मौसम में हल्का सा बदलाव भी सर्दी-जुकाम से लेकर पेट की गड़बड़ी तक कई परेशानियां लेकर आता है, और इसकी बड़ी वजह हमारी बदलती खान-पान की आदतें होती हैं. मिर्जापुर की डाइटिशियन ज्योति सिंह का कहना है कि अगर थाली में सही सब्जियां शामिल कर ली जाएं, तो मौसम के करवट लेने पर भी सेहत बिगड़ने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है.
क्यों जरूरी है सीजनल सब्जियां खाना
ज्योति सिंह के मुताबिक उनका एक सीधा सा सिद्धांत है, ईट रीजनल, ईट सीजनल यानी अपने इलाके की और उसी मौसम में उगने वाली सब्जियां खाएं. उनका कहना है कि जो लोग इसी मंत्र को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लेते हैं, वे ज्यादातर बीमारियों से खुद ब खुद बचे रहते हैं और बीमारी उन्हें परेशान नहीं करती.
लौकी, तरोई, करेला जैसी सब्जियां क्यों फायदेमंद
डाइटिशियन ने बताया कि इस सीजन में लौकी शरीर को ठंडा रखने का बेहतरीन जरिया है. इसके अलावा नेनुआ, तरोई, करेला, भिंडी और चौराई जैसी सब्जियां भी फिलहाल बाजार में उपलब्ध हैं, और उनके मुताबिक ये सारी सब्जियां किसी अमृत से कम नहीं हैं. उन्होंने कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने, वजन घटाने और शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने के लिए इन रीजनल और सीजनल सब्जियों को खाना हमारे शरीर के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है.
चौराई से किन्हें रखनी चाहिए दूरी
हालांकि ज्योति सिंह ने एक अहम चेतावनी भी दी. उनके मुताबिक चौराई में सोडियम की मात्रा काफी ज्यादा होती है, इसलिए जिन लोगों को ब्लड प्रेशर की दिक्कत है या किडनी से जुड़ी कोई समस्या है, उन्हें चौराई खाने से बचना चाहिए. हालांकि लौकी, भिंडी, करेला, तरोई और शिमला मिर्च ऐसी सब्जियां हैं जिन्हें कोई भी मरीज बेझिझक खा सकता है.
किडनी के मरीजों के लिए भी सुरक्षित
डाइटिशियन ने साफ किया कि किडनी के मरीज, जिन्हें आमतौर पर खान-पान में सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है, उनके लिए भी ये सब्जियां पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती हैं. यानी वे भी इन्हें बिना किसी झिझक के अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. उनका कहना है कि बदलते मौसम में ये सब्जियां खासतौर पर फायदेमंद साबित होती हैं. इन्हें खाने से न सिर्फ शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है, बल्कि किसी भी तरह की सेहत से जुड़ी परेशानी होने की आशंका भी काफी कम हो जाती है. यही वजह है कि इन सब्जियों को सदाबहार यानी हर मौसम में उपयोगी सब्जियां माना जाता है.




















