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माइग्रेन को सामान्य सिरदर्द समझने की भूल न करें, जानिए क्यों महिलाओं को होती है यह तकलीफस्वास्थ्य
21 अग॰ 2026, 8:46 am (22 दिन पहले)· 0

माइग्रेन को सामान्य सिरदर्द समझने की भूल न करें, जानिए क्यों महिलाओं को होती है यह तकलीफ

माइग्रेन एक साधारण सिरदर्द से कहीं ज्यादा गंभीर और कष्टदायक समस्या है जो महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक प्रभावित करती है। नोएडा के फोर्टिस अस्पताल की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नेहा पंडिता के अनुसार, इसके पीछे हार्मोनल बदलाव, जीवनशैली और कई अन्य कारण जुड़े होते हैं।

अक्सर लोग माइग्रेन को एक सामान्य सिरदर्द मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इस दर्द से जूझने वाले ही जानते हैं कि यह शारीरिक रूप से कितना कष्टदायक होता है। इस गंभीर समस्या में सिरदर्द के अलावा उल्टी आना, तेज रोशनी या तेज आवाज से परेशानी होना, अत्यधिक थकान और किसी एक जगह पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस होना जैसे लक्षण सामने आते हैं। यही कारण है कि माइग्रेन किसी आम सिरदर्द से कहीं अधिक थका देने वाला अनुभव बन जाता है। मेडिकल आंकड़ों और अध्ययनों में भी यह देखा गया है कि महिलाओं में माइग्रेन की शिकायत पुरुषों की तुलना में काफी ज्यादा होती है, और इसका एक बहुत बड़ा कारण शरीर के हार्मोन्स में होने वाले लगातार बदलाव को माना जाता है।

इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए डॉ. नेहा पंडिता जो फोर्टिस अस्पताल, नोएडा में पार्किंसंस रोग और मूवमेंट डिसऑर्डर की वरिष्ठ सलाहकार न्यूरोलॉजिस्ट और यूनिट हेड हैं, बताती हैं कि महिलाओं के जीवन में माइग्रेन के दौरे अलग-अलग पैटर्न के साथ आ सकते हैं। हार्मोनल उतार-चढ़ाव के अलावा कई दूसरी वजहें भी इसके पीछे सक्रिय रहती हैं जो इस तकलीफ को बढ़ा सकती हैं।

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हार्मोन कैसे बदलते हैं माइग्रेन का पैटर्न

महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव सीधे तौर पर माइग्रेन को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। विशेष तौर पर पीरियड्स यानी मासिक धर्म के दौरान, गर्भावस्था के समय, डिलीवरी के तुरंत बाद के दौर में और रजोनिवृत्ति यानी मेनोपॉज के आसपास सिरदर्द का पैटर्न पूरी तरह बदल सकता है। हालांकि डॉ. पंडिता का स्पष्ट रूप से यह कहना है कि केवल यह देखना काफी नहीं है कि दर्द कितना तेज उठ रहा है, बल्कि माइग्रेन के दौरों के समय और उनके पूरे पैटर्न दोनों पर बारीक नजर रखना बहुत जरूरी होता है ताकि इसे बेहतर ढंग से समझा जा सके।

पीरियड्स और माइग्रेन का गहरा कनेक्शन

कई महिलाओं को यह शिकायत होती है कि उन्हें मासिक धर्म यानी पीरियड्स शुरू होने के आसपास ही माइग्रेन के तीव्र दौरे पड़ने लगते हैं। यह स्थिति पीरियड से ठीक पहले शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों, खासतौर पर एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में आने वाली गिरावट के कारण पैदा होती है। कुछ खास मामलों में महिलाओं के लिए मासिक धर्म के दौरान उठने वाले माइग्रेन को नियंत्रित करना अधिक कठिन साबित हो सकता है और इस समयावधि में सिर का दर्द कहीं अधिक भयानक रूप ले लेता है।

हालांकि केवल हॉर्मोन ही इस समस्या के एकमात्र जिम्मेदार नहीं होते हैं। आपकी नींद की गुणवत्ता, मानसिक तनाव और खान-पान में अनियमितता भी सिरदर्द को तेजी से बढ़ाने का काम करती है। आज की इस बेहद व्यस्त जीवनशैली में माइग्रेन और भी तेजी से ट्रिगर हो सकता है। पूरी नींद न लेना, समय पर भोजन न करना, शरीर में पानी की कमी होना और तनाव जैसी समस्याएं आम तौर पर हर किसी को परेशान करती हैं, लेकिन उन महिलाओं के लिए यह जोखिम और बढ़ जाता है जो दफ्तर के काम, पारिवारिक जिम्मेदारियों और घर के अन्य कामों के बीच संतुलन बनाने की लगातार कोशिश करती हैं। ये तमाम वजहें हर एक महिला में माइग्रेन का कारण नहीं बनती हैं, लेकिन जो महिलाएं पहले से ही इस न्यूरोलॉजिकल समस्या के प्रति संवेदनशील होती हैं, उनमें माइग्रेन का दौरा पड़ने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।

सिरदर्द के पैटर्न को समझने के लिए बनाएं डायरी

जिन महिलाओं को बार-बार माइग्रेन का सामना करना पड़ता है, उनके लिए डॉ. पंडिता एक बेहद उपयोगी उपाय के रूप में सिरदर्द की डायरी रखने की सलाह देती हैं। आपके लिए यह रिकॉर्ड रखना बेहद फायदेमंद हो सकता है कि सिरदर्द किस तारीख को हुआ, उसके साथ आपकी पीरियड साइकिल कैसी रही, आपने कितनी नींद ली, क्या खाया-पिया, कितना तनाव था और आपकी दिनचर्या में उस दिन क्या अन्य बदलाव आए थे। जब आप इन सभी कारकों को एक साथ एक जगह पर देखती हैं, तो ऐसे छिपे हुए पैटर्न सामने आ जाते हैं जिन्हें केवल अलग-अलग सिरदर्द पर विचार करने पर पहचान पाना बहुत मुश्किल होता है।

क्या माइग्रेन कम, ज्यादा या पूरी तरह खत्म हो सकता है

यह जरूरी नहीं है कि माइग्रेन की यह समस्या किसी महिला के पूरे जीवन भर एक जैसी ही बनी रहे। उदाहरण के लिए, गर्भावस्था का माइग्रेन पर पड़ने वाला असर हर महिला के शरीर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। कुछ गर्भवती महिलाओं को इस दौरान इस दर्द से राहत मिल जाती है, जबकि कुछ अन्य महिलाओं को लगातार माइग्रेन के दौरे पड़ते रहते हैं। इसके विपरीत, जब बच्चा पैदा हो जाता है तो उसके बाद शरीर में होने वाले भारी हार्मोनल बदलाव, नींद में खलल और नवजात शिशु की देखभाल की चौबीसों घंटे की जिम्मेदारियों के चलते माइग्रेन को मैनेज करना और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता है। वहीं दूसरी तरफ, रजोनिवृत्ति यानी मेनोपॉज के आसपास का समय जीवन में एक और बड़ा बदलाव लेकर आता है। इस विशेष पड़ाव पर कुछ महिलाओं का माइग्रेन काफी बढ़ जाता है जबकि कुछ अन्य महिलाओं की स्थिति में सुधार आ जाता है। जैसा कि डॉ. पंडिता बताती हैं, ऐसा कोई एक निश्चित पैटर्न नहीं है जो हर एक महिला पर पूरी तरह लागू होता हो।

बार-बार होने वाले सिरदर्द को सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें

इस बात को हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि दुनिया का हर सिरदर्द माइग्रेन नहीं होता है और न ही माइग्रेन की स्थिति हर व्यक्ति में बिल्कुल एक जैसी दिखाई देती है। हालांकि बार-बार होने वाले सिरदर्द जो आपके काम, आपकी नींद, आपके रिश्तों या आपकी रोजमर्रा की सामान्य गतिविधियों में लगातार बाधा डालते हैं, उन्हें कभी भी एक ऐसी लाचारी के रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए जिसके साथ किसी महिला को चुपचाप जीना पड़े। यदि कभी अचानक और बेहद गंभीर सिरदर्द महसूस हो, और विशेष रूप से तब जब इसके साथ शरीर में कमजोरी आना, बोलने में कठिनाई होना, देखने में परेशानी महसूस होना, भ्रम की स्थिति बनना या बेहोशी छा जाने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो बिना एक पल गंवाए तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

सवाल-जवाब

माइग्रेन के मुख्य लक्षण क्या होते हैं?
माइग्रेन में तेज सिरदर्द के साथ-साथ उल्टी आना, तेज रोशनी और आवाज से परेशानी, अत्यधिक थकान और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस होती है।
महिलाओं को पुरुषों की तुलना में माइग्रेन क्यों ज्यादा होता है?
महिलाओं में माइग्रेन अधिक होने का एक बड़ा कारण उनके शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव और मासिक धर्म से जुड़े उतार-चढ़ाव हैं।
डॉ. नेहा पंडिता माइग्रेन के मरीजों को क्या सलाह देती हैं?
डॉ. पंडिता सिरदर्द के पैटर्न को समझने के लिए एक डायरी रखने की सलाह देती हैं जिसमें तारीख, पीरियड साइकिल, नींद और खानपान का रिकॉर्ड रखा जा सके।
किन लक्षणों के साथ तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अचानक और बेहद गंभीर सिरदर्द होने पर, विशेषकर जब इसके साथ कमजोरी, बोलने में कठिनाई या बेहोशी जैसे लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
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