राजस्थान के सरहदी बाड़मेर जिला अस्पताल ने मरीजों की सुविधा के लिए डिजिटल ई-प्रिस्क्रिप्शन प्रणाली शुरू की है। जयपुर के प्रसिद्ध एसएमएस अस्पताल की तर्ज पर तैयार की गई इस व्यवस्था में लेजर प्रिंटर और स्कैनर का उपयोग किया जाएगा। अब अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले लोगों को पुरानी, अस्पष्ट और दोहरी कार्बन पर्चियों के झंझट से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।
क्यूआर कोड स्कैन करते ही मिलेगी मेडिकल हिस्ट्री
इस नई तकनीकी व्यवस्था के तहत मरीज को मिलने वाली पर्ची पर एक यूनिक QR कोड अंकित रहेगा। जब भी इस QR कोड को स्कैन किया जाएगा, मरीज की ओपीडी से जुड़ी पूरी मेडिकल हिस्ट्री, डॉक्टर की सलाह और दी गई दवाओं का विवरण तुरंत स्क्रीन पर आ जाएगा। यह सारी जानकारी मोबाइल ऐप और IHMS सिस्टम पर उपलब्ध रहेगी। बाड़मेर जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. हनुमान राम चौधरी ने बताया कि डिजिटल पर्ची में दिया गया यूनिक QR कोड इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत है, जिससे डाटा सेकेंडों में हासिल हो जाता है और समय की बचत होती है।
अस्पष्ट लिखावट से होने वाली गलतियों पर लगेगी रोक
इससे पहले जिला अस्पताल में डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर या फिर हाथ से लिखी पर्चियों का चलन था। कई बार कार्बन कॉपी पर डॉक्टर की लिखावट या दवा की खुराक स्पष्ट नहीं हो पाती थी। इससे मरीजों को परेशानी होती ही थी, साथ ही फार्मासिस्टों को भी दवा समझने में खासी मशक्कत करनी पड़ती थी। कभी-कभी गलत दवा मिलने की आशंका बनी रहती थी। अब डिजिटल और प्रिंटेड पर्ची मिलने से दवा का नाम, उसकी सही खुराक और डॉक्टर के निर्देश बिल्कुल साफ दिखाई देंगे, जिससे दवा वितरण में होने वाली गलतियों की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
निशुल्क दवा वितरण केंद्रों पर खत्म होंगी लंबी लाइनें
इस तकनीकी नवाचार से अस्पताल के निशुल्क दवा वितरण केंद्रों पर भी काम आसान हो गया है। पहले फार्मासिस्टों को हर मरीज की मैनुअल एंट्री करनी पड़ती थी और रिकॉर्ड के लिए कार्बन कॉपियां संभालकर रखनी पड़ती थीं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब फार्मासिस्टों को कार्बन कॉपी सहेजने या लंबी लाइनों में खड़े मरीजों का रिकॉर्ड हाथ से दर्ज करने की जरूरत नहीं होगी। इससे काउंटर पर दवा मिलने की प्रक्रिया तेज हो गई है और मरीजों को लंबी कतारों से राहत मिल रही है।


















