पारंपरिक भारतीय चिकित्सा और आयुर्वेद में हल्दी वाले दूध को सेहत का खजाना माना गया है, जिसे वैश्विक स्तर पर गोल्डन मिल्क के नाम से भी जाना जाता है। बदलते दौर में भी लोग रात को सोने से पहले इसका सेवन करना पसंद करते हैं। साओल हार्ट सेंटर के संस्थापक, एमबीबीएस और एमडी, डॉक्टर बिमल छाजेर ने इस पारंपरिक पेय के वैज्ञानिक पहलुओं, इसके सेवन के सही तरीकों और इसके प्रयोग से जुड़ी जरूरी सावधानियों पर अपने विचार साझा किए हैं। सही तरीके से तैयार किया गया हल्दी वाला दूध शरीर को कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ पहुंचाता है, परंतु गलत मात्रा या अनुचित स्थिति में इसका सेवन शरीर के लिए प्रतिकूल प्रभाव भी पैदा कर सकता है।
हृदय स्वास्थ्य, कोलेस्ट्रॉल और इम्यून सिस्टम पर हल्दी का प्रभाव
हल्दी में मौजूद औषधीय गुण इसे एक बेहतरीन स्वास्थ्यवर्धक पेय बनाते हैं। हल्दी का सबसे प्रमुख सक्रिय घटक करक्यूमिन होता है। यह तत्व शरीर के भीतर मौजूद ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है और बॉडी सेल्स को किसी भी तरह के नुकसान से सुरक्षित रखता है। हल्दी वाले दूध में शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं, जो शरीर के आंतरिक अंगों में होने वाली सूजन को नियंत्रित करने में सहायक होती हैं। शरीर की सूजन कम होने से हृदय की कार्यप्रणाली पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके नियमित और संतुलित सेवन से शरीर में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसके अतिरिक्त, इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती प्रदान करते हैं। यह पाचन क्रिया को सुचारू बनाने के साथ-साथ त्वचा की प्राकृतिक चमक को बेहतर करने में भी भूमिका निभाता है।
दूध के चयन से लेकर सही सामग्री तक, सेवन का सही तरीका
हल्दी वाले दूध का पूरा फायदा उठाने के लिए इसे बनाने की विधि और इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों का सही होना अत्यंत आवश्यक है। इस पेय को तैयार करते समय हल्दी की मात्रा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में आधे चम्मच से अधिक हल्दी का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि आप हृदय रोग से पीड़ित हैं या वजन नियंत्रित रखना चाहते हैं, तो हमेशा लो फैट दूध या स्कीम्ड मिल्क का ही उपयोग करें। जो लोग डेयरी उत्पादों का सेवन नहीं करते, वे प्लांट बेस्ड मिल्क का चयन भी कर सकते हैं। इस दूध के पोषण स्तर को और अधिक बढ़ाने के लिए इसमें चुटकी भर काली मिर्च, दालचीनी और थोड़ा सा अदरक मिलाया जा सकता है। काली मिर्च में मौजूद तत्व हल्दी के करक्यूमिन को शरीर में आसानी से अवशोषित होने में मदद करते हैं। डॉक्टर बिमल छाजेर स्पष्ट करते हैं कि हल्दी वाला दूध कोई चमत्कारिक इलाज नहीं है। इसका सही लाभ तभी मिलता है जब व्यक्ति अपनी दिनचर्या में संतुलित आहार, ताजे फल, हरी सब्जियां और नियमित शारीरिक व्यायाम को शामिल करे।
इन स्वास्थ्य समस्याओं में भूलकर भी न करें हल्दी वाले दूध का सेवन
यद्यपि हल्दी वाला दूध कई बीमारियों में फायदेमंद है, लेकिन कुछ विशिष्ट स्वास्थ्य स्थितियों में इसका सेवन करने से बचना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को अत्यधिक गैस, एसिडिटी या पाचन संबंधी तीव्र समस्या रहती है, तो हल्दी वाला दूध उनकी तकलीफ को बढ़ा सकता है। इसके अलावा, जो मरीज खून पतला करने वाली दवाएं (एंटीकोगुलेंट्स) ले रहे हैं, उन्हें भी इसका सेवन करने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि हल्दी में भी खून को प्राकृतिक रूप से पतला करने वाले गुण होते हैं। गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) के मरीजों के लिए भी यह पेय नुकसानदायक हो सकता है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन शरीर में पित्त के उत्पादन को तेज करता है और गॉल ब्लैडर के संकुचन को बढ़ाता है, जिससे मरीज की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए किसी भी पुरानी बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को अपनी डाइट में इसे शामिल करने से पहले चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लेना चाहिए।



















