बोर्ड परीक्षा की उल्टी गिनती शुरू होते ही छात्र-छात्राओं का पूरा दिन और रात किताबों, नोट्स, मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन के बीच सिमट जाता है। घंटों तक लगातार पढ़ाई करना किसी मानसिक और शारीरिक मैराथन से कम नहीं होता। इस बेहद व्यस्त दिनचर्या में छात्र अक्सर यह ध्यान ही नहीं दे पाते कि उनके शरीर का सबसे नाजुक अंग यानी उनकी आंखें कब बेतहाशा थकने लगी हैं। सुबह से देर रात तक किताबों के पन्नों पर नजरें गड़ाए रखना या स्मार्टफोन और कंप्यूटर स्क्रीन पर लंबे समय तक नोट्स पढ़ना आंखों की मांसपेशियों पर भारी दबाव डालता है। इसका सीधा नतीजा आंखों में सूखापन, तेज जलन, भारीपन और लगातार रहने वाले सिरदर्द के रूप में सामने आता है।
अधिकतर छात्र और अभिभावक इस भारीपन या चुभन को सिर्फ एक आम थकान समझकर पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। हकीकत यह है कि यह अनदेखी आगे चलकर पढ़ाई की परफॉर्मेंस और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती है। शंकरा आई हॉस्पिटल, कानपुर के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. पुनीत जौहरी के मुताबिक, परीक्षाओं के पूरे दौर में सबसे ज्यादा दबाव और तनाव आंखों को ही झेलना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि लंबे अध्ययन घंटों के दौरान अगर आंखों की उचित और समय पर देखभाल न की जाए, तो दृष्टि क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। राहत की बात यह है कि कुछ बेहद आसान, व्यावहारिक और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर छात्र न केवल आई-स्ट्रेन से सुरक्षित रह सकते हैं, बल्कि अपनी एकाग्रता को भी काफी बढ़ा सकते हैं।
थकान मिटाने के लिए 20-20-20 नियम अपनाएं
लंबे समय तक बिना रुके पन्नों या स्क्रीन पर नजर टिकाए रखने से आंखों की सिलियरी मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव पड़ता है। इस निरंतर दबाव से मुक्ति पाने के लिए 20-20-20 का नियम चिकित्सा जगत में सबसे कारगर माना जाता है। इस नियम का पालन करना बेहद सरल है। हर 20 मिनट के अध्ययन सत्र के बाद अपनी दृष्टि किताबों या डिस्प्ले से हटा लें। इसके बाद कम से कम 20 फीट की दूरी पर स्थित किसी वस्तु या खिड़की के पार 20 सेकंड तक लगातार देखें। यह संक्षिप्त विश्राम आंखों की मांसपेशियों को तुरंत शिथिल करता है, थकान मिटाता है और दृष्टि को दोबारा तरोताजा कर देता है।
किताबों और स्क्रीन का सही कोण व दूरी तय करें
अध्ययन के दौरान बैठने की मुद्रा और आंखों से सामग्री का कोण सही रखना अनिवार्य है। अक्सर छात्र बिस्तर पर लेटकर पढ़ते हैं या फिर किताबों को चेहरे के अत्यधिक करीब सटाकर पढ़ने लगते हैं, जो आंखों के लिए बेहद नुकसानदेह साबित होता है। हमेशा किताबों को अपनी आंखों से लगभग 30 से 40 सेंटीमीटर की सुरक्षित दूरी पर रखकर पढ़ना चाहिए। यदि आप पढ़ाई के लिए लैपटॉप, टैबलेट अथवा डेस्कटॉप कंप्यूटर का उपयोग कर रहे हैं, तो मॉनिटर की ऊंचाई और फासला इस प्रकार व्यवस्थित करें कि आपको अपनी गर्दन या आंखों को नीचे की ओर ज्यादा न झुकाना पड़े और न ही उन पर अतिरिक्त जोर पड़े।
कमरे में रोशनी का संतुलन और चमक से बचाव
अध्ययन कक्ष में प्रकाश की व्यवस्था का दृष्टि पर सीधा असर पड़ता है। केवल टेबल लैंप की तेज रोशनी में पूरे अंधेरे कमरे में बैठकर पढ़ना या फिर आंखों पर सीधे पड़ने वाली अत्यधिक तेज रोशनी दृष्टि को नुकसान पहुंचाती है और उसे कमजोर बना सकती है। पढ़ाई हमेशा ऐसे कमरे में करनी चाहिए जहां पर्याप्त और संतुलित रोशनी फैली हो। इसके अलावा इस बात का विशेष ध्यान रखें कि रोशनी की कोई भी तेज चमक या चकाचौंध आपकी किताब के पन्नों या डिजिटल स्क्रीन से परावर्तित होकर सीधे आंखों में न लगे, क्योंकि यह चमक आंखों को सामान्य से कहीं अधिक तेजी से थका देती है।
डिजिटल स्क्रीन पर जानबूझकर पलकें झपकाएं
जब भी कोई छात्र स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप की स्क्रीन पर कोई प्रश्न हल कर रहा होता है या डिजिटल सामग्री पढ़ रहा होता है, तो उसका प्राकृतिक ब्लिंकिंग रेट यानी पलकें झपकाने की सामान्य गति नाटकीय रूप से घट जाती है। पलकें कम झपकने के कारण आंखों की ऊपरी परत पर मौजूद प्राकृतिक नमी तेजी से सूखने लगती है। यही सूखापन आगे चलकर खुजली, किरकिरापन और जलन की गंभीर समस्या बन जाता है। इस परेशानी से बचने का सीधा रास्ता यह है कि डिजिटल गैजेट्स का उपयोग करते समय छात्र बीच-बीच में सचेत होकर जानबूझकर पलकें झपकाते रहें, जिससे कॉर्निया की प्राकृतिक नमी बरकरार रहे।
लगातार पढ़ने के बजाय छोटे अंतराल लें
लगातार दो से तीन घंटे तक बिना किसी ठहराव के अपनी मेज पर जमे रहना न तो उत्पादकता के लिहाज से सही है और न ही शारीरिक तंदुरुस्ती के लिए। पढ़ाई के हर 30 से 40 मिनट के बाद पांच मिनट का एक छोटा ब्रेक लेना बेहद लाभकारी होता है। अपनी अध्ययन कुर्सी से उठें, कमरे में थोड़ा टहलें, शरीर को हल्का स्ट्रेच करें और कुछ क्षणों के लिए पलकों को बंद करके आंखों को पूरा विश्राम दें। यह छोटा सा ठहराव न केवल मस्तिष्क को तरोताजा करता है, बल्कि आंखों की थकी हुई मांसपेशियों को भी गहरा आराम पहुंचाता है।
पौष्टिक खान-पान और पूरी नींद से मजबूत करें दृष्टि
आंखों का स्वास्थ्य केवल बाहरी आदतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध आपकी भोजन की थाली और सोने के चक्र से भी है। छात्रों को अपने दैनिक आहार में हरी पत्तेदार सब्जियों, गाजर, ताजे मौसमी फलों, सूखे मेवों और आवश्यक विटामिन से भरपूर खाद्य पदार्थों को प्रमुखता से शामिल करना चाहिए। शरीर और आंखों में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए पूरे दिन खूब पानी पीना जरूरी है। इसके साथ ही, पूरी रात जागकर परीक्षा की तैयारी करने की अस्वस्थ आदत से बचना चाहिए। रात में कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी व निर्बाध नींद लेना अनिवार्य है। ध्यान रहे कि बिस्तर पर जाने और सोने से ठीक पहले मोबाइल फोन का उपयोग पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।
परेशानी के संकेतों को न दबाएं, सही चश्मा पहनें
यदि अध्ययन के दौरान आपको बार-बार गंभीर सिरदर्द महसूस होता है, आंखों को बार-बार मलने की मजबूरी होती है, कक्षा के ब्लैकबोर्ड पर लिखी चीजें स्पष्ट नहीं दिखाई देतीं या फिर अक्षरों में धुंधलापन नजर आता है, तो इसे कतई मामूली थकान मानकर नजरअंदाज न करें। ये किसी छिपी हुई दृष्टि समस्या या चश्मे के नंबर में बदलाव के प्राथमिक संकेत हो सकते हैं। ऐसी किसी भी परेशानी के लगातार बने रहने पर तुरंत किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। बिना डॉक्टरी परामर्श के मेडिकल स्टोर से कोई भी आई-ड्रॉप्स डालने या घरेलू नुस्खे आजमाने से पूरी तरह परहेज करें। जो छात्र पहले से चश्मा पहनते हैं, उन्हें हमेशा सही और सटीक पावर के लेंस का इस्तेमाल करना चाहिए और समय-समय पर अपनी आंखों का परीक्षण कराते रहना चाहिए।


















