रात को 10 घंटे सोने के बाद भी अगर सुबह उठते ही खुद को थका-हारा महसूस करते हैं, तो इसे सिर्फ आलस या मौसम का असर मत समझिए। विशेषज्ञों का कहना है कि एक स्वस्थ वयस्क के लिए हर दिन 7 से 9 घंटे की नींद काफी होती है। इससे ज्यादा सोने के बाद भी थकान बनी रहना शरीर की किसी अंदरूनी गड़बड़ी का इशारा हो सकता है जिसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं।
सबके लिए नींद की जरूरत अलग होती है
यह सच है कि हर इंसान को एक जितनी नींद की जरूरत नहीं होती। बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और किसी बीमारी से उबर रहे लोगों को सामान्य से अधिक नींद की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन अगर कोई पूरी तरह स्वस्थ इंसान लगातार जरूरत से कहीं ज्यादा सो रहा है, तो उसके पीछे कोई न कोई शारीरिक या मानसिक कारण छिपा होता है।
ज्यादा सोने से सेहत को होने वाले नुकसान
लंबे समय तक घंटों बिस्तर पर पड़े रहने का सीधा असर शरीर की सक्रियता पर पड़ता है। जब आप जरूरत से ज्यादा सोते हैं, तो शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, जिससे वजन बढ़ने का खतरा पैदा होता है और शरीर का मेटाबॉलिज्म भी धीमा पड़ सकता है। बहुत से लोगों को यह भी अनुभव होता है कि घंटों सोने के बाद भी सुस्ती, सिरदर्द और पूरे शरीर में भारीपन बना रहता है।
अत्यधिक नींद छिपी बीमारियों का इशारा भी हो सकती है
कई बार जरूरत से ज्यादा नींद आना किसी ऐसी स्वास्थ्य समस्या की तरफ ध्यान दिलाता है जो अभी तक सामने नहीं आई। नींद से जुड़ी कुछ स्थितियों में सोते वक्त सांस रुकने लगती है या रात में बार-बार नींद टूट जाती है। इसके कारण शरीर को भरपूर और गहरा आराम नहीं मिल पाता और व्यक्ति घंटों सोने के बाद भी खुद को थका हुआ ही पाता है।
जीवनशैली की गड़बड़ियां भी हैं अहम वजह
अनियमित दिनचर्या, लगातार तनाव, खान-पान में असंतुलन और जरूरत से ज्यादा कैफीन या शराब का सेवन नींद के चक्र को पूरी तरह बिगाड़ सकता है। इन आदतों की वजह से नींद की गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि व्यक्ति को बार-बार यही लगता है कि उसे अभी और नींद चाहिए।
हार्मोन्स और पुरानी बीमारियों का भी है गहरा संबंध
कुछ मामलों में हार्मोनल असंतुलन या लंबे समय से चली आ रही बीमारियां भी अत्यधिक नींद की वजह बन जाती हैं। थायरॉयड से जुड़ी समस्याएं, ब्लड शुगर में गड़बड़ी और तंत्रिका तंत्र की कुछ बीमारियां इंसान को हर वक्त नींद में डुबोए रखती हैं।
इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
अगर अत्यधिक नींद के साथ-साथ नीचे दिए गए लक्षण भी दिखाई दें, तो बिना देरी के डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए:
- दिनभर सुस्ती और आलस बना रहना
- किसी भी काम में मन न लगना और एकाग्रता में कमी
विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि अगर नींद की अवधि अचानक बढ़ जाए या लंबे समय तक थकान बनी रहे, तो चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। सही समय पर समस्या की पहचान होने से कई गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से बचाव हो सकता है।













