राजस्थान के बारां जिले में स्थित शाहाबाद क्षेत्र में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का एक गंभीर मामला सामने आया है। देवरी प्राथमिक अथवा क्षेत्रीय अस्पताल में इलाज के लिए आए एक बेहद गंभीर मरीज को समय पर एंबुलेंस सुविधा न मिलने से भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीज की शारीरिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी और उसे लगातार खून की उल्टियां हो रही थीं। परिजनों ने गंभीर हालत में उसे देवरी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां मौजूद चिकित्सकों ने शुरुआती इलाज के बाद स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए उसे तुरंत बड़े चिकित्सा केंद्र (हायर सेंटर) के लिए रेफर कर दिया। अस्पताल प्रबंधन ने नियमानुसार मरीज की रेफर पर्ची भी तैयार कर दी, लेकिन इसके बाद मरीज को आगे ले जाने के लिए एंबुलेंस वाहन उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
रेफर पर्ची के बाद दो घंटे तक भटकते रहे परिजन
अस्पताल से रेफर पर्ची जारी होने के बाद मरीज के तीमारदारों और परिजनों की मुसीबतें अचानक और अधिक बढ़ गईं। परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि वे एंबुलेंस प्राप्त करने के लिए करीब दो घंटे की अवधि तक लगातार संबंधित फोन नंबरों पर संपर्क साधते रहे। इसके बावजूद समय पर कोई भी आपातकालीन वाहन अस्पताल परिसर में नहीं पहुंचा। इस पूरे दौरान खून की उल्टी कर रहा गंभीर मरीज अस्पताल के मुख्य भवन के बाहर खुले में तड़पता रहा और परिजन बेबस होकर मदद का इंतजार करते रहे। एंबुलेंस न आने के कारण मरीज की जान पर संकट मंडराता रहा, जिससे अस्पताल में मौजूद अन्य आम लोगों और अन्य मरीजों के परिजनों के बीच भी भारी असंतोष और गुस्सा देखने को मिला।
बीसीएमओ की मौजूदगी के बाद भी बदहाल व्यवस्था
इस पूरी घटना ने देवरी अस्पताल के प्रशासनिक प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इसी अस्पताल में ब्लॉक चीफ मेडिकल ऑफिसर (बीसीएमओ) डॉ. सरवन कुमार शर्मा का भी कार्यालय व तैनाती है। बीसीएमओ जैसे उच्च जिम्मेदार अधिकारी की उसी स्थान पर मौजूदगी के बावजूद एक गंभीर मरीज को समय पर एंबुलेंस न मिल पाना स्थानीय प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही को उजागर करता है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने इस लचर कार्यप्रणाली पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ग्रामीणों का कहना है कि शाहाबाद के इस पूरे अंचल में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं लंबे समय से बदहाली का शिकार हैं और बुनियादी चिकित्सा संसाधनों के अभाव में आए दिन मरीजों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। कुछ स्थानीय निवासियों ने स्वास्थ्य अधिकारियों पर यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी प्रशासनिक दायित्वों को निभाने के बजाय सोशल मीडिया गतिविधियों में अधिक व्यस्त रहते हैं, जिससे जमीनी व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। हालांकि, अधिकारियों पर लगाए गए इन व्यक्तिगत आरोपों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
आदिवासी अंचल में आपातकालीन सुविधाओं का संकट
राजस्थान का शाहाबाद इलाका बारां जिले के सबसे पिछड़े और आदिवासी बहुल इलाकों में गिना जाता है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण स्थानीय ग्रामीण आबादी को किसी भी बड़ी या जटिल बीमारी के समुचित इलाज के लिए दूर-दराज़ स्थित बड़े शहरों के अस्पतालों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए आपातकालीन एंबुलेंस सेवा एक जीवन रक्षक साधन साबित होती है। यदि ऐसे संवेदनशील मामलों में समय पर रेफरल वाहन उपलब्ध न हो, तो मरीज को हायर सेंटर पहुंचाने में होने वाली देरी अत्यंत प्राणघातक सिद्ध हो सकती है। इस ताज़ा घटनाक्रम के सार्वजनिक होने के बाद क्षेत्र के निवासियों और जन प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों के अस्पतालों में चौबीसों घंटे एंबुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य मरीज को इस प्रकार की अमानवीय स्थिति से न गुजरना पड़े।



















