज्यादा बेहतर होता है या खड़े होकर। फोर्टिस अस्पताल के जाने-माने यूरोलॉजिस्ट डॉ. पंकज पवार ने इस विषय पर विस्तृत जानकारी साझा की है और बताया है कि यूरिन करने का सही तरीका क्या होना चाहिए।
व्यक्तिगत स्वास्थ्य और शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है सही तरीका
यूरोलॉजिस्ट डॉ. पंकज पवार का कहना है कि यूरिन करने की कोई एक स्थिति हर व्यक्ति के लिए समान रूप से सही या गलत नहीं हो सकती। सही तरीका हमेशा व्यक्ति के लिंग, उम्र, वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है। मुख्य उद्देश्य यह होना चाहिए कि मूत्राशय बिना किसी तनाव या पेट पर अतिरिक्त दबाव बनाए पूरी तरह और आराम से खाली हो सके। केवल बैठकर या केवल खड़े होकर यूरिन करने मात्र से कोई व्यक्ति स्वस्थ या अस्वस्थ नहीं हो जाता। यदि कोई पुरुष पूरी तरह स्वस्थ है और उसे मूत्र मार्ग से जुड़ी कोई परेशानी नहीं है, तो खड़े होकर यूरिन करना बिल्कुल सामान्य और सुरक्षित है।
पुरुषों के लिए बैठकर यूरिन करना कब होता है ज्यादा फायदेमंद
यद्यपि स्वस्थ पुरुषों के लिए खड़े होकर पेशाब करना सामान्य है, लेकिन कुछ विशिष्ट स्वास्थ्य स्थितियों में बैठकर यूरिन करना काफी राहत देने वाला साबित होता है। डॉ. पंकज पवार के अनुसार, जिन पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने की समस्या होती है, जिन्हें यूरिन करने में कठिनाई महसूस होती है, या जिनकी यूरिन की धार कमजोर होती है, उनके लिए बैठकर पेशाब करना अधिक आरामदायक रहता है। इसके अलावा, जिन लोगों को बार-बार पेशाब आने की शिकायत होती है या ऐसा महसूस होता है कि पेशाब करने के बाद भी मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हुआ है, उन्हें भी बैठकर यूरिन करने से फायदा मिलता है। बैठकर यूरिन करते समय पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां अधिक शिथिल और रिलैक्स हो जाती हैं, जिससे मूत्राशय बिना ज़ोर लगाए बेहतर तरीके से खाली हो पाता है। रात में बार-बार उठकर टॉयलेट जाने वाले बुजुर्ग पुरुषों के लिए भी बैठकर यूरिन करना ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक रहता है।
इंडियन बनाम वेस्टर्न टॉयलेट: मूत्राशय के स्वास्थ्य के लिए क्या है बेहतर
भारतीय और पश्चिमी टॉयलेट के इस्तेमाल को लेकर भी अक्सर बहस होती है। डॉ. पंकज पवार का मानना है कि भारतीय शौचालय में उकड़ू यानी स्क्वाटिंग की स्थिति में बैठने से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां अपने आप प्राकृतिक रूप से रिलैक्स हो जाती हैं। यह स्थिति कुछ लोगों में मूत्राशय को अधिक कुशलता से खाली करने में मदद कर सकती है। हालांकि, अभी तक कोई ऐसा ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो यह साबित करे कि भारतीय शौचालय हर स्थिति में वेस्टर्न कमोड से बेहतर होता है। यदि किसी व्यक्ति को घुटनों, कमर या कूल्हों में दर्द या ऑर्थोपेडिक समस्याएं नहीं हैं, तो भारतीय शौचालय का उपयोग पूरी तरह सुरक्षित है। वहीं दूसरी ओर, बुजुर्गों, जोड़ों के दर्द से पीड़ित मरीजों और हाल ही में सर्जरी करवा चुके लोगों के लिए वेस्टर्न कमोड का इस्तेमाल करना अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित विकल्प है।
यूरिनरी हेल्थ बनाए रखने के लिए यूरोलॉजिस्ट की खास सलाह
डॉ. पंकज पवार स्पष्ट करते हैं कि आप बैठकर यूरिन करते हैं, खड़े होकर करते हैं या किस प्रकार के टॉयलेट का उपयोग करते हैं, उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण यूरिनरी हाइजीन की अच्छी आदतें हैं। सबसे आवश्यक बात यह है कि कभी भी पेशाब को रोककर न रखें और टॉयलेट में मूत्राशय को पूरी तरह खाली करने के लिए ज़ोर न लगाएं। यदि आपको पेशाब करते समय दर्द, जलन, खून आना, बार-बार संक्रमण होना, कमजोर धार या बार-बार पेशाब आने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें अनदेखा न करें। ऐसी स्थिति में समय रहते यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना ही स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सबसे उचित कदम है।



















