हिंदी सिनेमा जगत में दशकों पुरानी कई कहानियां और अनसुने किस्से आज भी बड़े चाव से सुने और दोहराए जाते हैं। बड़े पर्दा के दिग्गजों के बीच आपसी अनबन और सेट पर हुए विवादों की खबरों से बॉलीवुड की दुनिया भरी पड़ी है। ऐसी ही एक बहुचर्चित कहानी 1980 के दशक के उत्तरार्ध से जुड़ी है, जिसमें यह दावा किया जाता रहा है कि महान अभिनेता अमरीश पुरी ने शूटिंग सेट पर देरी से पहुंचने के कारण गोविंदा पर हाथ उठा दिया था। कई सालों तक मीडिया और दर्शकों के बीच इस वाकये की खूब चर्चा हुई। हालांकि, अब अमरीश पुरी के पुत्र राजीव पुरी ने सार्वजनिक रूप से सामने आकर इन सभी दावों पर पूर्णविराम लगा दिया है। एक विशेष साक्षात्कार के दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनके पिता के स्वभाव में हिंसा की कोई जगह नहीं थी और किसी सहयोगी कलाकार पर हाथ उठाने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
क्या था 9 घंटे देरी और थप्पड़ से जुड़ा पूरा विवाद?
यह किस्सा मुख्य रूप से वर्ष 1989 की मशहूर एक्शन फिल्म 'दो कैदी' की शूटिंग के समय का बताया जाता है। उस दौर की मीडिया रिपोर्टों और फिल्मी गलियारों की गपशप के अनुसार, सेट पर अमरीश पुरी सुबह 9 बजे ही अपने तय समय पर पूरी तैयारी के साथ पहुंच गए थे। दूसरी ओर, अभिनेता गोविंदा शाम 6 बजे सेट पर आए, यानी वह पूरे 9 घंटे की देरी से शूटिंग स्थल पर पहुंचे थे। कहानियों में दावा किया गया कि अमरीश पुरी, जो समय की पाबंदी और अनुशासन के लिए जाने जाते थे, गोविंदा के इस रवैये से बेहद नाराज हो गए। कथित तौर पर पूरी फिल्म यूनिट, तकनीशियनों और क्रू मेंबर्स के सामने ही अमरीश पुरी का आपा खो गया और उन्होंने गोविंदा को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। इस घटना के बाद से ही दोनों अभिनेताओं के रिश्तों में दरार आने की खबरें फैलीं और 1989 में रिलीज हुई 'दो कैदी' के बाद यह जोड़ी फिर कभी पर्दे पर एक साथ काम करती नजर नहीं आई।
राजीव पुरी ने पोडकास्ट में खोली अफवाहों की पोल
वरिष्ठ पत्रकार विक्की लालवानी के पॉडकास्ट में शिरकत करते हुए राजीव पुरी ने इस बरसों पुराने किस्से की असलियत पर से पर्दा उठाया। जब उनसे सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या वाकई उनके पिता ने गोविंदा को थप्पड़ मारा था, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के इसे एक मनगढ़ंत और झूठी कहानी करार दिया। राजीव पूरी ने कहा कि उन्हें बिल्कुल भी विश्वास नहीं है कि सेट पर ऐसी कोई अप्रिय घटना घटी होगी। अपने पिता के शांत और पेशेवर व्यवहार का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अमरीश पुरी अपनी जिंदगी में कभी भी इतने उग्र नहीं हुए कि किसी पर शारीरिक रूप से हमला करें।
अपने पिता की शख्सियत और कार्यशैली के बारे में बात करते हुए राजीव पुरी ने आगे बताया कि अमरीश पुरी बेहद अनुशासित और गंभीर व्यक्ति थे। वह तभी अपनी आवाज ऊंची करते थे जब कोई उन्हें लगातार दो-तीन बार परेशान करे या काम में बार-बार बाधा डाले। लेकिन किसी भी स्थिति में किसी इंसान पर हाथ उठाना उनके सिद्धांतों और चरित्र के पूरी तरह खिलाफ था। राजीव ने स्वीकार किया कि उन्होंने खुद भी पिछले कई सालों में इस किस्से के बारे में बहुत कुछ सुना और अखबारों में पढ़ा है। हालांकि, उन्होंने कभी इन बातों पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि एक बेटे के रूप में वह अपने पिता के संस्कार और व्यवहार को बहुत अच्छी तरह जानते थे, और उन्हें पूरा यकीन था कि उनके पिता ऐसा कोई कदम कभी नहीं उठा सकते थे।
पेशेवर रिश्ते और दोबारा साथ काम न करने की वजह
यद्यपि राजीव पुरी ने थप्पड़ मार वाले दावे को सिरे से खारिज कर दिया, लेकिन उन्होंने इस बात को जरूर स्वीकार किया कि गोविंदा के देर से आने की आदत ने दोनों अभिनेताओं के पेशेवर संबंधों को प्रभावित किया होगा। उन्होंने कहा कि समय पर न आना अमरीश पुरी जैसे समयनिष्ठ कलाकार को नागवार गुजरता था। गोविंदा को भी संभवतः इस बात का अंदाजा हो गया होगा कि अमरीश पुरी सेट पर समय की पाबंदी को लेकर बहुत सख्त हैं और देरी करना उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं है।
राजीव पुरी के अनुसार, शायद इसी समझ के चलते गोविंदा ने भविष्य में अमरीश पुरी के साथ दोबारा काम न करने का फैसला किया होगा, ताकि सेट पर किसी तरह का तनाव पैदा न हो। इसके साथ ही राजीव ने यह बात भी पूरी तरह साफ कर दी कि उनके पिता के दिल में गोविंदा के प्रति कोई व्यक्तिगत कड़वाहट, गुस्सा या रंजिश नहीं थी। अमरीश पुरी किसी भी बात को अपने दिल से लगाकर नहीं रखते थे और काम के बाद अपने मन में कोई नाराजगी नहीं पालते थे।
भारतीय सिनेमा में अमरीश पुरी का अमूल्य योगदान
अमरीश पुरी का नाम हिंदी सिनेमा के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। वह भारतीय फिल्म उद्योग के उन विरले कलाकारों में से थे, जिन्होंने खलनायकी से लेकर सकारात्मक और हास्य भूमिकाओं में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनकी रौबदार आवाज, दमदार आंखें और प्रभावशाली संवाद अदायगी दर्शकों को बांधकर रखती थी। फिल्म 'मिस्टर इंडिया' में उनके द्वारा निभाया गया मोगैम्बो का किरदार आज भी मील का पत्थर माना जाता है। इसके अलावा 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' में चौधरी बलदेव सिंह का कड़क पिता का रोल और 'विरासत' जैसी फिल्मों में उनका संवेदनशील अभिनय दर्शकों के दिलों में हमेशा अमर रहेगा।
अपनी अद्वितीय अदाकारी और बहुमुखी प्रतिभा से दर्शकों पर दशकों तक राज करने वाले इस महान अभिनेता का निधन वर्ष 2005 में 72 वर्ष की उम्र में हुआ था। भले ही आज अमरीश पुरी हमारे बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में, उनके यादगार किरदार और उनसे जुड़े किस्से आज भी बॉलीवुड और उनके प्रशंसकों के बीच पूरी शिद्दत के साथ याद किए जाते हैं।



















