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डिजिटल हेल्थ मिशन से बदली अस्पतालों की तस्वीर, ओपीडी में आभा क्यूआर कोड स्कैन सेवा का आंकड़ा 25 करोड़ के पारस्वास्थ्य
8 अग॰ 2026, 4:18 pm (4 घंटे पहले)· 0

डिजिटल हेल्थ मिशन से बदली अस्पतालों की तस्वीर, ओपीडी में आभा क्यूआर कोड स्कैन सेवा का आंकड़ा 25 करोड़ के पार

आयुषमान भारत डिजिटल मिशन की आभा आधारित 'स्कैन एंड रजिस्टर' सेवा से अब तक 25 करोड़ से ज्यादा ओपीडी रजिस्ट्रेशन पूरे हो चुके हैं। रोजाना लगभग 4 लाख मरीज बिना लाइन में लगे क्यूआर कोड स्कैन करके अपना इलाज करवा रहे हैं।

आयुषमान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत शुरू की गई आभा आधारित 'स्कैन एंड रजिस्टर' सेवा ने देश भर के चिकित्सा संस्थानों में मरीजों के पंजीकरण की पारंपरिक प्रणाली को नया रूप दिया है। स्वास्थ्य केंद्रों के ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटरों पर लगने वाली लंबी कतारें अब सिमटने लगी हैं और मरीज अपने स्मार्टफोन की मदद से त्वरित पंजीकरण करा पा रहे हैं। इस आधुनिक सुविधा के माध्यम से अब तक 25 करोड़ से अधिक ओपीडी रजिस्ट्रेशन दर्ज किए जा चुके हैं। वर्तमान में हर दिन लगभग 4 लाख नागरिक इस डिजिटल माध्यम का उपयोग कर रहे हैं। कागजी कार्रवाई की आवश्यकता समाप्त होने से मरीजों के अमूल्य समय की बचत हो रही है और अस्पतालों के प्रशासनिक तंत्र की कार्यकुशलता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

क्यूआर कोड आधारित पंजीकरण की कार्यप्रणाली

अक्टूबर 2022 में आरंभ की गई इस डिजिटल प्रणाली का संचालन बेहद सरल एवं सुरक्षित है। अस्पताल में आने वाले मरीज आभा समर्थित किसी भी हेल्थ ऐप के जरिए वहां प्रदर्शित क्यूआर कोड को स्कैन करते हैं। स्कैन करने के उपरांत मरीज द्वारा डिजिटल सहमति देते ही उनकी आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तुरंत अस्पताल के प्रबंधन सूचना तंत्र में स्थानांतरित हो जाती है। इस प्रक्रिया से रजिस्ट्रेशन काउंटर पर प्रति मरीज लगने वाले समय में भारी कमी आई है। वर्तमान में यह सुविधा देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 756 जिलों में उपलब्ध है। देश के कुल 30,800 से अधिक अस्पतालों में यह प्रणाली सक्रिय रूप से काम कर रही है, जिसमें 24,000 सरकारी स्वास्थ्य केंद्र और 6,400 निजी चिकित्सा संस्थान शामिल हैं।

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डिजिटल ओपीडी अपनाने में अग्रणी राज्य और अस्पताल

डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने के मामले में बिहार राज्य देश में सबसे आगे है। बिहार में इस प्रणाली के जरिए 7.3 करोड़ से अधिक डिजिटल ओपीडी पंजीकरण दर्ज किए जा चुके हैं। इस सूची में 4.09 करोड़ पंजीकरण के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है, जबकि आंध्र प्रदेश 3.38 करोड़ पंजीकरण के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है। इसके अलावा जम्मू कश्मीर भी 1.39 करोड़ पंजीकरण के साथ शीर्ष राज्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। अस्पतालों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो दिल्ली एम्स 54.29 लाख से अधिक स्कैन एंड रजिस्टर ट्रांजैक्शन के साथ पूरे देश में प्रथम स्थान पर है। इसके अतिरिक्त एम्स भोपाल, एम्स भुवनेश्वर, एम्स पटना और एम्स रायपुर ने भी इस प्रणाली को लागू करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

वरिष्ठ नागरिकों को सहूलियत और नेटवर्क का विस्तार

इस डिजिटल पहल से अस्पतालों के नियमित चक्कर काटने वाले मरीजों, विशेषकर सीनियर सिटीजन और गर्भवती महिलाओं को बड़ी राहत मिली है। इन वर्गों को अब बार-बार भौतिक फॉर्म भरने और लंबी लाइनों में प्रतीक्षा करने की शारीरिक परेशानी से मुक्ति मिल गई है। नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के सीईओ डॉ सुनील कुमार बरनवाल के अनुसार यह माइलस्टोन डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम में बढ़ते भरोसे को दिखाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तकनीक ने मरीजों के अनुभव को सुगम बनाने के साथ-साथ अस्पतालों के दैनिक परिचालन प्रबंधन को भी सुधारा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, एम्स और मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ अब इस सुविधा का विस्तार ईएसआईसी और रेलवे अस्पतालों तक सफलतापूर्वक कर दिया गया है।

सवाल-जवाब

अस्पताल में आभा क्यूआर कोड से रजिस्ट्रेशन कैसे होता है?
मरीज अस्पताल परिसर में लगे क्यूआर कोड को किसी भी आभा इनेबल्ड हेल्थ ऐप से स्कैन करते हैं और सहमति देते ही उनकी जानकारी तुरंत अस्पताल के सिस्टम में दर्ज हो जाती है।
स्कैन एंड रजिस्टर सेवा के तहत अब तक कुल कितने रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं?
आयुषमान भारत डिजिटल मिशन के तहत इस सेवा के माध्यम से देश भर में 25 करोड़ से ज्यादा ओपीडी रजिस्ट्रेशन पूरे हो चुके हैं।
डिजिटल ओपीडी रजिस्ट्रेशन कराने में कौन सा राज्य सबसे आगे है?
बिहार 7.3 करोड़ से अधिक डिजिटल पंजीकरण के साथ देश में पहले स्थान पर है, जबकि उत्तर प्रदेश 4.09 करोड़ के साथ दूसरे स्थान पर है।
किस अस्पताल में सबसे ज्यादा क्यूआर कोड ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए हैं?
दिल्ली एम्स 54.29 लाख से अधिक ट्रांजैक्शन के साथ देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है।
यह सुविधा किन-किन अस्पतालों में लागू की गई है?
यह सुविधा देश भर के 30,800 से अधिक सरकारी, प्राइवेट, एम्स, ईएसआईसी और रेलवे अस्पतालों में शुरू की जा चुकी है।
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